गुलगुलिया गैंग का भंडाफोड़: 12 मासूम बच्चों को छुड़ाया, 16 मानव तस्कर गिरफ्तार – झारखंड पुलिस की बड़ी कार्रवाई

रांची। झारखंड पुलिस ने मानव तस्करी के कुख्यात गुलगुलिया गैंग के खिलाफ ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया है। रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र से 12 मासूम बच्चों को गैंग के चंगुल से सुरक्षित छुड़ाया गया, जो बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में बेचे जाने की कगार पर थे।

इस सनसनीखेज ऑपरेशन में 16 तस्करों को गिरफ्तार किया गया, जिनका नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था। यह घटना 18 जनवरी 2026 को सामने आई, जो देशभर में मानव तस्करी के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने का संदेश दे रही है।
गुलगुलिया गैंग का काला कारोबार: झारखंड से बच्चों की तस्करी का अंतरराज्यीय नेटवर्क
गुलगुलिया गैंग लंबे समय से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को निशाना बनाता रहा है। झारखंड के रांची, धनबाद, बोकारो और चाईबासा जैसे जिलों से गरीब घरों के 5 से 12 वर्षीय बच्चों को अगवा कर बेचने का धंधा चलाया जाता था। गैंग के सदस्य बिहार के औरंगाबाद, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से संचालित होते थे, जहां बच्चे भीख मंगवाने, चोरी करवाने या बड़े होने पर देह व्यापार में धकेल दिए जाते थे। रांची एसएसपी राकेश रंजन के अनुसार, गैंग सरगना अशोक सिंह और बाबू साहेब जैसे आरोपी पहले ही दर्जनों बच्चों का सौदा कर चुके थे। इस नेटवर्क का पर्दाफाश धुर्वा थाने से लापता अंश और अंशिका नामक दो बच्चों की तलाश के दौरान हुआ।
पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि गैंग के सदस्य रांची के सुनसान इलाकों में बच्चों को छिपाकर रखे हुए थे। ये बच्चे डराने-धमकाने के बाद अगवा किए गए थे और उनके लिए एडवांस पैसे तक ले लिए गए थे। गैंग की पहचान ‘गुलगुलिया गैंग’ के रूप में हुई, जो मानव अंग तस्करी से भी जुड़े होने की आशंका जता रहा है। एसएसपी ने स्पष्ट किया कि जांच में यह पुष्टि हो रही है कि गैंग का मकसद केवल तस्करी ही नहीं, बल्कि बच्चों को अपराध की दुनिया में धकेलना भी था। यह गिरोह वर्षों से सक्रिय था और झारखंड पुलिस की यह कार्रवाई इसे जड़ से उखाड़ने की दिशा में बड़ा कदम है।
यह भी पढ़ें:https://thedbnews.in/shah-rukh-khans-don-avatar-will-rock-the-theatres-this-christmas/
पुलिस की साहसिक छापेमारी: 16 गिरफ्तारियां और बरामद सामान
19 जनवरी 2026 को विशेष पुलिस टीम ने गैंग के कई ठिकानों पर एक साथ धावा बोल दिया। रांची पुलिस ने बिहार, यूपी और अन्य राज्यों में फैले नेटवर्क को चकमा देकर 16 सदस्यों को धर दबोचा। गिरफ्तार आरोपियों के पास से फर्जी दस्तावेज, मोबाइल फोन, नकदी और बच्चों के परिवहन के साधन बरामद हुए। धुर्वा थाने में रखे गए बच्चों को तत्काल चाइल्ड वेलफेयर कमिटी के हवाले कर दिया गया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि अंश-अंशिका सहित अन्य बच्चे बेचे जाने के अंतिम चरण में थे।
रांची एसएसपी राकेश रंजन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह ऑपरेशन ‘ट्रैकडाउन’ का हिस्सा था, जिसमें कई जिलों और राज्यों में छापेमारी की गई। गैंग के मुख्य सरगनाओं सहित सभी प्रमुख आरोपी हिरासत में हैं। पुलिस अब डीएनए टेस्ट के जरिए बच्चों के परिवारों की पहचान कर रही है। यह कार्रवाई न केवल तस्करी रोकेगी, बल्कि अन्य संभावित अपराधों को भी जन्म देगी। झारखंड पुलिस की यह सफलता पूरे देश के लिए मिसाल है।
बच्चों की सुरक्षा और परिवारों से संपर्क: चाइल्ड वेलफेयर की प्राथमिकता
