जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर, हथियार और ड्रग्स गिराने की आशंका

जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LOC) के पास एक बार फिर पाकिस्तान की ओर से ड्रोन घुसपैठ की गंभीर कोशिश सामने आई है। बुधवार शाम राजौरी, नौशेरा, पुंछ और सांबा सेक्टर में एक के बाद एक कई संदिग्ध ड्रोन देखे गए, जिन पर भारतीय सेना ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मशीनगनों से फायरिंग की। सेना के सूत्रों के अनुसार, कम से कम एक पाकिस्तानी ड्रोन को निशाना बनाया गया, जबकि अन्य ड्रोन अंधेरे का फायदा उठाकर वापस लौट गए या क्षेत्र से बाहर चले गए।

यह घटना ऐसे समय हुई है जब सीमा पार से हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इन ड्रोन के जरिए आतंकियों के लिए हथियार, गोला-बारूद या ड्रग्स गिराने की योजना थी।

रात के आसमान में ट्रेसर गोलियों की चमक

घटना का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें रात के अंधेरे में ट्रेसर गोलियों की चमक आसमान को चीरती हुई दिखाई दे रही है। यह दृश्य पिछले साल हुए “ऑपरेशन सिंदूर” की याद दिलाता है, जब सेना ने बड़े पैमाने पर सीमा पार गतिविधियों को नाकाम किया था। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे मशीनगनों से लगातार फायरिंग की जा रही है, जबकि ड्रोन को आंखों से देख पाना मुश्किल हो रहा था।

सेना के अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की फायरिंग ड्रोन को डराकर भगाने या उसे मार गिराने के लिए की जाती है, ताकि वह भारतीय क्षेत्र में किसी तरह का संदिग्ध सामान न गिरा सके।

अलग-अलग इलाकों में देखे गए ड्रोन

सूत्रों के अनुसार, पहला ड्रोन शाम करीब 6:25 बजे पुंछ जिले के मनकोट सेक्टर में तैन और टोपा गांव के बीच उड़ता हुआ देखा गया। इसके कुछ ही मिनटों बाद, 6:35 बजे राजौरी जिले के कलाकोट क्षेत्र के धर्मसाल गांव से एक ड्रोन भारतीय सीमा में प्रवेश करता हुआ देखा गया, जो आगे भराख की ओर बढ़ गया।

इसके अलावा, शाम करीब 7:15 बजे सांबा जिले के रामगढ़ सेक्टर के चक बबराल गांव के ऊपर भी एक ड्रोन जैसे उड़ने वाले ऑब्जेक्ट को कुछ मिनटों तक मंडराते देखा गया। सभी मामलों में ड्रोन में ब्लिंक करती हुई लाइट देखी गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि ये सामान्य पक्षी या विमान नहीं थे।

एक दिन पहले हथियारों की खेप गिराने की घटना

इस घटना से एक दिन पहले ही सांबा सेक्टर में पाकिस्तान की ओर से आए एक ड्रोन ने हथियारों की एक खेप गिराई थी, जिसे बाद में सुरक्षा बलों ने बरामद किया। बरामद सामान में असॉल्ट राइफल, मैगजीन और गोला-बारूद शामिल था।

इसी वजह से बुधवार को देखे गए ड्रोन को लेकर सुरक्षा एजेंसियां और ज्यादा सतर्क हो गईं। सेना को शक है कि यह एक संगठित कोशिश थी, जिसके तहत एक साथ कई सेक्टरों में ड्रोन भेजे गए ताकि सुरक्षा बल भ्रमित हो जाएं और कुछ ड्रोन अपने मिशन में सफल हो सकें।

सेना का तलाशी अभियान जारी

ड्रोन देखे जाने और फायरिंग के बाद भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संयुक्त रूप से बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। जंगलों, खेतों और रिहायशी इलाकों के आसपास विशेष सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं किसी ड्रोन ने हथियार, विस्फोटक या ड्रग्स तो नहीं गिराए हैं।

डॉग स्क्वायड, मेटल डिटेक्टर और ड्रोन-रोधी तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। स्थानीय लोगों से भी सतर्क रहने और किसी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि की सूचना तुरंत देने की अपील की गई है।

ड्रोन बना आतंकियों का नया हथियार

पिछले कुछ वर्षों में ड्रोन आतंकियों और तस्करों के लिए सबसे पसंदीदा साधन बन गए हैं। ये छोटे, तेज और रडार से बच निकलने में सक्षम होते हैं, जिससे इन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है। पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन इन्हीं ड्रोन के जरिए सीमापार से हथियार और नशीले पदार्थ भारत में पहुंचाने की कोशिश करते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन तकनीक सस्ती होने और आसानी से उपलब्ध होने के कारण आने वाले समय में इस तरह की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। इसी वजह से भारतीय सेना अब एंटी-ड्रोन सिस्टम, जैमर और आधुनिक निगरानी उपकरणों पर तेजी से काम कर रही है।

स्थानीय लोगों में चिंता, लेकिन सेना पर भरोसा

ड्रोन घुसपैठ की खबर फैलते ही जम्मू-कश्मीर सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों में डर का माहौल देखा गया। कई लोगों ने बताया कि रात में गोलियों की आवाज सुनकर वे घरों से बाहर नहीं निकले। हालांकि, लोगों का यह भी कहना है कि उन्हें भारतीय सेना पर पूरा भरोसा है और वे जानते हैं कि जवान हर हाल में उनकी सुरक्षा करेंगे।

एक स्थानीय निवासी ने कहा,“हम रोज़ ऐसे खतरे के साये में जीते हैं, लेकिन सेना की वजह से हमें भरोसा रहता है कि कोई भी बड़ी घटना नहीं होगी।”

सुरक्षा एजेंसियों की सख्त चेतावनी

सेना और गृह मंत्रालय से जुड़े सूत्रों ने संकेत दिया है कि अगर ड्रोन के जरिए घुसपैठ और हथियार गिराने की कोशिशें जारी रहीं, तो सीमा पार सख्त जवाबी कार्रवाई की जा सकती है। सुरक्षा एजेंसियां पहले ही हाई अलर्ट पर हैं और आने वाले दिनों में एलओसी पर निगरानी और कड़ी की जाएगी।

LOC पर हुई यह ताजा घटना एक बार फिर साबित करती है कि पाकिस्तान की ओर से भारत में अशांति फैलाने की कोशिशें लगातार जारी हैं। हालांकि, भारतीय सेना की मुस्तैदी और त्वरित कार्रवाई ने एक संभावित बड़े खतरे को टाल दिया। आने वाले समय में ड्रोन के खतरे से निपटने के लिए तकनीकी और रणनीतिक स्तर पर और मजबूत कदम उठाने की जरूरत होगी, ताकि देश की सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित रह सकें।
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