अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि उनकी टैरिफ (आर्थिक दंड और व्यापारिक दबाव) नीति ने भारत और पाकिस्तान के बीच भीषण युद्ध छिड़ने से रोक दिया. उनका कहना है कि अगर उनके पास टैरिफ लगाने की ताकत नहीं होती, तो कम से कम चार बड़े युद्ध दुनिया में छिड़ सकते थे, जिनमें भारत-पाकिस्तान संघर्ष भी शामिल था. ट्रंप का दावा है कि दोनों देशों के बीच जब मई 2025 में तनाव बढ़ा, सात विमान गिराए गए, तब उनकी रणनीति और टैरिफ के खतरे से शांति बनी रही.

ट्रंप के दावे का विवरण

  • ट्रंप ने व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गैार किया कि उनकी टैरिफ नीति ने अमेरिकी आर्थिक हित तो सुरक्षित किए ही हैं, साथ ही “शांति रक्षक” के रूप में भी अमेरिका को स्थापित किया है.
  • उन्होंने कहा कि उनके दबाव और “बहुत असरदार बातचीत” के कारण ही भारत-पाकिस्तान युद्ध नहीं हुआ.

भारत की प्रतिक्रिया

  • भारतीय सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम पूरी तरह द्विपक्षीय बातचीत और सैन्य नेतृत्व (DGMOs) के बीच समझौते से हुआ, न कि किसी तीसरे देश के दबाव या मध्यस्थता से.
  • भारत के विदेश मंत्रालय ने बार-बार ट्रंप के ऐसे दावों को खारिज किया है, और कहा है कि दोनों देशों के मसले द्विपक्षीय हैं और इसमें किसी बाहरी भूमिका की जरूरत नहीं.

विवादित दावे और सियासी चर्चा

  • ट्रंप ने यह दावा इसके पहले भी बार-बार किया है और दोहराया है कि वे अपनी ‘टैरिफ शक्ति’ से ही कई वैश्विक युद्धों को रोकने में सक्षम रहे हैं.
  • ट्रंप के इस बयान को लेकर दिल्ली और इस्लामाबाद, दोनों जगह राजनयिक हलकों में असंतोष और हैरानी जताई गई है.

संक्षेप में, ट्रंप का दावा है कि उनकी टैरिफ नीति ने भारत-पाक के बीच छिड़ने वाले युद्ध को रोका, हालांकि भारत ने इसे महज अमेरिकी प्रचार बताते हुए खारिज कर दिया है.

भारत ने ट्रंप के दावे पर आधिकारिक जवाब दिया

भारत ने राष्ट्रपति ट्रंप के दावे पर आधिकारिक रूप से जवाब दिया है और उनका दावा स्पष्ट रूप से खारिज किया है. भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने प्रेस ब्रीफिंग में साफ कहा है कि भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर किसी तीसरे देश या अमेरिकी दबाव के कारण नहीं, बल्कि सैन्य कार्रवाई के बाद द्विपक्षीय चैनलों (DGMOs) के जरिये हुआ.

भारत का आधिकारिक स्टेटमेंट

  • MEA के प्रवक्ता ने मई 2025 की ब्रीफिंग में कहा, “सीजफायर का निर्णय दोनों देशों के सैन्य नेतृत्व के बीच हुआ, इसका समय, तारीख और शब्दावली भी DGMOs ने तय की।”
  • भारत ने पूरी तरह अमेरिकन मध्यस्थता, टैरिफ या व्यापार दबाव के संदर्भ को नकार दिया है.

अमेरिकी भूमिका पर भारत का अनुराग

  • भारत ने साफ किया कि उसके लिए शांति प्रक्रिया और संघर्षविराम पूरी तरह द्विपक्षीय मुद्दा है और किसी भी तीसरे पक्ष को इसमें भूमिका नहीं दी जाएगी.
  • भारत ने कहा कि भारतीय सैन्य कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने ही पहले संपर्क किया और फिर ऑपरेशन सिंदूर के बाद समझौता हुआ.

संक्षेप में, भारत ने ट्रंप के टैरिफ वाले बयान को सिरे से खारिज किया है और कहा है कि भारत-पाकिस्तान सीजफायर पूरी तरह भारतीय पहल और द्विपक्षीय संवाद से हुआ, न कि अमेरिकी दबाव या मध्यस्थता से.

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