छुड़ाए गए 12 बच्चे पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें मेडिकल जांच के बाद सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। रांची पुलिस परिवारों से संपर्क के लिए डीएनए सैंपल लेने की तैयारी में जुटी है। चाइल्ड वेलफेयर कमिटी बच्चों की काउंसलिंग और पुनर्वास सुनिश्चित करेगी। डीसीपी ने कहा, “हमारी प्राथमिकता बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना है। गैंग के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जांच जारी रहेगी।” यह घटना गरीब परिवारों में जागरूकता फैलाने का अवसर प्रदान करती है।
गुलगुलिया गैंग का इतिहास: मानव तस्करी के खतरे पर गहन नजर
गुलगुलिया गैंग का नाम पहली बार बिहार और झारखंड में सामने आया, जहां यह गरीब तबके को टारगेट करता था। पिछले वर्षों में ऐसे कई मामले दर्ज हुए, जहां बच्चे चोरी के बाद गुमशुदा घोषित हो जाते थे। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्रतिवर्ष हजारों बच्चे तस्करी का शिकार बनते हैं। झारखंड जैसे राज्य, जहां प्रवासन अधिक है, सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। गैंग बच्चों को सस्ते दामों पर बेचता था, जो 50,000 से 2 लाख रुपये तक होता था।
यह गैंग अन्य अपराधों से भी जुड़ा था, जैसे भीख मंडली चलाना और चोरी करवाना। बड़े होने पर लड़कियों को देह व्यापार में झोंक दिया जाता। पुलिस अब मानव अंग तस्करी के एंगल की भी जांच कर रही है। राष्ट्रीय स्तर पर मानव तस्करी रोकने हेतु विशेष टास्क फोर्स की आवश्यकता है।
झारखंड पुलिस की मानव तस्करी के खिलाफ मुहिम: आंकड़े और सफलताएं
झारखंड में 2025 में मानव तस्करी के 500 से अधिक मामले दर्ज हुए। रांची पुलिस ने पिछले एक वर्ष में 50 से ज्यादा बच्चों को बचाया। गुलगुलिया गैंग का भंडाफोड़ इस मुहिम की सबसे बड़ी सफलता है। राज्य सरकार ने तस्करी रोकने हेतु हेल्पलाइन और सीसीटीवी नेटवर्क बढ़ाने का ऐलान किया। केंद्र सरकार की ‘ऑपरेशन शील्ड’ जैसी योजनाएं भी प्रभावी सिद्ध हो रही हैं।
| वर्ष | तस्करी मामले | बचाए बच्चे | गिरफ्तार तस्कर |
|---|---|---|---|
| 2024 | 450 | 40 | 120 |
| 2025 | 520 | 55 | 150 |
| 2026 (जनवरी तक) | 30 | 12 | 16 |
मानव तस्करी रोकने के उपाय: जागरूकता और सख्त कानून
मानव तस्करी रोकने हेतु ग्रामीण स्तर पर जागरूकता अभियान जरूरी हैं। पुलिस-समुदाय सहयोग से ऐसे गैंगों का सफाया संभव है। भारत में आईपीसी की धारा 370 के तहत सजा कड़ी है, लेकिन अमल में कमी है। एनजीओ और सरकार मिलकर हेल्पलाइन 1098 को सक्रिय रखें। अभिभावक बच्चों पर नजर रखें और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दें। यह घटना समाज को सोचने पर मजबूर करती है।
विशेषज्ञों की राय: तस्करी के साइकोलॉजिकल प्रभाव
बच्चों पर तस्करी का मानसिक आघात गहरा होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे बच्चे PTSD और डिप्रेशन का शिकार बनते हैं। लंबे उपचार की जरूरत पड़ती है। चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट डॉ. रीना शर्मा कहती हैं, “बचाव के बाद काउंसलिंग अनिवार्य है।” सरकार को पुनर्वास केंद्र बढ़ाने चाहिए।
भविष्य की चुनौतियां: अंतरराज्यीय तस्करी पर नकेल
गुलगुलिया गैंग जैसे गिरोह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से भी जुड़ रहे हैं। डार्क वेब पर बच्चों की खरीद-फरोख्त आम हो रही। पुलिस को साइबर फॉरेंसिक की ट्रेनिंग जरूरी। केंद्र-राज्य समन्वय से ही इसे रोका जा सकता। झारखंड पुलिस की यह जीत पूरे देश को प्रेरित करेगी।
गुलगुलिया गैंग का भंडाफोड़ मानव तस्करी के खिलाफ युद्ध में मील का पत्थर है। 12 बच्चों का जीवन बचना सभी की जीत है। समाज को एकजुट होकर ऐसे अपराधों के खिलाफ खड़ा होना होगा।
यह भी पढ़ें:https://thedbnews.in/bank-locker-sealed-income-tax-raid-on-bhole-baba-group-rs-5-crore-cash-seized/

