सोने की कीमत में 10 रुपये की बढ़ोतरी, चांदी के दाम गिरे | जानें आज 10 जनवरी 2026 के सोना-चांदी रेट्स और निवेश सलाह

दिल्ली समेत देशभर के सर्राफा बाजारों में शनिवार को सोने और चांदी के भावों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। जहां एक ओर पीली धातु यानी सोना 10 रुपये महंगा हुआ, वहीं सफेद धातु यानी चांदी ने 100 रुपये की गिरावट दर्ज की। सोना अब 1,39,320 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है, जबकि चांदी 2,48,900 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही है।

पिछले कुछ दिनों से कीमती धातुओं की कीमतों में लगातार हलचल देखने को मिल रही है क्योंकि वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल में उतार-चढ़ाव और ब्याज दरों से जुड़ी अनिश्चितताएं निवेशकों को सतर्क बना रही हैं।
घरेलू बाजार की स्थिति: शादी सीजन और ग्राहक मांग का प्रभाव
देश के प्रमुख ज्वेलरी बाजारों जैसे दिल्ली, मुंबई, जयपुर, सूरत और लखनऊ में शनिवार को सोने की खरीदी में हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली। स्थानीय स्तर पर ज्वेलर्स का कहना है कि इस समय शादी-ब्याह का सीजन शुरू होने वाला है, जिसके चलते ग्राहकी में सुधार देखा गया है।
सोने की कीमतों में बढ़ोतरी आमतौर पर तब होती है जब खुदरा मांग बढ़ती है। नवंबर और जनवरी का महीना भारतीय ज्वेलरी बाजार के लिए अहम होता है क्योंकि इस दौरान शादी के साथ-साथ मकर संक्रांति और वसंत पंचमी जैसे त्योहार आते हैं। यही वजह है कि खुदरा दुकानदारों और निवेशकों ने सोने की ओर रुख किया है।
वहीं, चांदी की कीमतों में गिरावट का प्रमुख कारण औद्योगिक मांग में कमी बताया जा रहा है। कई उद्योग जो इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों और सौर उपकरणों में चांदी का इस्तेमाल करते हैं, फिलहाल उत्पादन में मंदी का सामना कर रहे हैं, जिससे घरेलू स्तर पर मांग घटी है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव जारी
विदेशी बाजारों में भी सोना और चांदी के दामों में मिश्रित रुझान देखने को मिला है। न्यूयॉर्क के कॉमेक्स मार्केट में सोना शुक्रवार को हल्की तेजी के साथ बंद हुआ, जबकि चांदी में गिरावट दर्ज की गई।
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में मजबूती के चलते निवेशकों ने कीमती धातुओं से निवेश निकाल कर डॉलर और ट्रेजरी बॉन्ड में लगाना शुरू किया है। आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोना और चांदी जैसी कमोडिटीज के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिर जाते हैं क्योंकि ये धातुएं डॉलर में ही ट्रेड होती हैं।
फिलहाल अमेरिका में महंगाई के आंकड़े और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति पर निवेशकों की नजर है। अगर ब्याज दरों में कटौती का संकेत मिलता है, तो सोना एक बार फिर तेजी पकड़ सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि फेडरल रिजर्व मार्च तिमाही तक ब्याज दरों में नरमी दिखा सकता है, जिससे सोने की कीमतों को नया सहारा मिलेगा।
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निवेशकों की रणनीति में बदलाव
बीते कुछ महीनों में निवेशकों की प्राथमिकता में बदलाव देखा गया है। पहले जहां ब्याज दरों के बढ़ने के डर से सोने में निवेश घटा था, वहीं अब आर्थिक अनिश्चितता और राजनीतिक तनावों के कारण लोग फिर से गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) और फिजिकल गोल्ड में निवेश करने लगे हैं।
भारत में भी निवेशकों के लिए सोना हमेशा से एक सुरक्षित संपत्ति (Safe Haven Asset) माना गया है। ब्याज दरें ऊंची रहने के बावजूद जब महंगाई दर भी बढ़ी हुई होती है, तब सोना लोगों की संपत्ति बचाने का सबसे बेहतर विकल्प बन जाता है।
