नई दिल्ली, 22 जनवरी 2026। 1984 के सिख विरोधी दंगों के एक चर्चित मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। इस फैसले ने पीड़ित परिवारों को गहरा झटका दिया, जहां कोर्ट रूम में फैसला सुनते ही कई सदस्य भावुक होकर रो पड़े।

कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: जनकपुरी-विकासपुरी हिंसा मामला

राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज दिग्विनय सिंह ने गुरुवार को यह फैसला सुनाया। मामला 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान जनकपुरी और विकासपुरी इलाकों में हुई हिंसा से जुड़ा है, जिसमें दो सिखों की बेरहमी से हत्या हुई थी। कोर्ट ने सबूतों के अभाव में सज्जन कुमार को निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया।

सज्जन कुमार ने कोर्ट में अपना बचाव करते हुए कहा था कि वे निर्दोष हैं और कभी भी दंगों में शामिल नहीं हुए। उन्होंने दावा किया कि जांच एजेंसी के पास उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। दिसंबर 2025 में सुनवाई पूरी होने के बाद यह फैसला सुरक्षित रखा गया था।

पीड़ित परिवारों का दर्द: आंसुओं से भीगा कोर्ट रूम

फैसला सुनते ही पीड़ित परिवार के सदस्य कोर्ट में फूट-फूटकर रोने लगे। एक सदस्य ने कहा, “42 साल बाद भी न्याय नहीं मिला, हमारे अपनों का खून व्यर्थ गया।” परिवारों ने फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील करने का ऐलान किया है। यह दृश्य 1984 दंगों के अनसुलझे घावों को फिर से कुरेद गया।

1984 के दंगाइयों ने सिख समुदाय पर कहर बरपाया था। जनकपुरी में सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या 1 नवंबर को हुई, जबकि 2 नवंबर को गुरचरण सिंह को जिंदा जला दिया गया। इन जघन्य अपराधों ने पूरे देश को हिला दिया था।

सज्जन कुमार का राजनीतिक सफर: विवादों से घिरा नाम

सज्जन कुमार पूर्व कांग्रेस सांसद रह चुके हैं और 1984 दंगों के कई मामलों में आरोपी रहे। पहले एक मामले में उन्हें उम्रकैद की सजा हुई थी, लेकिन इस केस में उन्हें राहत मिली। उन्होंने कोर्ट में कहा, “मैं सपने में भी ऐसी हिंसा का हिस्सा नहीं बन सकता।”

उनके वकीलों ने तर्क दिया कि गवाहों के बयान विरोधाभासी हैं और जांच पक्षपाती रही। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी ऐसे मामलों में SIT गठित की थी, जो 2015 में इस केस को दोबारा खोला।
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1984 सिख विरोधी दंगों का काला इतिहास: हजारों बेमिसाल जिंदगियां

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 31 अक्टूबर 1984 से दिल्ली सहित कई शहरों में सिख विरोधी दंगे भड़क गए। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में 2700 से अधिक सिख मारे गए। नानावटी कमीशन ने जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार जैसे नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए थे।

दंगों में महिलाओं और बच्चों पर भी अत्याचार हुए। हजारों सिख बेघर हो गए। सरकार ने कई जांच समितियां बनाईं, लेकिन ज्यादातर मामलों में न्याय अधर में लटका रहा। आज भी सिख संगठन न्याय की मांग कर रहे हैं।

दो अलग-अलग FIR: SIT की 2015 जांच का नतीजा

स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने 2015 में दो FIR दर्ज कीं। पहली FIR सोहन सिंह और अवतार सिंह की हत्या से जुड़ी, दूसरी गुरचरण सिंह को जिंदा जलाने की। सज्जन कुमार इनमें मुख्य आरोपी थे। जुलाई 2025 में उनके बयान दर्ज हुए, जहां उन्होंने खुद को निर्दोष बताया।

