ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ उभर रहे विरोध प्रदर्शन अब एक पूर्ण क्रांति का रूप ले चुके हैं। दिसंबर 2025 में आर्थिक संकट से शुरू हुए ये आंदोलन जनवरी 2026 तक 100 से अधिक शहरों में फैल चुके हैं, जहां सैकड़ों प्रदर्शनकारी अपनी जान गंवा चुके हैं।

युवा पीढ़ी, महिलाएं और आम मजदूर सड़कों पर खामेनेई के खिलाफ नारे लगा रहे हैं, जबकि सरकार इन्हें विदेशी साजिश बता रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी ने आग में घी डाल दिया है।​

प्रदर्शनकारियों की असली पहचान: जेन Z की बगावत

ईरान के प्रदर्शनकारियों में सबसे आगे जेन Z पीढ़ी है – वे युवा जो 1997 से 2010 के बीच पैदा हुए। ये बच्चे इंटरनेट पर बड़ी हुई पीढ़ी है, जो सोशल मीडिया से दुनिया देखती है लेकिन ईरान की सख्ती से कैद महसूस करती है। आर्थिक मंदी, बेरोजगारी और महंगाई ने इन्हें सड़कों पर उतार दिया। तेहरान की गलियों में ये ‘खामेनेई मुर्दाबाद’ चिल्लाते हैं और निर्वासित शाह रजा पहलवी के नाम का जाप करते हैं।​

महिलाओं का रोल भी कमाल का है। हिजाब विरोधी आंदोलन की तरह अब वे खामेनेई की फोटो जला रही हैं और उसके ऊपर सिगरेट सुलगा रही हैं – एक साफ संदेश कि वे इस्लामी सत्ता से तंग आ चुकी हैं। छात्राएं और युवतियां सबसे आगे हैं, जो शिक्षा और आजादी की मांग कर रही हैं। मजदूर वर्ग भी जुड़ गया है; दुकानदार अपनी दुकानें बंद कर सड़कों पर उतर आए हैं। कराज शहर में सिटी हॉल जला दिया गया, जो इनकी नाराजगी की मिसाल है।​​

ये प्रदर्शनकारी कोई विदेशी एजेंट नहीं, बल्कि ईरान के अपने नागरिक हैं। जेन Z को ‘सामान्य जीवन’ चाहिए – नौकरी, इंटरनेट और बिना डर के जीना। पुरानी पीढ़ी चुप है, लेकिन नई पीढ़ी ने फैसला कर लिया है कि या तो बदलाव आएगा या मौत।​

हिंसा का सैलाब: 500 से ज्यादा मौतें, हजारों गिरफ्तार

प्रदर्शनों में सुरक्षाबलों की बर्बरता ने आंदोलन को और भड़का दिया। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, 500 से ज्यादा प्रदर्शनकारी मारे गए, जिनमें बच्चे और किशोर शामिल हैं। तेहरान, इस्फहान, कराज जैसे शहरों में गोलीबारी हुई। खामेनेई ने खुद आदेश दिया कि प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई जाए। न्यायपालिका प्रमुख ने कहा, ‘इन्हें सख्त सजा मिलेगी।’​
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10,000 से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। इंटरनेट काट दिया गया, लेकिन वीडियो वायरल हो रहे हैं – जलते शहर हॉल, भागते युवा और लहूलुहान शव। IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर्प्स) अलर्ट पर है, लेकिन भीड़ नियंत्रण से बाहर हो रही है। 31 प्रांतों में आग लग चुकी है।​​

आर्थिक तबाही: रियाल की ऐतिहासिक गिरावट

आंदोलन की जड़ें आर्थिक संकट में हैं। ईरानी रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर है। हाइपरइन्फ्लेशन से ब्रेड, दूध जैसी चीजें आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गईं। बेरोजगारी 30% से ऊपर, खासकर युवाओं में। अमेरिकी प्रतिबंधों और खराब नीतियों ने ईरान को बर्बाद कर दिया।​​

लोग भूखे हैं, बिजली-पानी की कटौती आम है। जेन Z सोचता है – हम क्यों सहें? हम वैश्विक दुनिया में रहना चाहते हैं, न कि इस कैद में। ये आर्थिक नाराजगी राजनीतिक हो गई।​

खामेनेई का पलटवार: ट्रंप को दोषी ठहराया

खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को ‘दुश्मनों का एजेंट’ कहा और अमेरिका-इजरायल पर इल्जाम लगाया। ट्रंप ने चेतावनी दी, ‘प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाओगे तो भुगतोगे।’ खामेनेई भड़क गए – ‘हम झुकेंगे नहीं।’ पहली बार देश को संबोधित किया।​

रजा पहलवी ने समर्थन दिया, कहा ‘क्रांति आ रही है।’ लेकिन IRGC खामेनेई के साथ खड़ा है। क्या ये सत्ता का अंत है?​

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1979 की क्रांति से सबक

1979 की इस्लामी क्रांति ने शाह को हटाया, लेकिन अब वही सत्ता जनता के निशाने पर है। 2022 के हिजाब विरोध के बाद ये तीसरा बड़ा आंदोलन। जेन Z पुरानी गलतियों से सीख रही है – सोशल मीडिया से दुनिया जुड़ी है।​

भविष्य की संभावनाएं: सत्ता हिल रही है

प्रदर्शन 20 दिनों से ज्यादा चल रहे हैं। अगर IRGC टूटा, तो खामेनेई का अंत नजदीक। लेकिन दमन तेज हो रहा। दुनिया देख रही – यूएन, यूरोप चुप, ट्रंप मुखर। भारत जैसे देश तटस्थ।​

ईरान बदलाव के कगार पर। जेन Z की ये लड़ाई इतिहास रचेगी।
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