दक्षिण एशिया में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी Inter-Services Intelligence (ISI) लगातार अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि उसका नया निशाना अब बांग्लादेश बन गया है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, ISI ने पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश में अपने एजेंटों और नेटवर्क को मज़बूत किया है, जो देश की आंतरिक व्यवस्था में सेंध लगाने का काम कर रहे हैं।

बांग्लादेश के कई इलाकों — खासकर ढाका, चिटगांव और सिलहट क्षेत्र — में ISI समर्थित गिरोहों की गतिविधि में खासी तेजी आई है। बताया जा रहा है कि ये लोग स्थानीय संगठनों, मदरसों और व्यापारिक समूहों में सेंध लगाकर सूचनाएँ इकट्ठा कर रहे हैं और कट्टरपंथी विचारधारा फैला रहे हैं।

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर मंडरा रहा खतरा

भारत और बांग्लादेश के संबंध पिछले एक दशक में काफी मजबूत हुए हैं। दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद, मानव तस्करी और उग्रवाद जैसे मुद्दों पर मिलकर काम किया है। लेकिन अब ISI की साजिशें इन रिश्तों में तनाव पैदा करने की कोशिश कर रही हैं।

सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान की रणनीति का मकसद बांग्लादेश में अस्थिरता पैदा करके भारत के रणनीतिक हितों को नुकसान पहुंचाना है। यदि यह साजिश गहराती है, तो न केवल भारत-बांग्लादेश की साझेदारी को खतरा होगा, बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र का सामरिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।

बांग्लादेश की खुफिया एजेंसियों का बड़ा ऑपरेशन

सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश की नेशनल सिक्योरिटी इंटेलिजेंस (NSI) ने हाल ही में कई ISI एजेंटों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया है। इन एजेंटों के पास से फर्जी दस्तावेज़, एन्क्रिप्टेड डिवाइस और नकली पासपोर्ट बरामद किए गए हैं। जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान से फंडिंग के ज़रिए बांग्लादेश के कुछ स्थानीय संगठनों को भी सपोर्ट किया जा रहा था।

डिजिटल फॉरेंसिक जांच में कई ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट और व्हाट्सऐप ग्रुप्स की जानकारी मिली है जो भारत विरोधी प्रचार और धार्मिक कट्टरता फैलाने के लिए बनाए गए थे।

बांग्लादेश सरकार की सख्त कार्रवाई

बांग्लादेश सरकार ने इस बढ़ते खतरे पर सख्त रुख अपनाया है। गृह मंत्री असदुज्जामान खान ने मीडिया से कहा कि “कोई भी विदेशी एजेंसी बांग्लादेश की संप्रभुता से समझौता नहीं कर सकती। जो भी इसमें शामिल पाया गया, उसे बख्शा नहीं जाएगा।”

सरकार ने ढाका, चिटगांव और सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा बढ़ा दी है। बांग्लादेश रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) और पुलिस की विशेष इकाइयाँ लगातार संदिग्धों पर निगरानी रख रही हैं।

क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा

भारत के साथ-साथ नेपाल, म्यांमार और भूटान जैसे पड़ोसी देशों की सुरक्षा एजेंसियां भी इस बढ़ते नेटवर्क को लेकर सतर्क हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यदि ISI की यह गतिविधि बेखटके जारी रही, तो यह दक्षिण एशियाई क्षेत्र की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

नई दिल्ली स्थित सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. आर.के. त्रिपाठी के मुताबिक, “यह सिर्फ बांग्लादेश का मामला नहीं है, बल्कि यह एक क्षेत्रीय चुनौती है। ISI का मकसद भारत की सीमाओं के हर कोने में अशांति फैलाना और सामरिक दबाव बढ़ाना है।”

भारत की भूमिका और भविष्य की रणनीति

भारत ने इस मामले पर अपनी खुफिया एजेंसी RAW (Research and Analysis Wing) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के माध्यम से नज़दीकी समन्वय बढ़ा दिया है। दोनों देशों के बीच जानकारी साझा करने और सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

कूटनीतिक स्तर पर भारत ने ढाका से आग्रह किया है कि वह आतंक और जासूसी नेटवर्क के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रखे। साथ ही, दोनों देशों के बीच संयुक्त सुरक्षा अभ्यास और खुफिया सहयोग को नया बल दिया जा रहा है।

दक्षिण एशिया की सुरक्षा चिंताजनक

बांग्लादेश में ISI की बढ़ती दखलअंदाजी केवल एक देश की आतंरिक समस्या नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की समग्र सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ढाका और नई दिल्ली मिलकर इस चुनौती से कैसे निपटते हैं।

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