गुप्त नवरात्रि 2026: घटस्थापना का शुभ मुहूर्त समय, पूर्ण विधि और साधना सफलता के उपाय।

नई दिल्ली, 16 जनवरी 2026 – हिंदू संधि पंचांग के अनुसार, आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 का प्रारंभ 18 जनवरी से हो रहा है। यह तांत्रिक साधकों और भक्तों के लिए विशेष नौ दिवसीय उपवास काल है, जहां मां दुर्गा के गुप्त रूपों की आराधना की जाती है।

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त साधना की सफलता का आधार है, क्योंकि गलत समय पर कलश स्थापना बाधाएं उत्पन्न कर सकता है। इस विस्तृत रिपोर्ट में जानें पूर्ण पंचांग, मुहूर्त विवरण, विधि, लाभ और सावधानियां – SEO अनुकूलित गाइड जो आपकी खोज को पूरा करेगी।
गुप्त नवरात्रि 2026 का महत्वपूर्ण पंचांग
गुप्त नवरात्रि वर्ष में दो बार आती है – माघ और आषाढ़ मास में। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि तंत्र-मंत्र साधनाओं के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।
2026 में यह 18 जनवरी (रविवार) से 26 जनवरी (सोमवार) तक चलेगी। प्रतिपदा तिथि 18 जनवरी सुबह 8:45 तक रहेगी, उसके बाद द्वितीया आरंभ होगी।
ज्योतिषीय दृष्टि से यह काल शनि की साढ़ेसाती और दशा प्रभाव से मुक्ति दिलाता है। लाखों साधक पहले ही तैयारी में जुटे हैं।
पूर्ण तिथि कैलेंडर:
- दिन 1 (प्रतिपदा): 18 जनवरी – घटस्थापना
- दिन 2 (द्वितीया): 18-19 जनवरी – ब्रह्मचारिणी पूजन
- दिन 9 (नवमी): 26 जनवरी – सिद्धि प्राप्ति
घटस्थापना 2026: शुभ मुहूर्त समय सारिणी
घटस्थापना नवरात्रि की नींव है। 18 जनवरी 2026 को दिल्ली-NCR सहित उत्तर भारत के लिए निम्न मुहूर्त हैं:
| मुहूर्त प्रकार | प्रारंभ समय (IST) | समापन समय (IST) | अवधि |
|---|---|---|---|
| चौघड़िया योग | 6:12 AM | 7:48 AM | 1 घंटा 36 मिनट |
| अभिजीत मुहूर्त | 11:58 AM | 12:52 PM | 54 मिनट |
| मध्याह्न मुहूर्त | 11:48 AM | 1:48 PM | 2 घंटे |
| संध्या मुहूर्त | 7:00 PM | 8:36 PM | 1 घंटा 36 मिनट |
अभिजीत मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ है, क्योंकि इसमें सभी दोष समाप्त हो जाते हैं। प्रतिपदा तिथि समाप्ति के बाद भी स्थापना शुभ रहेगी। ज्योतिषी डॉ. अलीशा शर्मा के अनुसार, “यह मुहूर्त स्थानीय पंचांग से जांचें, क्योंकि लंबन राशि अनुसार भिन्नता हो सकती है।”
घटस्थापना की सटीक विधि: चरणबद्ध मार्गदर्शिका
सही विधि से घटस्थापना करने पर साधना में विघ्न नहीं आते। नीचे स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया दी गई है:
- पूजा स्थल शुद्धिकरण: गोमूत्र, गंगाजल से स्नान कराएं। स्वास्तिक, रंगोली बनाएं।
- कलश संकल्प: मिट्टी या तांबे का कलश लें। जल भरें, सुपारी, सिक्का, पान डालें।
- मंगल कलश सज्जा: आम के 7 पत्ते चिपकाएं, नारियल बांधें। “ॐ कलश स्थापनं कुरु कुरु स्वाहा” मंत्र पढ़ें।
- जौ बोना: कलश पर मिट्टी की वेदी बनाएं, जौ व सरसों के बीज बोएं।
- दुर्गा प्रतिष्ठापन: मां दुर्गा की मूर्ति या यंत्र स्थापित करें। हवन, आरती करें।
आवश्यक सामग्री सूची:
- कलश, नारियल, आमपत्र, जौ, चंदन, रोली, कुमकुम।
- फल, मिठाई, धूप, दीप।
यह विधि स्कंद पुराण और दुर्गा सप्तशती पर आधारित है।
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गुप्त नवरात्रि के प्रत्येक दिन का विशेष पूजन
प्रत्येक दिन अलग रूप की आराधना होती है:
- दिन 1: शैलपुत्री – धन प्राप्ति।
- दिन 2: ब्रह्मचारिणी – विद्या व ज्ञान।
- दिन 5: स्कंदमाता – संतान सुख।
- दिन 9: सिद्धिदात्री – सभी सिद्धियां।
रोजाना हवन सामग्री: गुग्गल, तिल, जौ – 108 आहुतियां दें। कन्या भोजन कराएं।
तांत्रिक साधना: गुप्त नवरात्रि की खासियत
गुप्त नवरात्रि साधना गुप्त रखी जाती है। तांत्रिक मंत्र जैसे “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” का जाप करें।
लाभ:
- कालसर्प दोष निवारण।
- धन-समृद्धि व शत्रु नाश।
- मानसिक शांति व इच्छापूर्ति।
पिछले वर्ष 2025 में हजारों साधकों ने चमत्कार अनुभव किए।
व्रत नियम और आहार: सात्विक रहें
व्रत में फलाहार लें – केला, सेब, दूध। राति एक समय भोजन। ब्रह्मचर्य, मांसाहार त्यागें।
वर्जित कार्य: क्रोध, झूठ, मदिरा। गर्भवती व रोगी हल्का व्रत रखें।
ज्योतिषीय योग: क्यों है 2026 विशेष?
2026 में गुरु कुंभ राशि में हैं, जो आध्यात्मिक उन्नति देंगे। शनि मीन में – कर्मफल तेज। राहु-केतु प्रभाव कम होगा।
सामान्य प्रश्न: FAQs
प्रश्न 1: यदि मुहूर्त निकल जाए तो क्या करें?
उत्तर: अगले शुभ चौघड़िया में स्थापना करें।
प्रश्न 2: कौन सी दिशा में कलश रखें?
उत्तर: पूर्व या उत्तर।
प्रश्न 3: घर में कौन कर सकता है?
उत्तर: गृहस्थ, साधक सभी।
सावधानियां: गलतियां न करें
- अशुद्ध जल न डालें।
- रात्रि जागरण से बचें।
- मंत्रों का स्पष्ट उच्चारण।
नवरात्रि 2026 के बाद क्या?
26 जनवरी को कुमारी पूजन व हवन से समापन। प्रसाद वितरण करें। प्रभाव लंबे समय रहता है।
गुप्त नवरात्रि 2026 आपकी साधना को सफल बनाने का स्वर्णिम अवसर है। सही घटस्थापना मुहूर्त (11:58 AM अभिजीत) का पालन करें। ज्योतिष ऐप्स से अपडेट रहें। क्या आप विशिष्ट मंत्र या पूजन विधि चाहेंगे?
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