बरेली पुलिस ने हैदरी दल नामक विवादास्पद संगठन के सरगना मजहर अंसारी को गिरफ्तार कर लिया है, जो हिंदू संगठनों की तर्ज पर बनाया गया था और सोशल मीडिया के जरिए धार्मिक नफरत फैला रहा था।

झारखंड के गिरिडीह जिले का रहने वाला यह आरोपी फर्जी वीडियो एडिट कर यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर भड़काऊ सामग्री पोस्ट करता था। यह गिरफ्तारी सांप्रदायिक सौहार्द को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो ऑनलाइन हेट स्पीच के बढ़ते खतरे को उजागर करती है।​

हैदरी दल का उदय: हिंदू संगठनों से प्रेरित विवादास्पद मॉडल

हैदरी दल को बजरंग दल या विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों की नकल में तैयार किया गया था, जहां खुद को ‘समाज सुधारक’ बताते हुए मोरल पुलिसिंग का बहाना बनाया जाता था। संगठन का दावा था कि यह मुस्लिम युवाओं को एकजुट कर रहा है, लेकिन हकीकत में इसका मकसद सांप्रदायिक तनाव पैदा करना था। मजहर ने विभिन्न राज्यों के पुराने वीडियो उठाकर उन्हें एडिट किया और बरेली या उत्तर प्रदेश से जोड़कर वायरल किया, जिससे समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ा। पुलिस जांच में सामने आया कि यह दल सितंबर 2025 से दोबारा सक्रिय हुआ था, जब इसके पुराने अकाउंट निष्क्रिय हो चुके थे।​

इस संगठन की रणनीति बेहद सुनियोजित थी। हिंदू संगठनों की तरह रैली, पोस्टर और सोशल मीडिया कैंपेन चलाए जाते थे, लेकिन फोकस हमेशा भड़काऊ कंटेंट पर रहता। उदाहरण के लिए, सार्वजनिक पार्कों में मुस्लिम लड़कियों को हिंदू लड़कों के साथ देखते ही अपमानित करने के वीडियो शेयर किए जाते। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर तनाव बढ़ा, बल्कि लाखों फॉलोअर्स तक नफरत का जहर फैला। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी नकल सामाजिक विभाजन को गहरा करती है।

सोशल मीडिया पर नफरत का जाल: वायरल वीडियो और फेक न्यूज की रणनीति

मजहर द्वारा संचालित हैदरी दल के सोशल मीडिया अकाउंट्स सबसे बड़े फॉलोअर बेस वाले थे, जहां रोजाना दर्जनों पोस्ट अपलोड होते। यूट्यूब चैनल पर एडिटेड वीडियो, इंस्टाग्राम रील्स पर छोटे क्लिप और फेसबुक ग्रुप्स में लाइव सेशन से लाखों व्यूज हासिल किए जाते। इनमें हिंदू संगठनों के खिलाफ आक्रामक बयानबाजी होती, जो सीधे धार्मिक भावनाओं को आहत करती। गिरफ्तारी के समय उसके पास कई मोबाइल फोन और लैपटॉप बरामद हुए, जिनसे प्रोपेगैंडा सामग्री चल रही थी।​

पुलिस के अनुसार, मजहर दिल्ली में मोमोज बेचने का काम करता था, लेकिन रातों को वीडियो एडिटिंग में व्यस्त रहता। वह देशभर से फुटेज इकट्ठा कर फोटोशॉप और वीडियो एडिटिंग टूल्स से फर्जी न्यूज बनाता। उदाहरणस्वरूप, मध्य प्रदेश या झारखंड की घटनाओं को बरेली से लिंक कर पोस्ट किया जाता। इससे ऑनलाइन ट्रोलिंग बढ़ती और रीयल लाइफ में झड़पें होतीं। साइबर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऐसे अकाउंट्स एल्गोरिदम की मदद से तेजी से वायरल होते हैं।​

इसके अलावा, हैदरी दल के सदस्य मोरल पुलिसिंग के नाम पर सड़कों पर घूमते। वैलेंटाइन डे जैसे अवसरों पर गांधी उद्यान जैसे पार्कों में युवतियों को रोककर हिजाब या कपड़ों पर सवाल उठाते। ये वीडियो सोशल मीडिया पर डालकर वायरल कर दिए जाते, जिससे शहर का माहौल खराब होता। पुलिस ने ऐसे कई वीडियो ट्रेस किए हैं।
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पुलिस कार्रवाई: इंटेलिजेंस और सर्विलांस की जीत

