यह खबर भारतीय क्रिकेटर करुण नायर के भावनात्मक बयान से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने लंबे समय बाद अपने चयन को लेकर दिल की बात कही है।


भारत के टेस्ट क्रिकेटर करुण नायर ने हाल ही में अपने दिल का दर्द बयां करते हुए कहा कि उन्हें टीम से जिस तरह बाहर किया गया, वह अब भी उनकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी निराशाओं में से एक है। नायर ने साफ कहा कि वह सिर्फ एक सीरीज से ज्यादा का मौका डिजर्व करते थे।

करुण ने अपने इंटरव्यू में कहा कि उन्होंने अपने करियर का सबसे बड़ा झटका तब महसूस किया, जब 2016 में इंग्लैंड के खिलाफ तिहरा शतक लगाने के बाद भी उन्हें अगली सीरीज में मौका नहीं मिला। उनका कहना था, “अगर किसी खिलाड़ी को 300 रन बनाने के बाद भी बाहर कर दिया जाए, तो वह क्या सोचे? मुझे लगा मैं और खेलूंगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।”

नायर ने कहा कि जब कोई खिलाड़ी देश के लिए ट्रिपल सेंचुरी बनाता है, तो वो उम्मीद करता है कि उसे थोड़ा और मौका मिलेगा, अपनी क्षमता साबित करने का वक्त दिया जाएगा। लेकिन उनके साथ ऐसा नहीं हुआ। टीम में वापसी की उम्मीदें लगातार धुंधली होती गईं। उन्होंने साफ कहा कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही, और उन्होंने चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए।

करुण ने कहा, “एक क्रिकेटर के तौर पर जब आपको बार-बार नजरअंदाज किया जाता है, तो दर्द होता है। मैं सिर्फ एक सीरीज से ज्यादा का हकदार था।” उनकी यह बात क्रिकेट फैंस के बीच गूंज रही है, जो हमेशा उनके जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को फिर से मैदान पर देखने की उम्मीद रखे रहते हैं।

कभी भारत की टेस्ट टीम में नंबर 3 बैटर के तौर पर मजबूत जगह बनाने वाले करुण नायर के ये शब्द उस सिस्टम पर भी सवाल उठाते हैं, जो कई बार स्थायी टैलेंट को क्षणिक फॉर्म के चलते भुला देता है।

उन्होंने चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सिलेक्शन में पारदर्शिता की कमी रही है। “कभी ठीक से बताया ही नहीं गया कि मुझे क्यों ड्रॉप किया जा रहा है। एक खिलाड़ी के रूप में यह बहुत मुश्किल होता है जब आपको तो बताया भी नहीं जाता कि आपने कहाँ ग़लती की,” नायर ने कहा।

करुण, जिन्होंने भारत के लिए छह टेस्ट खेले और एकमात्र तिहरा शतक लगाने वाले कुछ भारतीय बल्लेबाज़ों में शामिल हैं, का कहना है कि उन्होंने हमेशा टीम के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की। “मैंने खुद पर काम करना बंद नहीं किया। अगर मौका मिलता है तो मैं फिर से टीम इंडिया के लिए तैयार हूँ,” उन्होंने दृढ़ता से कहा।

सोशल मीडिया पर उनके इस बयान के बाद कई क्रिकेट फैंस और पूर्व खिलाड़ियों ने भी उनके समर्थन में आवाज उठाई है, यह कहते हुए कि करुण जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी को इतना जल्दी भुला दिया जाना वाकई अनुचित था।

 इंग्लैंड के खिलाफ तिहरा शतक जमाने के बाद भी मौका न मिलने से वे आज भी आहत हैं। उनका कहना है — “सिर्फ एक सीरीज के बाद रिजेक्ट कर देना ठीक नहीं, मैं ज्यादा डिजर्व करता था।”

नायर ने चीफ सेलेक्टर अगरकर पर भी सवाल उठाए — “मुझे कभी सही वजह नहीं बताई गई कि मैं टीम से क्यों बाहर हूं। मेहनत करने के बावजूद ऐसा बर्ताव दुख देता है।”

फैंस भी मानते हैं, इतना टैलेंटेड खिलाड़ी इतनी जल्दी कैसे भुलाया जा सकता है?

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