अंबेडकर प्रतिमा विवाद: ग्वालियर में 4 हजार पुलिस जवान तैनात,आईजी, डीआईजी और SSP भी सड़कों पर उतरे

ग्वालियर में 15 अक्टूबर को संभावित आंदोलन को लेकर पुलिस हाई अलर्ट मोड में है। शहर में 4 हजार से अधिक पुलिस जवान तैनात किए गए हैं और 70 चेकिंग प्वाइंट बनाए गए हैं। पुलिस शहर की सीमाओं और विभिन्न क्षेत्रों में कड़ी सुरक्षा और निगरानी कर रही है।

आईजी, डीआईजी और एसएसपी स्वयं पुलिस चेकिंग पॉइंट्स का निरीक्षण कर रहे हैं। हिंसा की आशंका को देखते हुए स्कूलों में 12वीं तक छुट्टी घोषित की गई है। प्रशासन ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को लेकर भी सख्त कदम उठाए हैं। साथ ही, शांति बनाए रखने के लिए विभिन्न समाजिक संगठनों के साथ बैठकें की गई हैं और वे भी आंदोलन न करने के पक्ष में हैं।
पुलिस ने संदिग्ध वाहनों और व्यक्तियों की वाहनों की जांच तेज कर दी है ताकि कोई हथियार या आचार-विचार भड़काने वाली वस्तुएं शहर में न आ सकें। 100 पेट्रोलिंग वाहन और विशेष सुरक्षा बल भी तैनात हैं। ग्वालियर के अलावा भिंड, मुरैना, अशोकनगर, गुना और शिवपुरी जिलों में भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
यह सुरक्षा उपाय अंबेडकर प्रतिमा विवाद से उत्पन्न तनाव और सामाजिक शांति बनाए रखने के लिए किए गए हैं। पुलिस प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था को बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और किसी भी व्यक्ति या समूह को हिंसा की इजाजत नहीं दी जाएगी.
आंदोलन की वजह कौन से समूह हैं
ग्वालियर में आंदोलन की वजह डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा को लेकर विवाद है। इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब ग्वालियर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल मिश्रा ने डॉ. अंबेडकर के खिलाफ विवादित बयान दिया, जिसका विरोध दलित समाज के विभिन्न संगठनों ने किया। इसके बाद भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी जैसे दलित संगठनों ने 15 अक्टूबर को आंदोलन का आह्वान किया था।
इस आंदोलन की वजह मुख्य रूप से दलित समाज के संगठन हैं जो अंबेडकर की प्रतिमा की स्थापना के समर्थन में हैं, जबकि कुछ सवर्ण समाज के संगठनों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों की भड़काऊ पोस्टों के कारण तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। हालांकि, भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी ने बाद में 15 अक्टूबर के आंदोलन को स्थगित कर दिया है।
इस आंदोलन में दलित संगठनों के साथ-साथ कुछ सवर्ण समूह भी शामिल थे, जो विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे थे। इस विवाद से पहले ग्वालियर में 2018 में भी जातिगत संघर्ष हुआ था जिसमें कई लोग मारे गए थे, इस कारण सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि हालात नियंत्रण में रह सकें।
संक्षेप में, आंदोलन के पीछे दलित संगठनों जैसे भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी और सवर्ण संगठनों के बीच एक सामाजिक और राजनीतिक मतभेद है, जो अंबेडकर प्रतिमा विवाद से उत्पन्न हुआ है.

