मध्य प्रदेश के IAS अधिकारी डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा पर ₹51 करोड़ के अवैध खनन जुर्माने को महज ₹4,032 करने और इस घूस के पैसों से भोपाल में लगभग 8 करोड़ की जमीन खरीदने का आरोप लगा है।

जुर्माना घटाने का मामला

हरदा जिले में Additional District Magistrate के पद पर रहते हुए डॉ. नागार्जुन गौड़ा ने Path India Pvt. Ltd. कंपनी पर लगाया गया ₹51.67 करोड़ का जुर्माना घटाकर ₹4,032 कर दिया था। इस जुर्माने को घटाने का कारण उन्होंने कमजोर साक्ष्य और दस्तावेजों में असंगतियां बताया। हालांकि, RTI एक्टिविस्ट आनंद जाट ने आरोप लगाया कि यह निर्णय रिश्वत के तहत लिया गया था और यह रिश्वतखोरी का मामला है। अधिकारी ने इसे पूरी तरह कानूनी और सबूत आधारित बताया और आरोपों का खंडन किया।​

जमीन खरीदने का आरोप

शहर भोपाल के फतेहपुर डोबरा गांव में डॉ. गौड़ा ने लगभग 4 एकड़ जमीन खरीदी है, जिसकी बाजार कीमत करीब 8 करोड़ रुपए बताई जा रही है। आनंद जाट ने इसे घूस के पैसों से खरीदी गई जमीन बताया है। इस मामले में डॉ. गौड़ा ने कहा कि सरकारी सेवा में रहते हुए जमीन खरीदने के लिए उन्हें सरकार की अनुमति मिली है और उन्होंने उसी के तहत जमीन खरीदी है। जमीन की क़ीमत रजिस्ट्री रिकॉर्ड में कम दिख रही है क्योंकि शासकीय कीमत और बाजार कीमत में अंतर होता है।

वर्तमान स्थिति और विवाद

  • आनंद जाट ने इस मामले को ईओडब्ल्यू के पास शिकायत करने की बात कही है।
  • डॉ. नागार्जुन गौड़ा फिलहाल खंडवा जिला पंचायत के CEO हैं।
  • हरदा कलेक्टर ने भी कहा है कि जुर्माना कम करने में प्रक्रिया का पालन हुआ है।
  • आरोप लगाने वाले आनंद जाट के खिलाफ भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
  • इस मामले की जांच और विवाद जारी है।

संक्षेप में, ₹51 करोड़ के जुर्माने को ₹4 हजार करने वाले IAS अधिकारी डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा पर इस घूस को लेकर बड़ी जमीन खरीदी के आरोप लगे हैं, जबकि अधिकारी ने अपनी सफाई में कहा है कि जमीन खरीदने में पूरी प्रक्रिया मानी गई और जुर्माना कम करने का निर्णय वैध था। जांच अभी जारी है और आगे क्या होगा यह देखना होगा।

सरकार ने IAS अधिकारी नागार्जुन बी. गौड़ा के ₹51 करोड़ के जुर्माने को घटाकर ₹4,032 करने और जमीन खरीदने के आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक जांच या विशेष जांच एजेंसी द्वारा कार्रवाई करने की रिपोर्ट नहीं आई है।

कई रिपोर्टों और सुनवाईयों में यह सामने आया है कि जुर्माना कम करने का फैसला कानूनी दस्तावेजों, नियमों और जांच के आधार पर लिया गया था। शुरुआती जुर्माना नोटिस भी डॉ. गौड़ा के कार्यकाल से पहले जारी हुआ था और उसमें कई प्रक्रियागत कमजोरियां पाई गईं। RTI एक्टिविस्ट के आरोपों के बावजूद कोई ठोस सबूत या वीडियो फूटेज सामने नहीं आया है, और आरोप लगाने वाले के खिलाफ कई आपराधिक मामले भी हैं।

इस बीच, जिला कलेक्टर और संबंधित विभागों ने बताया कि जांच प्रक्रिया पूरी हुई और जुर्माना घटाने में नियमों का पालन हुआ। अभी तक जांच एजेंसी या सरकार की ओर से सीधे तौर पर इस मामले में कोई एक्सप्लिसिट जांच शुरू करने या CBI/ED जैसे किसी एजेंसी के बयान की पुष्टि नहीं हुई है।​​

संक्षेप में, अब तक की जानकारी के अनुसार, इस मामले में सरकार की तरफ से कोई विशेष जांच की आधिकारिक घोषणा या सक्रिय जांच शुरू होने की सूचना उपलब्ध नहीं है।

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