राजस्थान में सरकारी केंद्रों तक कैसे पहुंचा दागी कंपनी का सिरप? एक बच्चे की मौत…


राजस्थान: दागी कंपनी का सिरप सरकारी केंद्रों तक पहुंचने का मुख्य माध्यम राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RMSC) था। RMSC एक कंपनी है जो राज्य सरकार के अधीन सभी सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों और अस्पतालों में दवाओं और सिरपों की खरीद, गुणवत्ता जांच, भंडारण और वितरण की पूरी प्रक्रिया संभालती है।
सिरप की सप्लाई आमतौर पर प्रोक्योरमेंट के जरिए होती है जिसमें टेंडर लगाए जाते हैं और चुनी गई कंपनी के उत्पाद को जिले के वेयरहाउसों तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद ये वेयरहाउस सप्ताह या महीने के आधार पर सिरप को हॉस्पिटल, चेंज हेल्थ सेंटर (CHC), या प्राइमरी हेल्थ सेंटर (PHC) तक वितरित करते हैं। इस प्रक्रिया को ई-औषधि नामक सॉफ्टवेयर के माध्यम से ट्रैक और मैनेज किया जाता है।
यदि दागी सिरप सरकारी केंद्रों तक पहुंचा है तो इसका मतलब है कि वह किसी प्रोक्योरमेंट टेंडर या सप्लायर अनुबंध के तहत RMSC के माध्यम से कानूनी और आधिकारिक सप्लाई चेन में शामिल हुआ था, जिसमें गुणवत्ता जांच होती है और सप्लाई प्रणाली से गुजरता है। हालाँकि, हाल ही में राजस्थान में टॉक्सिक सिरप की सप्लाई को रोक दिया गया है और जांच चल रही है.
इसलिए, राजस्थान में दागी कंपनी का सिरप सरकारी केंद्रों तक RMSC के प्रोक्योरमेंट, गुणवत्ता जांच, और वितरण नेटवर्क के ज़रिए पहुंचा।
सरकारी दवा आपूर्ति चेन में मिलावट कैसे पकड़ी जाए
सरकारी दवा आपूर्ति चेन में मिलावट पकड़ने के लिए आधुनिक तकनीकों और कड़े नियंत्रण उपायों का उपयोग किया जाता है। मुख्य तरीके निम्न हैं:
जांच और परीक्षण तकनीकें
- भौतिक और रासायनिक परीक्षण: दवा के भौतिक गुण जैसे रंग, गंध, पोषण तत्व आदि चेक किए जाते हैं। रासायनिक विश्लेषण में chromatography (जैसे HPLC), spectrometry (LC-MS, GC-MS) और अन्य तकनीकों से मिलावट का पता चलता है।
- थिन लेयर क्रोमैटोग्राफी (TLC) और हाई परफॉर्मेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफी (HPLC) जैसी तकनीकों का उपयोग करके मिश्रित और अनुचित तत्वों की पहचान की जाती है।
ट्रेसबिलिटी और ट्रैकिंग तकनीकें
- सप्लाई चेन में दवाओं को RFID टैग, बारकोड आदि के माध्यम से ट्रैक किया जाता है, जिससे असली और नकली दवाओं में अंतर किया जा सकता है।
- ई-ड्रग मॉनिटरिंग सिस्टम्स से आपूर्ति के हर चरण का रिकॉर्ड रखा जाता है, ताकि संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई हो सके।
नियंत्रण और निरीक्षण
- उत्पादन स्थल, भंडारण और वितरण केंद्रों पर कड़ी निगरानी और नियमित ऑडिट से मिलावट को कम किया जाता है।
- सरकारी एजेंसियाँ और गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाएं सैंपल लेकर रैंडम चेक करती हैं ताकि पता चल सके कि कोई मिलावट तो नहीं हो रही।
जागरूकता और कड़े नियम
- निर्माताओं और वितरकों को GMP (Good Manufacturing Practices) का पालन करना अनिवार्य किया जाता है।
- कर्मचारी और प्रबंधन में जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और कड़े दंड नियम बनाए गए हैं।
इस तरह, मिलावट पकड़ने के लिए रासायनिक, भौतिक परीक्षणों के साथ टेक्नोलॉजी आधारित ट्रैकिंग और कड़े प्रशासनिक कदम बहुत जरूरी हैं। इन उपायों से सरकारी दवा आपूर्ति चेन में मिलावट को जल्दी और प्रभावी तरीके से पकड़ा जा सकता है।
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