उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की बड़ी चाल: वाराणसी से गाजियाबाद तक होगी 17 रैलियां

उत्तर प्रदेश की सियासत एक बार फिर गर्म होने जा रही है। कांग्रेस पार्टी ने राज्य में अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने के लिए वाराणसी से लेकर गाजियाबाद तक 17 बड़ी रैलियों की तैयारी शुरू कर दी है। इन रैलियों को लेकर साफ संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस अब प्रदेश में अपनी सक्रियता बढ़ाने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के मिशन पर उतर चुकी है।

कांग्रेस का लक्ष्य – फिर से जमीनी धरातल पर पकड़ बनाना
लोकसभा चुनाव 2024 के बाद कांग्रेस धीरे-धीरे उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी भूमिका तलाश रही है। पार्टी का फोकस अब उन इलाकों पर है जहां संगठन कमजोर हुआ है। वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर और गाजियाबाद जैसे बड़े जिलों में होने वाली ये रैलियां कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और जनता से सीधे संवाद का मंच बनेंगी।
क्या सपा पर दबाव बनाने की रणनीति है ये अभियान?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस का यह मेगा प्लान सिर्फ संगठन विस्तार तक सीमित नहीं है। समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन की राजनीति में कांग्रेस अपनी ताकत दिखाना चाहती है ताकि भविष्य में सीट शेयरिंग को लेकर ज्यादा मजबूती से बातचीत कर सके। ऐसे में ये 17 रैलियां सपा पर दबाव बनाने के राजनीतिक दांव के तौर पर भी देखी जा रही हैं।
प्रियंका गांधी और राहुल गांधी की सक्रियता बढ़ेगी
सूत्रों के मुताबिक, इन रैलियों में प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी दोनों की मौजूदगी तय मानी जा रही है। दोनों नेता यूपी में कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ भाजपा सरकार को निशाने पर लेंगे। कांग्रेस की रणनीति है कि जनता के मुद्दों – महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं – को प्रमुखता से उठाया जाए।
राजनीतिक प्रभाव – 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी?
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि कांग्रेस की ये पहल 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के रूप में भी देखी जा सकती है। पार्टी अपने पुराने जनाधार को पुनर्जीवित करने और विपक्ष में अपने वजन को साबित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

