36 साल पुलिस को चकमा: प्रदीप बना अब्दुल, शादी की, मुरादाबाद में पकड़ा गया 2025

1987 में उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के थाना प्रेम नगर क्षेत्र में प्रदीप कुमार सक्सेना ने पारिवारिक विवाद में अपने भाई संजीव सक्सेना की हत्या कर दी थी। कोर्ट ने हत्या (धारा 302) और चोरी (धारा 379) के मामलों में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। 1989 में पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद वह कभी वापस नहीं लौटा और फरार हो गया।

नई पहचान का खेल
फरार होने के बाद प्रदीप ने अपना नाम बदलकर अब्दुल रहीम उर्फ सक्सेना ड्राइवर रख लिया, दाढ़ी बढ़ाई, कुर्ता-पैजामा पहना और 2003 में धर्म परिवर्तन कर लिया। वह मुरादाबाद के मोहल्ला करूला और ट्रांसपोर्ट नगर में ड्राइवरी करने लगा तथा एक मुस्लिम विधवा महिला से शादी कर नया परिवार बसा लिया। पैतृक गांव और परिवार से कोई संपर्क नहीं रखा, जिससे 36 साल तक उसका सुराग नहीं लगा।
पुलिस की लंबी तलाश
पुलिस ने सालों तक प्रदीप की तलाश की, लेकिन बिना सुराग के असफल रही। हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चार सप्ताह में उसे गिरफ्तार कर सीजीएम कोर्ट बरेली में पेश करने का सख्त आदेश दिया। एसएसपी अनुराग आर्य ने सीओ आशुतोष शिवम की अगुवाई में टीम गठित की, जो परिवार से पूछताछ और तकनीकी जांच के बाद मुरादाबाद पहुंची।
गिरफ्तारी का खुलासा
टीम ने डेला पीर सब्जी मंडी में संदिग्ध व्यक्ति को घेरा, जो अब्दुल रहीम के नाम से जाना जाता था। सख्ती से पूछताछ पर उसने कबूल किया कि वह प्रदीप कुमार सक्सेना है। उसके पास कोई अवैध वस्तु नहीं मिली, लेकिन कोर्ट में पेश कर शेष सजा पूरी करने की प्रक्रिया शुरू हो गई।

