राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर में गणतंत्र दिवस से ठीक पहले पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी का सनसनीखेज मामला सामने आया है।

नेहड़ान गांव के ई-मित्र सेंटर संचालक झबराराम मेघवाल को सुरक्षा एजेंसियों ने 25 जनवरी की रात हिरासत में ले लिया। उसे जयपुर ले जाकर गहन पूछताछ की जा रही है, जबकि उसके मोबाइल और कंप्यूटर जब्त कर फॉरेंसिक जांच शुरू हो गई है ।

घटना का पूरा विवरण: गणतंत्र दिवस पूर्व संध्या पर चली विशेष टीम

25 जनवरी 2026 की रात को जैसलमेर के सांकड़ा थाना क्षेत्र के नेहड़ान गांव में सुरक्षा एजेंसियों की स्पेशल टीम ने धावा बोला। संदिग्ध झबराराम पुत्र भानाराम मेघवाल, जो पिछले चार वर्षों से गांव में ई-मित्र केंद्र चला रहा था, उसे उसके घर से ही हिरासत में लिया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, रात के अंधेरे में हुई इस कार्रवाई से पूरे गांव में हड़कंप मच गया ।

झबराराम पर ISI की एक पाकिस्तानी महिला हैंडलर से संपर्क कर भारतीय सेना की गतिविधियों, सीमा क्षेत्र की संवेदनशील जानकारियां और सरकारी योजनाओं से जुड़े दस्तावेज साझा करने का गंभीर आरोप है। ई-मित्र केंद्र के माध्यम से उसे सरकारी डेटाबेस तक आसान पहुंच मिली हुई थी, जिसका कथित दुरुपयोग किया गया । सीआईडी-इंटेलिजेंस की टीम ने उसे जयपुर ले जाकर पूछताछ शुरू की, जहां शुरुआती सुराग मिलने से बड़े नेटवर्क का अंदेशा जताया जा रहा है ।

पाकिस्तानी महिला हैंडलर का हनीट्रैप कनेक्शन: सोशल मीडिया से शुरू हुई साजिश

जांच में सामने आया कि झबराराम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए पाकिस्तानी महिला हैंडलर के संपर्क में आया। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, यह हनीट्रैप का क्लासिक मामला हो सकता है, जहां मोहपाश में फंसाकर संवेदनशील जानकारी निकाली गई। कोडवर्ड्स, एन्क्रिप्टेड ऐप्स और गुप्त चैट्स के जरिए संपर्क बनाए रखा जाता था ।

पाकिस्तानी हैंडलर ने कथित तौर पर झबराराम को पैसे का लालच या भावनात्मक दबाव देकर भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल किया। जैसलमेर जैसे रणनीतिक बॉर्डर इलाके में रहने से उसे सेना की पेट्रोलिंग, बॉर्डर मूवमेंट और स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था की डिटेल्स आसानी से मिल जाती थीं। यह मामला राजस्थान-पाकिस्तान सीमा पर ISI की घुसपैठ की नई रणनीति को उजागर करता है ।
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जब्त डिवाइसेस से मिले अहम क्लू: फॉरेंसिक जांच में बड़े खुलासे की उम्मीद

सुरक्षा बलों ने झबराराम के मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जब्त कर लिए हैं। इनमें ISI से जुड़े ऐप्स, संदिग्ध फाइल्स, चैट हिस्ट्री और जियोलोकेशन डेटा मिला है। फॉरेंसिक लैब में डेटा रिकवरी और एनालिसिस चल रहा है, जो पूरे जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश कर सकता है ।

शुरुआती पूछताछ में झबराराम ने कई महत्वपूर्ण सुराग दिए हैं, जिनसे अन्य संदिग्धों का पता लग सकता है। जांचकर्ता यह तय करने की कोशिश कर रहे हैं कि जानकारी पैसे के बदले दी गई या दबाव में। ई-मित्र केंद्रों की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए अब पूरे राजस्थान में ऐसे सेंटर्स की स्क्रीनिंग तेज हो गई है ।