कोर्ट ने गवाहों के बयानों और फॉरेंसिक सबूतों की कमी का हवाला दिया। पीड़ित पक्ष के वकील निराश हैं, लेकिन अपील की उम्मीद जता रहे हैं। यह फैसला अन्य लंबित मामलों पर असर डाल सकता है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: विपक्ष का हमला तेज

कांग्रेस ने फैसले का स्वागत किया, लेकिन AAP और BJP ने सवाल उठाए। सिख संगठनों ने इसे न्यायिक विफलता बताया। दिल्ली में सिख कमेटियों ने विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। राजनीतिक हलकों में यह बहस छिड़ गई है।

1984 दंगों पर कई किताबें और डॉक्यूमेंट्री बनीं, जो आज भी सच्चाई उजागर करती हैं। न्याय की इस लड़ाई ने सिख समुदाय को एकजुट किया है।

अन्य प्रमुख मामले: सज्जन कुमार की कानूनी जंग

सज्जन कुमार पर कुल 10 से अधिक केस चले। उत्तम नगर मामले में उन्हें 2018 में उम्रकैद मिली, जो सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी। लेकिन विकासपुरी केस में बरी होना उनके लिए बड़ी जीत है।

जांच आयोगों ने उनकी भूमिका पर सवाल उठाए, लेकिन अदालतों ने अलग-अलग फैसले दिए। यह दर्शाता है कि 1984 दंगों के केस जटिल हैं।

पीड़ितों की कहानियां: अनसुना दर्द

सोहन सिंह के परिवार ने बताया कि दंगाइयों ने घर घेर लिया और ईंट-पत्थरबाजी की। गुरचरण सिंह को भीड़ ने जिंदा भस्म कर दिया। ये कहानियां आज भी दिल दहला देती हैं। परिवार 40 साल से न्याय के लिए लड़ रहे।

सिख महिलाओं पर हुए अत्याचारों ने समाज को झकझोर दिया। कई विधवाओं ने जीवनभर संघर्ष किया।

न्याय की उम्मीद: हाईकोर्ट में अपील तय

पीड़ित पक्ष अब हाईकोर्ट जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट तक यह पहुंच सकता है। 1984 दंगों के बचे मामलों में तेजी की जरूरत है। सरकार को विशेष अदालतें बढ़ानी चाहिए।

सिख संगठन दिल्ली में मार्च निकाल सकते हैं। यह फैसला पूरे समुदाय के लिए संदेश है।

1984 दंगों की पृष्ठभूमि: इंदिरा हत्याकांड से भड़की आग

31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी के सिख अंगरक्षकों ने उनकी हत्या की। इसके बाद राजनीतिक संरक्षण में दंगे हुए। राजीव गांधी सरकार पर लापरवाही के आरोप लगे। नानावटी आयोग ने 2005 में रिपोर्ट दी।

दिल्ली के अलावा कानपुर, बोकारो में भी हिंसा हुई। कुल 8000 सिख मारे गए।

सबक और सुधार: भविष्य के लिए सबक

ऐसे फैसले न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं। फास्ट ट्रैक कोर्ट और मजबूत सबूत जरूरी। सिख समुदाय ने क्षमा की मांग की, लेकिन न्याय पहले।

आजादी के बाद का यह सबसे बड़ा नरसंहार था। याद रखना जरूरी।

सोशल मीडिया पर बवाल: वायरल हो रहा फैसला

ट्विटर और फेसबुक पर #SajjanKumarAcquitted ट्रेंड कर रहा। सिख यूथ आक्रोशित है। वीडियो क्लिप्स वायरल हो रहे।

मीडिया कवरेज पूरे दिन चला। YouTube पर लाइव डिबेट हो रही।

कानूनी विशेषज्ञों की राय: सबूतों की कमजोरी

वकीलों का कहना है कि समय बीतने से गवाह भूल गए। डिजिटल फॉरेंसिक की कमी। भविष्य में DNA टेस्ट मदद करेंगे।

1984 सिख विरोधी दंगा: सज्जन कुमार बरी, कोर्ट फैसले पर पीड़ित परिवार रो पड़ेन्याय मिले या न मिले, इतिहास सज्जन कुमार को याद रखेगा।
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