कांग्रेस ने नरकटियागंज विधानसभा क्षेत्र से शाश्वत केदार पांडेयको चुनाव मैदान में उतारा है। शाश्वत पांडेय, जो बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री केदार पांडेय के पोते हैं, चुनाव प्रचार में गांव-गांव पहुंचकर जनता से वोट की अपील कर रहे हैं।

इलाके की समस्याओं

उन्होंने विपक्ष पर नरकटियागंज के विकास की उपेक्षा का आरोप लगाया है और कहा है कि इलाके की समस्याओं को नजरअंदाज किया गया है। उनके अनुसार यह चुनाव नरकटियागंज की जनता के लिए निर्णायक मोड़ होगा और वह विकास व सुविधाओं को सुनिश्चित करेंगे जो वर्षों से छूटती आई हैं।

विपक्षी प्रत्याशी का दावा विकास और सुशासन

वहीं बीजेपी ने नरकटियागंज से संजय पांडेय को उम्मीदवार बनाया है, जो अपने चुनावी मंच पर विकास और सुशासन को आधार बना रहे हैं। संजय पांडेय ने विपक्ष को आरोपित किया है कि वे केवल हवा-हवाई वादे करते हैं और क्षेत्र की धरोहरों को बर्बाद करने का प्रयास किया है।

महागठबंधन में खींचतान

आरजेडी ने इस चुनाव में दीपक यादव को उम्मीदवार घोषित किया है, जो यादव और मुस्लिम वोट बैंक पर भरोसा करते हैं। कांग्रेस और आरजेडी ने महागठबंधन में नरकटियागंज सीट पर अपना-अपना उम्मीदवार उतारकर थोड़ी राजनीतिक खींचतान भी दिखाई है, लेकिन दोनों ही अपने-अपने समर्थकों से वोट की अपील कर रहे हैं।

नरकटियागंज में प्रमुख चुनावी मुद्दे

विकास की अनदेखी: चुनाव में प्रमुख बात नरकटियागंज के विकास की कमी को लेकर है। गन्ना किसानों को समय पर भुगतान न मिलना, चीनी मिलों की समस्या, बाढ़ नियंत्रण का अभाव, और बुनियादी सुविधाओं जैसे खराब सड़कों, बिजली की अनियमित आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं में कमजोरी को जनता बड़ा मुद्दा मान रही है। कई उम्मीदवार विकास के एजेंडे को लेकर जनता से जुड़े हैं।

बाढ़ और कृषि संकट

गंडक और सहायक नदियों की वजह से हर साल बाढ़ आती है जिससे खेती और जीवन संकट में आता है। इस समस्या का स्थायी समाधान स्थानीय लोगों की मुख्य मांग है।

रोजगार और शिक्षा

युवाओं में बेरोजगारी की समस्या गहराई से महसूस की जाती है। उच्च शिक्षा के लिए संस्थानों का अभाव और स्थानीय रोजगार के अवसरों की कमी से पलायन हो रहा है। रोजगार सृजन इस क्षेत्र का बड़ा चुनावी मुद्दा है।

जातीय समीकरण

यहाँ मुस्लिम मतदाता लगभग 30% हैं, जो चुनाव परिणामों को प्रभावित करते हैं। हालांकि, मुस्लिम वोट बिखरने का इतिहास है। राजपूत, भूमिहार, कुर्मी सहित अन्य जातीय समूह भी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

राजनीतिक समीकरण

इस विधानसभा सीट पर मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच होता रहा है। महागठबंधन भी इस बार सक्रिय है। व्यक्तिगत छवि व स्थानीय जुड़ाव भी चुनाव परिणाम पर प्रभाव डालते हैं।

इन्फ्रास्ट्रक्चर

सड़क, रेलवे कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण है क्योंकि नरकटियागंज जंक्शन उत्तर बिहार का बड़ा रेलवे स्टेशन है। इसके साथ-साथ आस-पास के कस्बों से कनेक्टिविटी पर भी ध्यान केंद्रित है।

मतदाताओं की निराशा

चुनावी वादों के बावजूद जमीनी हकीकत नहीं बदलने से मतदाता निराश हैं।

समग्र रूप से नरकटियागंज चुनाव में विकास, बाढ़ प्रबंधन, रोजगार, जातीय समीकरण और उम्मीदवार की साख निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। भाजपा विकास व सुशासन, कांग्रेस-आरजे़डी बेरोजगारी, किसान संकट व विकास की उपेक्षा को मुख्य मुद्दा बना रहे हैं। चुनाव कड़ा होने की संभावना है।

इस तरह नरकटियागंज सीट पर कांग्रेस के शाश्वत पांडेय, बीजेपी के संजय पांडेय और आरजेडी के दीपक यादव के बीच चुनावी मुकाबला होने जा रहा है, जहां विकास, जनता की समस्याओं और सियासी समीकरण मुख्य मुद्दे हैं। इस चुनाव का परिणाम 11 नवंबर 2025 को होगा.

The Daily BriefingबिहारHindinews,LatestNews,आरजेडी,कांग्रेस,नरकटियागंज,पूर्व मुख्यमंत्री,प्रत्याशी,बीजेपी,विधानसभा,हिंदीखबरकांग्रेस ने नरकटियागंज विधानसभा क्षेत्र से शाश्वत केदार पांडेय को चुनाव मैदान में उतारा है। शाश्वत पांडेय, जो बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री केदार पांडेय के पोते हैं, चुनाव प्रचार में गांव-गांव पहुंचकर जनता से वोट की अपील कर रहे हैं। इलाके की समस्याओं उन्होंने विपक्ष पर नरकटियागंज के...For Daily Quick Briefing