नई दिल्ली: परमानेंट कर्मचारियों को दी जाने वाली ग्रेच्युटी को लेकर नए लेबर कोड में बड़ा बदलाव हुआ है। जहां पहले ग्रेच्युटी पाने के लिए 5 साल की लगातार सेवा जरूरी थी, अब नए नियमों के तहत यह अवधि फिक्स्ड-टर्म (कॉन्‍ट्रैक्‍ट) कर्मचारियों के लिए घटाकर 1 साल कर दी गई है, परमानेंट कर्मचारियों के लिए अभी भी 5 साल सेवा की जरूरत बनी हुई है। साथ ही कंपनियां ग्रेच्युटी का भुगतान कर्मचारियों को 30 दिनों के भीतर करें, नहीं तो 10% सालाना ब्याज देना होगा।

नए लेबर कोड के अनुसार ग्रेच्युटी का नियम

सरकार ने ग्रेच्युटी नियम में बदलाव कर कॉन्ट्रैक्ट व फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों के लिए 5 साल की बजाय केवल 1 साल काम करने के बाद ग्रेच्युटी पाने का अधिकार दिया है। यह बदलाव लाखों कर्मचारियों के लिए सहूलियत लेकर आया है। वहीं, परमानेंट या स्थायी कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी पाने की शर्त अभी भी कम से कम 5 साल की लगातार सेवा है।

30 दिन में ग्रेच्युटी भुगतान जरूरी

कंपनी को अब ग्रेच्युटी का भुगतान 30 दिनों के अंदर करना होगा। यदि 30 दिनों के अंदर भुगतान नहीं करती है, तो उसे 10% सालाना ब्याज के रूप में अतिरिक्त भुगतान करना होगा। यह नियम कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा करता है और सुनिश्चित करता है कि उनका हक समय पर दिया जाए।

ग्रेच्युटी की गणना कैसे होती है?

ग्रेच्युटी की गणना का फॉर्मूला है: अंतिम सैलरी (बेसिक + DA) × 15/26 × काम किए गए वर्ष। यहाँ 15 दिन की सैलरी प्रति वर्ष के हिसाब से भुगतान किया जाता है और 26 को औसत महीने के कामकाजी दिनों के रूप में माना जाता है। इस फॉर्मूले के तहत अधिकतम भुगतान की सीमा लगभग 20 लाख रुपये तक हो सकती है।

स्पष्ट बात

  • नया 1 साल का नियम सभी कर्मचारियों पर लागू नहीं है, बल्कि यह केवल फिक्स्ड टर्म और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए है।
  • परमानेंट कर्मचारियों को ग्रेच्युटी पाने के लिए 5 साल लगातार सेवा करनी होती है।
  • ग्रेच्युटी का भुगतान 30 दिन के अंदर करना अनिवार्य है, वर्ना ब्याज देना होगा।

यह बदलाव श्रमिकों को बेहतर सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सुविधा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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