उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता को साइबर धोखाधड़ी से बचने की सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि कुछ फर्जी लोग और गिरोह “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर लोगों को डरा-धमकाकर पैसे वसूल रहे हैं.

जबकि भारत में इस तरह का कोई कानूनी नियम या प्रक्रिया नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जनता की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और ऐसे अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी है।

डिजिटल अरेस्ट — ठगों का नया हथकंडा

सीएम योगी ने अपनी बात में कहा कि डिजिटल अरेस्ट की अवधारणा पूरी तरह फर्जी और भ्रामक है। कई लोग इस शब्द से अपरिचित हैं, इसलिए जब उन्हें कोई कॉल या वीडियो कॉल करके “डिजिटल अरेस्ट” की धमकी दी जाती है, तो वे डरकर पैसे भेज देते हैं। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी खुद को पुलिस अधिकारीइनकम टैक्स अफसर या सीबीआई एजेंट बताकर वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ की बात करते हैं।

ऐसे मामलों में पीड़ित को एक निजी कमरे में वीडियो कॉल के जरिए बिठाया जाता है और उनसे कहा जाता है कि “अब आप जांच के अधीन हैं, आपका फोन ट्रैक किया जा रहा है, पुलिस रास्ते में है।” यह सब लोगों को डराने और उनसे पैसे ठगने का तरीका है।

हाल के मामलों ने बढ़ाई चिंता

बीते कुछ महीनों में देशभर से ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां लोगों को ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाया गया। कई बार अपराधी विदेश स्थित गिरोह से संचालित होते हैं, जो भारतीय नागरिकों को निशाना बनाते हैं। इस तरह के मामले उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान और तमिलनाडु जैसे राज्यों में दर्ज किए गए हैं।

सीएम योगी ने कहा कि अब वक्त है कि जनता जागरूक हो और किसी भी डिजिटल धमकी पर विश्वास न करे। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर धमकाता है, तो उसे तुरंत पुलिस, साइबर हेल्पलाइन 1930 या वेबसाइट cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें।https://thedbnews.in/up-shock-deoria-wife-falls-in-love-with-nephew-husband-returns-to-dubai-daughter-left-alone/

सरकार का फोकस — साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाना

योगी सरकार पहले से ही डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में कई कदम उठा रही है। सीएम ने बताया कि प्रदेश में साइबर थाना नेटवर्क को मजबूत किया गया है। हर जिले में साइबर सेल कार्यरत है, जो ऐसे मामलों की तुरंत जांच करता है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को विशेष साइबर प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे आधुनिक तकनीकों से अपराध पर नकेल कस सकें।

सरकार की कोशिश है कि न केवल अपराधियों को सजा मिले, बल्कि लोगों में डिजिटल जागरूकता भी बढ़े। इसके लिए स्कूलों, कॉलेजों और पंचायत स्तर तक जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।

जनता के लिए सीएम योगी की जरूरी सलाह

मुख्यमंत्री ने जनता से अपील की कि वे किसी भी अनजान कॉल या संदेश पर तुरंत प्रतिक्रिया न दें। यदि कोई “सरकारी अधिकारी” बनकर धन मांगता है, तो पहले उसका वेरिफिकेशन करें। उन्होंने पांच अहम सावधानियां बताईं —

  1. अपने बैंक या क्रेडिट कार्ड की जानकारी किसी को भी न दें।
  2. किसी लिंक या संदेश पर क्लिक करने से पहले उसे जांच लें।
  3. सरकारी संस्थान कभी फोन पर ओटीपी या पैसों की मांग नहीं करते।
  4. अगर संदेह हो तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या साइबर सेवा केंद्र में संपर्क करें।
  5. सोशल मीडिया पर शेयर की गई किसी भी फर्जी खबर से सावधान रहें।

