दक्षिण अफ्रीका में 60,000 पेंग्विन भूख से मरे! सार्डीन मछली गायब, विलुप्ति का खतरा?

दक्षिण अफ्रीका के तटों पर हाल के वर्षों में 60,000 से अधिक अफ्रीकी पेंग्विन भूख से मर चुके हैं, मुख्य वजह उनकी प्रमुख आहार सार्डीन मछली का लगभग गायब हो जाना है.

2004 से 2012 के बीच डैसन आइलैंड और रॉबेन आइलैंड जैसी दो प्रमुख कॉलोनियों में 95% से ज्यादा पेंग्विन खत्म हो गए. नई रिसर्च से साबित हुआ कि जलवायु परिवर्तन और अत्यधिक मछली पकड़ने ने इस भयानक संकट को जन्म दिया है.
पेंग्विन मौत का चौंकाने वाला वैज्ञानिक कारण
हर साल मौल्टिंग प्रक्रिया में 21 दिनों तक जमीन पर रहते हैं, जहां वे समुद्र में शिकार नहीं कर पाते. इस दौरान पर्याप्त वसा जमा न होने से वे भूखे मर गए, क्योंकि सार्डीन की कमी हो गई. समुद्र तापमान बढ़ने और लवणता बदलने से सार्डीन प्रजनन प्रभावित हुआ, पश्चिमी तट पर मछली 75% घटी.
अफ्रीकी पेंग्विन प्रजाति पर मंडराया विलुप्ति का संकट
2024 में गंभीर रूप से संकटग्रस्त घोषित किया गया, अब दुनिया में सिर्फ 10,000 प्रजनन जोड़े बचे हैं. पिछले 30 सालों में आबादी 80% गिर चुकी है. संरक्षण प्रयासों में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध, कृत्रिम घोंसले और कमजोर पेंग्विनों को भोजन देना शामिल है.
विशेषज्ञों की चेतावनी: सार्डीन न लौटी तो खत्म हो जाएंगे पेंग्विन
डॉ. रिचर्ड शर्ले warn करते हैं कि सार्डीन न बढ़ी तो प्रजाति जल्द विलुप्त हो जाएगी. प्रो. लोरिएन पिचेग्रू कहती हैं कि छोटी मछलियों का संकट पूरे समुद्री पारिस्थितिकी को तबाह करेगा. केपटाउन के बोल्डर बीच पर अब सैलानी मुश्किल से सौ पेंग्विन देख पाते हैं.

