जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में हाल ही में हुई झड़प और उसके बाद पुलिस कार्रवाई ने कैंपस का माहौल तनावपूर्ण बना दिया है। झड़प के बाद कई वामपंथी संगठनों के पदाधिकारियों पर एफआईआर दर्ज की गई और उन्हें हिरासत में लिया गया, हालांकि अब अधिकांश को जमानत पर रिहा कर दिया गया है ।

झड़प की पृष्ठभूमि

टकराव की शुरुआत दसहरा के दिन JNU के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में एक जनरल बॉडी मीटिंग (GBM) के दौरान हुई, जिसमें वामपंथी गुटों और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के बीच हिंसा हुई। वाम छात्र संगठनों ने ABVP पर “हुड़दंग” और महिला छात्रा पर हमला करने का आरोप लगाया, जबकि ABVP ने पलटवार करते हुए कहा कि वामपंथी छात्रों ने “क्षेत्रीय घृणा” फैलाकर छात्रों पर हमला किया ।

पुलिस से टकराव और गिरफ्तारी

शुक्रवार शाम को लगभग 70–80 छात्र, जिनमें JNUSU (जेएनयू छात्रसंघ) के अध्यक्ष नितीश कुमार, उपाध्यक्ष मनीषा और महासचिव मुन्तेहा फातिमा शामिल थे, वसंथ कुंज थाने की ओर मार्च कर रहे थे। वे पुलिस से मांग कर रहे थे कि ABVP सदस्यों पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। पुलिस ने बताया कि छात्रों को अनुमति नहीं थी और जब उन्हें वेस्ट गेट पर रोका गया तो उन्होंने बैरिकेड तोड़ दिए, जिससे झड़प हो गई। इस दौरान 6 पुलिसकर्मी घायल हुए और 28 छात्रों को हिरासत में लिया गया ।

छात्रों के आरोप और पुलिस का बयान

छात्रों का आरोप है कि उन्हें शांतिपूर्ण विरोध के दौरान “बेहद मारा गया” और “पुलिस ने जानबूझकर एफआईआर दर्ज नहीं की।” वहीं पुलिस का कहना है कि उन्होंने “अराजक स्थिति को रोकने” के लिए अस्थायी रूप से छात्रों को हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार, छात्रों ने “अनुचित तरीके से थाने की घेऱाबंदी” की कोशिश की ।

जमानत और वर्तमान स्थिति

शनिवार देर रात तक अधिकांश छात्रों को जमानत पर रिहा कर दिया गया। हालांकि, ABVP और वाम दोनों ही छात्र संगठनों ने एक-दूसरे पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। कैंपस में तनाव अभी भी जारी है और JNUSU चुनाव नजदीक होने के कारण माहौल और गर्म हो गया है ।

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