इटावा भोराजपुर: दबंगों ने तोड़ी आंबेडकर मूर्ति, दलित कथा में हिंसा

इटावा जिले के भोराजपुर गांव में दलित समाज द्वारा आयोजित भागवत कथा कार्यक्रम के दौरान दबंगों ने अराजकता मचा दी। रामू यादव, भूरे यादव, संजीव यादव समेत अन्य आरोपियों ने डॉ. भीमराव आंबेडकर की मूर्ति तोड़ दी.

माइक-स्पीकर फोड़ दिए और साउंड ऑपरेटर राहुल को जमकर पीटा । यह घटना 6 जनवरी 2026 की रात 8 बजे थाना ऊसराहार के अंतर्गत हुई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है ।
घटना का पूरा विवरण
इटावा के भोराजपुर गांव में दलित समाज ने धार्मिक एकता का संदेश देने के लिए भागवत कथा का आयोजन किया था। मंच पर देवी-देवताओं की तस्वीरों के साथ बाबा साहेब आंबेडकर की मूर्ति और पोस्टर लगाए गए थे, जो सामाजिक समानता का प्रतीक थे । कथा सुचारू रूप से चल रही थी जब दबंगों का समूह अचानक पहुंचा। उनका विवाद मंच पर बैठने और साउंड सिस्टम चलाने को लेकर भड़का ।
आरोपियों ने पहले मूर्ति को मंच से उतारकर फेंक दिया, फिर माइक-स्पीकर तोड़ डाले। विरोध करने पर साउंड ऑपरेटर राहुल को लाठियों से पीटा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया । ग्रामीणों ने बताया कि दबंगों ने खुलेआम धमकियां दीं और कहा कि “ऐसे कार्यक्रम यहां नहीं चलेंगे” । पूरा हंगामा मात्र कुछ मिनटों में हो गया, लेकिन इसका असर पूरे गांव पर पड़ा। वीडियो में आरोपी साफ नजर आ रहे हैं, जो पुलिस के लिए सबूत बन चुका है ।
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आरोपी कौन, क्या है उनका बैकग्राउंड?
प्रमुख आरोपी रामू यादव, भूरे यादव और संजीव यादव हैं, जो स्थानीय दबंग माने जाते हैं । ग्रामीणों के अनुसार, ये लोग पहले भी जातिगत भेदभाव के मामलों में नामित हो चुके हैं। इटावा क्षेत्र में यादव समुदाय का प्रभाव है, लेकिन यह घटना जातीय तनाव को बढ़ावा देने वाली लग रही है । पुलिस ने इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं और SC-ST एक्ट लगाया है । एक आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है, बाकियों की तलाश जारी है ।
पीड़ितों की हालत और ग्रामीणों का रोष
राहुल, साउंड ऑपरेटर, को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों ने बताया कि उसके सिर और हाथों पर गंभीर चोटें हैं, लेकिन जान को खतरा नहीं । दलित समाज के लोग सदमे में हैं। एक ग्रामीण ने कहा, “यह हमारी धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है। बाबा साहेब की मूर्ति तोड़ना असहनीय है” । गांव में तनाव व्याप्त है, रातों में पहरा दिया जा रहा है। महिलाएं और बच्चे डर के मारे घरों में कैद हैं ।
पुलिस की तत्परता और कार्रवाई
क्षेत्राधिकारी राम दबन मौर्य ने बताया कि शिकायत मिलते ही FIR दर्ज की गई । भारी पुलिस बल तैनात है, गांव में शांति है। सीसीटीवी और वीडियो फुटेज से आरोपियों की पहचान आसान हो गई । डीआईजी स्तर पर जांच के आदेश दिए गए हैं ताकि न्याय मिले। इससे पहले इटावा में यादव कथावाचकों से जुड़े विवादों में भी सपा-बीजेपी आमने-सामने आई थी ।
इटावा का जातीय इतिहास: बार-बार हो रहे विवाद
इटावा लंबे समय से जातीय संघर्षों का केंद्र रहा है। जून 2025 में दंदरपुर गांव में दो यादव कथावाचकों पर ब्राह्मणों ने हमला किया, सर मुंडवाए — जिसके बाद ‘अहीर रेजिमेंट’ ने विरोध प्रदर्शन किया । अखिलेश यादव ने पीड़ितों को सम्मानित किया, सीएम योगी ने जातिवाद का आरोप लगाया । इसी तरह, भरथना तहसील में अराजक तत्वों ने आंबेडकर मूर्ति तोड़ी थी । धरवार में भी मूर्ति का कंधा तोड़ा गया — एक साल में दूसरी घटना । ये घटनाएं सामाजिक एकता को चुनौती दे रही हैं ।
आंबेडकर मूर्ति पर हमलों का बढ़ता सिलसिला
देशभर में डॉ. आंबेडकर की मूर्तियों पर हमले बढ़ रहे हैं। मध्य प्रदेश के उज्जैन में पटेल vs आंबेडकर मूर्ति विवाद से हिंसा भड़की । ग्वालियर, प्रयागराज और इछावर में भी ऐसी घटनाएं हुईं । विशेषज्ञ कहते हैं कि यह जातिगत श्रेष्ठता की मानसिकता से प्रेरित है। उत्तर प्रदेश में SC-ST एक्ट के बावजूद कार्रवाई धीमी रहती है ।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और सियासी रंग
घटना ने राजनीतिक दलों को बांट दिया। सपा नेता अखिलेश यादव ने ट्वीट कर योगी सरकार पर निशाना साधा: “दबंगों का राज चल रहा है” । बीजेपी ने इसे “साजिश” बताया। बहुजन समाज पार्टी ने दलित संगठनों के साथ प्रदर्शन की चेतावनी दी। स्थानीय विधायक ने कहा, “कानून अपना काम करेगा” । सोशल मीडिया पर #JusticeForAmbedkar ट्रेंड कर रहा है ।
सामाजिक प्रभाव और भविष्य की आशंकाएं
यह घटना दलित समाज में भय पैदा कर रही है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही — लोग खेतों में जाने से डर रहे । सामाजिक कार्यकर्ता कहते हैं कि शिक्षा और जागरूकता जरूरी है। NGOs ने गांव में काउंसलिंग शुरू की। यदि कार्रवाई न हुई तो बड़े प्रदर्शन हो सकते हैं ।
डॉ. आंबेडकर का योगदान: याद रखना जरूरी
डॉ. भीमराव आंबेडकर भारतीय संविधान के शिल्पकार थे। दलित उत्थान के लिए जीवन समर्पित किया। उनकी मूर्ति तोड़ना संविधान पर हमला है । उनके विचार आज भी प्रासंगिक: “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो”। समाज को एकजुट होने की जरूरत ।
न्याय की उम्मीद
पुलिस की जांच तेज है, लेकिन न्याय मिलना चाहिए। इटावा जैसे क्षेत्रों में जातिवाद उन्मूलन अभियान चलाने की जरूरत। दलित समाज आगे बढ़ रहा है — ऐसे हमले इसे नहीं रोक सकते। सरकार से अपेक्षा: सख्त कार्रवाई और सुरक्षा ।
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