बरेली पुलिस को इंटेलिजेंस इनपुट मिला कि हैदरी दल के मुख्य अकाउंट झारखंड के गिरिडीह से चल रहे हैं। सीओ प्रथम आशुतोष शिवम के नेतृत्व में मठ चौकी प्रभारी विक्रांत तोमर ने पुराने रोडवेज स्टैंड के पास मजहर को दबोच लिया। पूछताछ में वह मास्टरमाइंड साबित हुआ। कोर्ट ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया। उसके दो साथी पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं – एक होम्योपैथी डॉक्टर और एक कंप्यूटर इंजीनियर।​

आरोपी पर आईपीसी धारा 153A (धार्मिक वैमनस्य), 505 (शांति भंग) और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज। बरेली पुलिस ने सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एसएसपी ने कहा कि सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। यह कार्रवाई अन्य शहरों में भी नेटवर्क खंगालने का संकेत देती है।​

हैदरी दल का पिछला इतिहास: वैलेंटाइन डे कांड से सितंबर 2025 तक

हैदरी दल पहली बार 14 फरवरी 2025 को सुर्खियों में आया, जब गांधी उद्यान में मुस्लिम युवतियों के साथ अभद्रता की गई। हिजाब उतारने की कोशिश और सार्वजनिक अपमान के वीडियो वायरल हुए। कोतवाली पुलिस ने कई सदस्यों को जेल भेजा, लेकिन संगठन भूमिगत हो गया। सितंबर 2025 में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से अकबर अली जैसे मास्टरमाइंड गिरफ्तार हुए। फिर 2026 में मजहर ने कमान संभाली।​

मौलाना तौकीर रजा का नाम भी चर्चा में रहा, जिन्होंने कथित रूप से समर्थन दिया। पुलिस इसकी जांच कर रही। ऐसे संगठन युवाओं को गुमराह कर हिंसा भड़काते हैं। पिछले केसों में कोतवाली, मठ चौकी और अन्य थानों में दर्ज मुकदमे हैं।

सोशल मीडिया हेट स्पीच का व्यापक खतरा: विशेषज्ञ विश्लेषण

भारत में सोशल मीडिया पर हेट स्पीच तेजी से बढ़ रही है। 2025 में 30% से अधिक सांप्रदायिक पोस्ट एडिटेड वीडियो से थे। हैदरी दल जैसी ग्रुप्स एल्गोरिदम का फायदा उठाती हैं, जहां नकारात्मक कंटेंट ज्यादा व्यूज पाता। साइबर लॉ विशेषज्ञों का कहना है कि आईटी एक्ट के बावजूद प्लेटफॉर्म्स की निगरानी कमजोर है। सरकार को AI टूल्स से मॉनिटरिंग बढ़ानी चाहिए।

उत्तर प्रदेश जैसे संवेदनशील राज्य में यह खतरा ज्यादा। बरेली, जो धार्मिक नगरी है, ऐसे गिरोहों का शिकार आसान। एनजीओ रिपोर्ट्स बताती हैं कि 2025 में 500+ हेट स्पीच केस दर्ज। मजहर गिरफ्तारी से अन्य गिरोह सतर्क होंगे।

कानूनी प्रावधान और सजा: आरोपी का भविष्य

आईपीसी 153A में 3 साल तक कैद, 505 में 3-7 साल। आईटी एक्ट से 5+ साल। मजहर को जेल में रहना पड़ेगा। पुलिस अन्य सदस्यों की तलाश में छापे मार रही। सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत सोशल मीडिया पोस्ट 36 घंटे में हटाने जरूरी।

सांप्रदायिक सद्भाव बचाने के उपाय: सरकार और समाज की जिम्मेदारी

इस घटना से सीख: अभिभावक बच्चों को सोशल मीडिया के दुरुपयोग से बचाएं। स्कूलों में साइबर साक्षरता पढ़ाएं। प्लेटफॉर्म्स को सख्ती बरतनी चाहिए। योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी कारगर साबित हो रही। नागरिक रिपोर्टिंग बढ़ाएं।

नफरत के खिलाफ एकजुटता

हैदरी दल की गिरफ्तारी सकारात्मक संकेत। मजहर जैसे अपराधी समाज को बांट नहीं सकते। सभी समुदाय मिलकर सौहार्द बनाए रखें। पुलिस की तारीफ। आगे सतर्क रहें।
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