डूरंड लाइन पर तालिबान का धमाका: 19 पाक पोस्ट कब्जे, 55 सैनिक ढेर! अफ-पाक तनाव चरम पर

डूरंड लाइन पर तालिबान ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है। हालिया एयरस्ट्राइक के बदले अफगान फोर्स ने कई चौकियों पर कब्जा कर लिया। यह घटना अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव को नई ऊंचाई दे रही है।

डूरंड लाइन क्या है? पूरा इतिहास
डूरंड लाइन अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच 2,640 किलोमीटर लंबी विवादित सीमा है। इसे 1893 में ब्रिटिश भारत के विदेश सचिव सर मोर्टिमर डूरंड और अफगान अमीर अब्दुर रहमान खान के बीच समझौते से खींचा गया था। यह रेखा पश्तून जनजातियों को दो हिस्सों में बांटती है, जिससे अफगानिस्तान इसे कभी मान्यता नहीं देता। पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, लेकिन अफगानिस्तान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला समझता है।
ऐतिहासिक रूप से यह रेखा ब्रिटिश साम्राज्य की रणनीति का हिस्सा थी। 1947 के भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान को यह सीमा मिली, लेकिन अफगानिस्तान ने विरोध जताया। 1950-60 के दशक में दोनों देशों के बीच युद्ध तक हो गया। तालिबान सत्ता में आने के बाद भी इस विवाद को बार-बार उछाला। पश्तून राष्ट्रवाद इसकी जड़ है, जहां स्थानीय जनजातियां दोनों तरफ बसी हैं। पाकिस्तान ने 2017 से इस सीमा पर बाड़ लगानी शुरू की, जिससे तनाव बढ़ा।
डूरंड लाइन के प्रमुख क्षेत्रों में तोरखम चेकपोस्ट, चमन बॉर्डर और खोस्त प्रांत शामिल हैं। यहां अवैध घुसपैठ, तस्करी और आतंकी गतिविधियां आम हैं। हाल के वर्षों में आईएसआईएस-के और टीटीपी जैसे गुटों ने इसे हथियार बनाया। तालिबान इसे पाकिस्तान के खिलाफ पश्तून एकता का प्रतीक मानता है।
तालिबान का ताजा हमला: क्या हुआ आखिर?
26 फरवरी 2026 को तालिबान ने डूरंड लाइन पर बड़ा हमला बोला। पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक के जवाब में अफगान बॉर्डर फोर्स ने पक्तिया, पक्तिका, खोस्त, नंगरहार, कुनार और नूरिस्तान प्रांतों में कार्रवाई की। तालिबान के दावे के मुताबिक 19 पाकिस्तानी चौकियां और दो बेस कब्जे में ले लिए गए। चार घंटे चली गोलीबारी में 55 पाक सैनिक मारे गए, एक टैंक नष्ट हुआ।
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय और बॉर्डर फोर्स प्रवक्ता ओबैदुल्लाह फारूकी ने इसे पुष्टि की। उन्होंने कहा, “हमने तोरखम गेट तक कार्रवाई की और हथियारों का जखीरा जब्त किया।” तालिबान ने बख्तरबंद वाहनों, मशीनगनों और भारी तोपों का इस्तेमाल किया। पाकिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं, लेकिन स्थानीय मीडिया ने भारी नुकसान की खबरें चलाईं।
यह हमला पाकिस्तान की 24 फरवरी की एयरस्ट्राइक का सीधा परिणाम है, जिसमें अफगानिस्तान ने 20 सैनिकों के मरने का दावा किया था। तालिबान ने इसे “संप्रभुता का उल्लंघन” बताया। अब सीमा पर भारी सैन्य तैनाती है।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव: पृष्ठभूमि
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते हमेशा तल्ख रहे। 2021 में तालिबान की सत्ता आने के बाद पाकिस्तान ने उम्मीद की थी कि टीटीपी पर लगाम लगेगी। लेकिन टीटीपी ने अफगानिस्तान से पाकिस्तान में 800 से ज्यादा हमले किए। पाकिस्तान ने मार्च 2022 से अफगानिस्तान से 1.7 मिलियन अवैध प्रवासियों को भगाया।
2023 में तोरखम पर गोलीबारी हुई, जिसमें 6 पाक रेंजर मारे गए। 2024 में चमन बॉर्डर बंद रहा। अक्टूबर 2025 में झड़पों में पाकिस्तान ने भारी नुकसान उठाया। अब 2026 में यह खुला संघर्ष बन गया। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इसे “ओपन वॉर” कहा।
आर्थिक रूप से पाकिस्तान पर दबाव है। तोरखम से सालाना 20 बिलियन डॉलर का व्यापार होता है। सीमा बंद होने से महंगाई बढ़ेगी। अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था भी चरमरा रही।
पश्तून जनजातियों की भूमिका
डूरंड लाइन पश्तूनों को बांटती है। अफगानिस्तान में 14 मिलियन और पाकिस्तान में 30 मिलियन पश्तून हैं। वे “पश्तून तालिबान” और टीटीपी से जुड़े हैं। तालिबान इसे पश्तून एकता का मौका मानता है। स्थानीय जनजातियां पाकिस्तान की बाड़बंदी से नाराज हैं, जो उनकी आजादी छीनती है।
पाकिस्तान में खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में विरोध हो रहा। टीटीपी ने इसे समर्थन दिया। यह आंतरिक अस्थिरता बढ़ा सकता।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और प्रभाव
अमेरिका और चीन चुप हैं, लेकिन भारत को फायदा हो सकता है। पाकिस्तान कमजोर होगा। रूस और ईरान अफगानिस्तान समर्थक हैं। संयुक्त राष्ट्र ने शांति की अपील की।
भारत के लिए यह पाकिस्तान को व्यस्त रखेगा। अफगानिस्तान में भारतीय निवेश सुरक्षित रह सकता। लेकिन क्षेत्रीय युद्ध का खतरा है।
भविष्य में क्या? संभावित परिदृश्य
युद्ध बढ़ सकता है। पाकिस्तान जवाबी कार्रवाई करेगा। तालिबान गुरिल्ला युद्ध में माहिर। शांति वार्ता मुश्किल। चीन की मध्यस्थता संभव। व्यापार बंद से दोनों अर्थव्यवस्थाएं डगमगाएंगी।
पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति प्रभावित होगी। इमरान खान समर्थक इसका फायदा उठाएंगे। तालिबान मजबूत होगा।
डूरंड लाइन विवाद के समाधान के रास्ते
सीधा समाधान नामुमकिन। संयुक्त गश्त, व्यापार बढ़ाना मददगार। लेकिन पश्तून राष्ट्रवाद बाधा। भारत को सतर्क रहना चाहिए।
युद्ध की आग भड़क रही
डूरंड लाइन पर तालिबान का कब्जा पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका। यह विवाद सुलझे बिना शांति नहीं। दुनिया देख रही है।
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