गोरखपुर में दीपावली से पहले फूड विभाग का छापा, 850 किलो नकली मावा और मिल्क केक बरामद

दीपावली से पहले उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में फूड विभाग ने मिठाई और केक बनाने वाली कृष्णा स्वीट्स फैक्ट्री पर छापा मारा। भगवानपुर इलाके में स्थित इस फैक्ट्री से 850 किलो नकली मावा और लगभग 10 क्विंटल मिल्क केक बरामद किए गए हैं। साथ ही मिठाई और केक बनाने में इस्तेमाल होने वाली मिलावटी सामग्री जैसे मिल्क पाउडर, रिफाइन, और ग्लूकोज भी जब्त की गई। जांच के लिए सभी नमूने प्रयोगशाला भेजे गए हैं और खराब पाई गई मावा को नष्ट किया जा रहा है।

फैक्ट्री का संचालन भगवान सिंह यादव कर रहे हैं। खाद्य विभाग के सहायक आयुक्त डॉ. सुधीर कुमार सिंह के नेतृत्व में यह कार्रवाई हुई और त्योहार के समय मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश दिया गया है। आगे की जांच रिपोर्ट आने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
खाद्य विभाग ने आरोपी संचालक के खिलाफ की कार्रवाई
गोरखपुर की मिठाई फैक्ट्री में 850 किलो नकली मावा बरामद होने के बाद खाद्य विभाग ने फैक्ट्री संचालक भगवान सिंह यादव के खिलाफ जांच शुरू की है। जांच के लिए बरामद सामग्री के नमूने प्रयोगशाला भेजे गए हैं। विभाग की ओर से बताया गया है कि रिपोर्ट आने के बाद मिलावटखोरों के खिलाफ कड़ी विधिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल खराब मावा को नष्ट कराया जा रहा है, और रिपोर्ट आने के बाद ही सटीक कार्रवाई होगी। संचालक ने कहा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर स्थिति साफ की जाएगी। सहायक आयुक्त खाद्य डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि त्योहार के दौरान मिठाई में मिलावट करने वालों के खिलाफ लगातार अभियान जारी है और यदि कोई पकड़ा गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी लेकिन अभी तक रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.
नकली मावा के स्वास्थ्य जोखिम कई प्रकार के हो सकते हैं। नकली मावा में स्टार्च, सिंथेटिक दूध, डिटर्जेंट, यूरिया, और अन्य हानिकारक रसायनों की मिलावट होती है, जिससे ये निम्नलिखित स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं:
- पेट दर्द, दस्त और उल्टी जैसे पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। मिलावटी मावा के सेवन से फूड पॉइजनिंग का खतरा रहता है क्योंकि इसमें रसायनिक मिलावट होती है जो पेट की मांसपेशियों को प्रभावित करती है।
- लीवर और किडनी को नुकसान पहुँच सकता है। हानिकारक रसायन लिवर और किडनी पर दबाव डाल कर इन्हें क्षतिग्रस्त कर सकते हैं।
- इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है, जिससे शरीर संक्रमण और बीमारियों से लड़ने में कमजोर हो जाता है।
- श्वसन संबंधित समस्याएं जैसे अस्थमा और ब्रोंकाइटिस हो सकते हैं, और त्वचा पर चकत्ते, खुजली व सूजन जैसी एलर्जी हो सकती है।
- लंबे समय तक नकली मावा खाने से कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है, क्योंकि इसमें इस्तेमाल किए गए कुछ रसायन कार्सिनोजनिक हो सकते हैं।
इसलिए नकली मावा से बचाव जरूरी है ताकि गंभीर स्वास्थ्य जोखिम से बचा जा सके.

