पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत जारी हुई ड्राफ्ट मतदाता सूची के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस और CPI(M) नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा है कि राज्य में “तेजी से बढ़ते अवैध घुसपैठियों” को लेकर BJP द्वारा बनाया गया नैरेटिव अब तथ्यों के सामने कमजोर पड़ गया है।

“घुसपैठियों को हटाने का दावा खोखला साबित हुआ”: मोहम्मद सलीम

CPI(M) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा कि ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद यह साफ हो गया है कि BJP का यह दावा गलत था कि बंगाल में बड़ी संख्या में अवैध घुसपैठिए मतदाता सूची में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मुस्लिम बहुल इलाकों में मतदाता सूची का मैपिंग अपेक्षाकृत बेहतर हुआ है, जिससे BJP की बयानबाज़ी की पोल खुल गई।

“यह हिंदू-मुस्लिम नहीं, गरीब और वंचितों का मुद्दा है”

मोहम्मद सलीम ने यह भी आरोप लगाया कि BJP राष्ट्रीय जनगणना से इसलिए बच रही है क्योंकि जनगणना में सभी भारतीय नागरिक शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को ‘घुसपैठिया’ या ‘रोहिंग्या’ कहकर निशाना बनाना लोगों को अमानवीय बनाने की कोशिश है।

उनके अनुसार, SIR प्रक्रिया में आदिवासी समुदाय, महिलाएं, किराए के मकानों में रहने वाले, और सड़क पर जीवन यापन करने वाले लोग सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं क्योंकि उनके पास जरूरी दस्तावेज़ नहीं होते।

कांग्रेस नेता गुलाम अहमद मीर का सवाल

जम्मू-कश्मीर से कांग्रेस विधायक गुलाम अहमद मीर ने कहा कि BJP द्वारा फैलाया गया यह दावा कि बंगाल में एक करोड़ से अधिक घुसपैठिए हैं, पूरी तरह निराधार साबित हुआ है। उन्होंने बताया कि ड्राफ्ट सूची में जिन 58 लाख नामों को हटाया गया है, उनमें से बड़ी संख्या मृत, स्थानांतरित या डुप्लिकेट मतदाताओं की है।उन्होंने सवाल उठाया कि BJP बताए कि इनमें से वास्तव में कितने लोग “अवैध घुसपैठिए” हैं।

SIR प्रक्रिया की जल्दबाजी पर उठे सवाल

कांग्रेस और CPI(M) दोनों ने स्पष्ट किया कि वे SIR प्रक्रिया के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन चुनाव आयोग द्वारा अपनाई गई जल्दबाज़ी और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल जरूर उठाते हैं। नेताओं का कहना है कि यदि कानूनी भारतीय नागरिकों के नाम गलती से हटते हैं, तो उन्हें वापस सूची में शामिल करने की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।

ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रमुख आंकड़े

जारी ड्राफ्ट सूची के अनुसार:

  • कुल हटाए गए नाम: 58
  • लाखमृत मतदाता: लगभग 24 लाख
  • स्थानांतरित/अनुपस्थित: 32 लाख से अधिक
  • डुप्लिकेट नाम: 1.3 लाख के करीब

अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2025 को जारी की जाएगी।

2026 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी तापमान बढ़ा

पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर यह विवाद राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि “घुसपैठिया” मुद्दा चुनावी ध्रुवीकरण के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि BJP इसे मतदाता सूची की शुद्धता से जोड़कर देख रही है।

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