हरिद्वार: महिला अस्पताल में एक गर्भवती महिला को भर्ती करने से इनकार कर दिए जाने के कारण उसे फर्श पर तड़पते हुए बच्चे को जन्म देना पड़ा। यह घटना सोमवार रात घटित हुई थी, और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे पूरे स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठे हैं।

घटना का विवरण

  • ब्रह्मपुरी क्षेत्र की रहने वाली एक महिला को आशा कार्यकर्ता के साथ महिला अस्पताल लाया गया था, लेकिन वहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और स्टाफ ने उसे भर्ती करने से मना कर दिया और वापस जाने को कहा।
  • महिला को प्रसव पीड़ा बढ़ती रही, लेकिन मदद नहीं मिली। आखिरकार उसने अस्पताल के फर्श पर ही बच्चे को जन्म दिया। इस दौरान स्टाफ निष्क्रिय बना रहा और आशा वर्कर ने ही डिलीवरी करवाई।
  • परिवार के आरोप हैं कि न डॉक्टर, न नर्स और न ही अन्य स्टाफ ने कोई सहायता दी, बल्कि डॉक्टर ने दुर्व्यवहार भी किया, यहाँ तक कि फर्श की सफाई तक करवाने को कह दिया।

प्रशासनिक कार्रवाई

  • घटना की जांच के बाद, सीएमओ डॉ. आरके सिंह ने डॉक्टर सलोनी पंत की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। ड्यूटी पर तैनात दो स्टाफ नर्सों की सर्विस बुक में प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज की गई है।
  • मामले की गंभीरता को देखते हुए चार सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई, और राज्य महिला आयोग ने भी संज्ञान लिया है।

सामाजिक प्रतिक्रिया

  • घटना के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और अन्य संगठनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
  • इस वीडियो और खबर ने सोशल मीडिया पर जनता का तीव्र आक्रोश खड़ा कर दिया और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर बड़ा सवाल खड़ा किया है।

मां और नन्हे शिशु की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति

यह घटना उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करने वाली है, जहां लापरवाही के कारण महिला को मानवीय गरिमा से वंचित होना पड़ा।

मां और नवजात शिशु दोनों फिलहाल स्वस्थ हैं। अस्पताल प्रशासन और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बच्चे की डिलीवरी के बाद महिला को तत्काल अस्पताल में भर्ती किया गया था और तब से दोनों की स्वास्थ्य स्थिति सामान्य बताई गई है। किसी भी गंभीर समस्या या जटिलता की सूचना नहीं दी गई है और दोनों सुरक्षित हैं।

परिवार की तरफ से आए ताजा बयानों के अनुसार, मां और बच्चे की वर्तमान स्थिति स्वस्थ और सामान्य है। मीडिया रिपोर्ट्स में परिजनों के हवाले से कहा गया है कि अस्पताल प्रशासन द्वारा भर्ती किए जाने के बाद दोनों को सही समय पर चिकित्सा सुविधा मिली, जिससे उनकी हालत अब ठीक है।

फैमिली ने यह भी आरोप लगाया कि शुरू में डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ ने कोई सहयोग नहीं किया, लेकिन डिलीवरी के बाद प्रबंधन ने महिला और शिशु की आवश्यकता अनुसार देखभाल शुरू कर दी। परिवार का कहना है कि दोनों सुरक्षित हैं, पर अस्पताल की लापरवाही की वजह से उन्हें काफी तकलीफ का सामना करना पड़ा।

प्रमुख चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) की जांच में भी यही निष्कर्ष सामने आया है कि महिला तथा नवजात शिशु को उचित चिकित्सा सुविधा मिल रही है और वे फिलहाल ठीक हैं।

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