चांदी के मामले में उल्टा रुझान देखने को मिला है। उद्योगिक उपयोग घटने के कारण और कीमतों के बार-बार गिरने से निवेशक अभी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। हालांकि, कुछ मेटल एनालिस्ट्स का कहना है कि जैसे-जैसे ग्रीन एनर्जी सेक्टर में उत्पादन बढ़ेगा, चांदी की मांग फिर से बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों की राय
दिल्ली बुलियन ट्रेड एसोसिएशन के एक सदस्य के अनुसार, “वर्तमान में सोने की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी एक सामान्य रुझान है। यह बढ़त ज्यादा स्थायी नहीं कह सकते क्योंकि वैश्विक बाजार हर दिन नई दिशा ले रहा है। लेकिन दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह मूल्य आकर्षक हो सकता है।”
वहीं एक अन्य विश्लेषक का कहना है कि घरेलू बाजारों में चांदी के दाम फिलहाल दबाव में हैं। “औद्योगिक मांग में आई गिरावट जब तक सुधरती नहीं, तब तक चांदी में स्थायी बढ़त की उम्मीद करना मुश्किल है। हालांकि, आने वाले महीनों में सरकार की सोलर प्रोजेक्ट्स संबंधी घोषणाएं इस क्षेत्र में सुधार ला सकती हैं।”
वैश्विक घटनाओं का असर
दुनिया भर में सोने की कीमतों पर कई भू-राजनीतिक कारकों का असर होता है। हाल ही में मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने और एशियाई बाजारों में आर्थिक मंदी की आशंकाओं ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर मोड़ा है। सोना ऐसे हालातों में हमेशा एक भरोसेमंद विकल्प माना जाता है, जबकि दूसरी ओर चांदी का औद्योगिक उपयोग उसके भावों को प्रभावित करता है।
यूरोप में कमजोर आर्थिक डेटा और चीन की अर्थव्यवस्था के धीमे पड़ने से भी कीमती धातुओं के बाजार में हलचल बढ़ी है।
भविष्य की संभावनाएं
बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि मार्च 2026 तक सोना 1,40,000 से 1,42,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच पहुंच सकता है अगर डॉलर कमजोर होता है और कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं। वहीं चांदी में रिकवरी की उम्मीद है अगर औद्योगिक मांग और निर्यात में सुधार देखा जाता है।
सोने-चांदी के कारोबारियों का मानना है कि अगले दो महीनों में घरेलू मांग में सुधार जारी रहेगा क्योंकि शादी का सीजन पूरे फरवरी तक चलेगा। इसलिए नजीदीकी अवधि में सोने की कीमतों में हल्की तेजी संभव है।
निवेशकों के लिए सुझाव
- जो निवेशक दीर्घकालिक दृष्टि से निवेश करना चाहते हैं, वे सोने में धीरे-धीरे निवेश बढ़ा सकते हैं।
- अल्पकालिक निवेशक मौजूदा स्तरों पर बुकिंग कर सकते हैं क्योंकि आने वाले हफ्तों में थोड़ी गिरावट संभव है।
- चांदी में खरीदारी फिलहाल टालनी चाहिए और औद्योगिक मांग के सुधार के संकेत मिलने का इंतजार करना उचित रहेगा।
- पोर्टफोलियो का 10-15% हिस्सा सोने में रखना लंबे समय के लिए संतुलित रणनीति मानी जाती है।
निचोड़
कुल मिलाकर, जनवरी 2026 के पहले पखवाड़े में सोने और चांदी के भावों में हलचल ने निवेशकों को सतर्क बना दिया है। सोने की मामूली बढ़त और चांदी की गिरावट से साफ है कि बाजार अभी स्थिर नहीं हुआ है। हालांकि, लंबे समय में सोना अब भी निवेश के लिहाज से मजबूत विकल्प बना हुआ है।
अगर वैश्विक तनाव कम होता है और ब्याज दरों में कटौती का संकेत मिलता है, तो अगले कुछ महीनों में सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं चांदी की मांग यदि औद्योगिक स्तर पर सुधरती है, तो यह भी निवेशकों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है।
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