उन्होंने कहा कि जनता की जागरूकता ही साइबर अपराध के खिलाफ सबसे मजबूत हथियार है।

साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में साइबर ठगों के खिलाफ अभियान तेज किया गया है। पुलिस ने हाल में कई गिरोहों का भंडाफोड़ किया है जो ऑनलाइन ठगी, फेक कॉल, और डिजिटल अरेस्ट स्कैम में शामिल थे। इन आरोपियों से करोड़ों रुपये की नकदी, लैपटॉप और मोबाइल बरामद किए गए हैं।

सरकार का कहना है कि ऐसे मामलों में न केवल अपराधियों पर केस दर्ज किया जाएगा बल्कि उनकी संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी। इसके साथ-साथ पुलिस अब अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ भी समन्वय बढ़ा रही है ताकि सीमा पार के साइबर अपराधियों पर भी कार्रवाई की जा सके।

तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण

योगी सरकार ने साइबर सुरक्षा को लेकर राज्य की पुलिस और तकनीकी टीमों को उन्नत प्रशिक्षण देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पुलिस अकादमियों और आईटी विभागों में स्पेशल मॉड्यूल तैयार किए जा रहे हैं ताकि साइबर ठगी के हर नए तरीके को समय रहते समझा जा सके।

इसके अलावा, राज्य सरकार ने साइबर सुरक्षा से जुड़े स्टार्टअप्स को भी प्रोत्साहित करने की योजना बनाई है। सीएम योगी का मानना है कि “टेक्नोलॉजी का जवाब टेक्नोलॉजी से ही दिया जा सकता है”, इसलिए नई तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के इस्तेमाल से जांच की गति बढ़ाई जाएगी।

समाज में डिजिटल साक्षरता बढ़ाना जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हर घर में मोबाइल और इंटरनेट पहुंच चुका है, लेकिन इसके साथ-साथ डिजिटल साक्षरता भी जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूलों में बच्चों को साइबर सुरक्षा की प्रारंभिक शिक्षा दी जानी चाहिए, ताकि वे बचपन से ही ऑनलाइन धोखाधड़ी के प्रति सतर्क रहें।

महिलाओं, बुजुर्गों और ग्रामीण नागरिकों को अक्सर ये ठग निशाना बनाते हैं क्योंकि वे टेक्नोलॉजी से कम परिचित होते हैं। इसीलिए सरकार गांवों में “साइबर जागरूकता शिविर” शुरू करने की योजना बना रही है।

जनता की सुरक्षा — सर्वोच्च प्राथमिकता

सीएम योगी ने कहा कि डिजिटल दुनिया में अपराध के नए-नए रूप सामने आ रहे हैं, लेकिन सरकार हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि “चाहे वास्तविक अपराध हो या वर्चुअल, जनता की सुरक्षा मेरी पहली प्राथमिकता है। कोई भी व्यक्ति ठगों के झांसे में न आए और हर संदेहास्पद कॉल या संदेश की रिपोर्ट करें।”

सोशल मीडिया के माध्यम से चेतावनी

योगी आदित्यनाथ ने अपने आधिकारिक X (Twitter) हैंडल और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए भी जनता को आगाह किया है। उन्होंने लिखा कि “भारत में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया मौजूद नहीं है। अगर कोई आपको इस नाम पर धमकाए तो यह शुद्ध रूप से साइबर अपराध है।” उनके इस संदेश को लाखों लोगों ने शेयर और रीट्वीट किया है।

जनता को जागरूक बनाना

योगी आदित्यनाथ की यह चेतावनी उस समय आई है जब डिजिटल अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और आम नागरिक उनके शिकार बन रहे हैं। उनकी अपील का उद्देश्य स्पष्ट है — जनता को भयभीत नहीं, बल्कि जागरूक बनाना।
योगी सरकार के अनुसार, साइबर अपराधों से निपटने का एकमात्र तरीका है “सजग नागरिक, मजबूत कानून और तकनीकी तत्परता।”https://thedbnews.in/us-fed-rates-tech-crash-sensex-nifty-confused-investment-tips/

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