चिराग पासवान अभी भी बिहार चुनाव 2025 में सीट शेयरिंग को लेकर नाराज़ और आसन्न सहमति से पीछे हटे हुए हैं। वे अपनी मांगों पर डटे हुए हैं और बीजेपी की ओर से दिए गए ऑफर से संतुष्ट नहीं हैं। चिराग ने 30 से 35 सीटों की मांग की है जबकि बीजेपी 22 से 26 सीटों का प्रस्ताव रख रही है। इस विवाद के कारण एनडीए के अंदर सीट शेयरिंग का फॉर्मूला अभी तक तय नहीं हो पाया है और चिराग को मनाने के लिए बीजेपी के कई नेता लगातार प्रयास कर रहे हैं। चिराग ने मुलाकातों में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उन्हें अपने सम्मान की चिंता नहीं है, फिर भी सीटों के बंटवारे को लेकर अंतिम सहमति बनी नहीं है।

लोजपा (रामविलास) के अंदर भी सीट शेयरिंग को लेकर तनाव है, पर पार्टी एनडीए के साथ चुनाव लड़ना चाहती है। चिराग को सीटें मिलने के बाद वह मंत्री पद पर बने रहने और चुनाव की तैयारियों पर ध्यान देने की बात कह चुके हैं। अभी भी नित्यानंद राय और अन्य भाजपा नेता उनसे बैठक कर रहे हैं ताकि विवाद सुलझाया जा सके और अंतिम घोषणा की जा सके। चिराग की मांगों में खासकर वे क्षेत्र जहां उनकी पकड़ मजबूत है, वहां ज्यादा सीटें चाहिएं, जिससे फॉर्मूला बनाना मुश्किल हो रहा है।

संक्षेप में, चिराग पासवान बिहार चुनाव 2025 के लिए सीट शेयरिंग मुद्दे पर अभी भी स्थिर नहीं हुए हैं और तालमेल बनाने की प्रक्रिया जारी है, लेकिन भाजपा द्वारा मनाने की काफी कोशिशें हो रही हैं, इसलिए जल्द कोई समाधान की उम्मीद है।

चिराग पासवान ने बिहार चुनाव 2025 के लिए लगभग 30 से 36 सीटों की मांग की है। यह मांग बीजेपी द्वारा ऑफर की गई 22 से 26 सीटों से अधिक है, जिससे सीट शेयरिंग पर विवाद बना हुआ है। उनकी इस मांग के चलते अभी भी एनडीए में सीट बंटवारे का फाइनल फॉर्मूला नहीं बन पाया है।

भाजपा ने चिराग पासवान को बिहार चुनाव 2025 के लिए 22 से 26 सीटों का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा, भाजपा ने उन्हें राज्यसभा और विधान परिषद (MLC) की सदस्यता भी देने का ऑफर दिया है ताकि उनकी पार्टी और वे खुद को मजबूत बनाए रख सकें। भाजपा की यह पेशकश चिराग की 30 से 36 सीटों की मांग से कम है, इसलिए सीट शेयरिंग को लेकर अभी भी सहमति नहीं बन पाई है।

NDA में सीट शेयरिंग विवाद के कारण बिहार चुनाव 2025 में गठबंधन की उम्मीदवार रणनीति पर प्रभाव पड़ा है। चिराग पासवान की सीटों की मांग अधिक होने और बीजेपी के प्रस्ताव से कम होने के चलते सीट बंटवारा अभी अंतिम नहीं हो पाया है। इस विवाद के चलते उम्मीदवारों की सूची में देरी हुई है और गठबंधन के अंदर एकजुटता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बीजेपी को अब अपनी सोलो फूटप्रिंट बढ़ाने की महत्वाकांक्षा के साथ-साथ सहयोगी दलों की अपेक्षाओं और दवाब को भी संतुलित करना पड़ रहा है, जिससे उनकी रणनीति जटिल हो गई है। इससे चुनाव प्रचार और चुनावी तैयारियों पर भी असर पड़ा है क्योंकि उम्मीदवारों का चयन और प्रचार योजना अंतिम रूप में नहीं आ पाई है।

हालांकि, गठबंधन के नेता लगातार बैठकें कर समाधान निकालने की कोशिश में हैं और अक्टूबर 13 तक उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करने का लक्ष्य है, ताकि चुनाव अभियान को मजबूती मिले। विवाद के चलते चिराग की Partei लोक जनशक्ति पार्टी (राहुलविलास) नीतीश कुमार की JDU और बीजेपी दोनों के साथ सीटों को लेकर टकराव में है, जिससे रणनीतिक तालमेल प्रभावित हो रहा है।

इस पूरे विवाद से उम्मीदवारों के बीच असमंजस और गठबंधन की ताकत पर असर हो सकता है, लेकिन फिलहाल नेताओं की कोशिश है कि जल्द ही मतभेद दूर कर प्रभावी चुनावी गठबंधन बनाया जाए।

बिहार चुनाव 2025 के लिए एनडीए में सीट शेयरिंग का अंतिम फैसला अक्टूबर के मध्य, लगभग 13 अक्टूबर तक आने की उम्मीद है। गठबंधन के नेता इस तारीख तक उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करने का लक्ष्य रखे हुए हैं। इस बीच चिराग पासवान समेत सभी सहयोगी दलों के बीच बातचीत और मनाने की प्रक्रिया अभी जारी है ताकि जल्द सहमति बन सके और चुनावी रणनीति पर काम शुरू हो सके।

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