जैसलमेर का रणनीतिक महत्व: 1000 किमी लंबी पाक सीमा पर खतरे की घंटी

राजस्थान पाकिस्तान के साथ 1070 किलोमीटर से अधिक लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है, जिसमें जैसलमेर सबसे संवेदनशील हिस्सा है। यहां थार मरुस्थल, सम घास के मैदान और रणनीतिक सैन्य ठिकाने हैं। ISI अक्सर स्थानीय लोगों को भेदभावपूर्ण तरीके से भर्ती करती है ।

पिछले वर्षों में राजस्थान में कई जासूसी मामले पकड़े गए हैं, जैसे बारमेर और बीकानेर में ड्रोन स्पाईंग और हनीट्रैप स्कैंडल। यह नवीनतम घटना गणतंत्र दिवस पर सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता को रेखांकित करती है। केंद्र और राज्य सरकारें अब बॉर्डर सिक्योरिटी बढ़ाने पर जोर दे रही हैं ।

सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता: जासूसी नेटवर्क तोड़ने की मुहिम तेज

इस गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। सीआईडी, इंटेलिजेंस ब्यूरो और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने खुफिया इनपुट्स के आधार पर ऑपरेशन चलाया। अब नेहड़ान गांव और आसपास के इलाकों में छापेमारी बढ़ा दी गई है ।

अधिकारियों ने आधिकारिक बयान जारी नहीं किया, लेकिन सूत्र बताते हैं कि पूछताछ में झबराराम के अन्य कनेक्शन्स सामने आ रहे हैं। ISI के डिजिटल जासूसी नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए साइबर फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स लगाए गए हैं। यह मामला पूरे देश के लिए सतर्कता का संदेश है ।

ई-मित्र सेंटर्स पर नया खतरा: सरकारी डेटा की सुरक्षा पर सवाल

ई-मित्र केंद्र सरकारी योजनाओं जैसे आधार, पैन, राशन कार्ड और अन्य सेवाओं का हब हैं। इनके जरिए लाखों नागरिकों का डेटा एक्सेस होता है। झबराराम केस से साफ है कि ऐसे केंद्र जासूसी के लिए सॉफ्ट टारगेट बन सकते हैं ।

सरकार अब सभी ई-मित्र ऑपरेटर्स की बैकग्राउंड चेकिंग और साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग अनिवार्य करने पर विचार कर रही है। केंद्र सरकार ने भी डिजिटल इंडिया पहल के तहत सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं। यह घटना साइबर जासूसी के बढ़ते खतरों को उजागर करती है ।

राजस्थान में ISI जासूसी के पिछले मामले: एक नजर

राजस्थान बॉर्डर पर ISI की सक्रियता पुरानी है। 2024 में बारमेर में एक किसान को हनीट्रैप में फंसाकर जासूसी के लिए इस्तेमाल किया गया। 2025 में बीकानेर से ड्रोन के जरिए स्पाईंग का केस पकड़ा गया। जैसलमेर केस इनकी कड़ी लगता है ।

मामलास्थानआरोपीतरीकासाल
ड्रोन स्पाईंगबीकानेरअज्ञातड्रोन2025 
हनीट्रैप किसानबारमेरकिसानसोशल मीडिया2024 
ई-मित्र जासूसजैसलमेरझबरारामहैंडलर संपर्क2026 
सोशल मीडिया स्पाईजोधपुरयुवकऐप्स2023 

गणतंत्र दिवस सुरक्षा के बीच बड़ा अलर्ट: बॉर्डर पर सतर्कता बरकरार

26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस मनाते हुए देश भर में सिक्योरिटी हाई अलर्ट पर थी। जैसलमेर जैसी संवेदनशील जगहों पर ड्रोन सर्विलांस, क्विक रिएक्शन टीम्स और इंटेलिजेंस ग्रिड सक्रिय थे। इस गिरफ्तारी ने संभावित साजिश को विफल कर दिया ।

वर्तमान में (27 जनवरी 2026) पूछताछ जारी है। झबराराम के बयानों से नया नेटवर्क उजागर हो सकता है। केंद्र सरकार ने राजस्थान को अतिरिक्त फंडिंग दी है बॉर्डर फेंसिंग और स्मार्ट सर्विलांस के लिए ।

भविष्य की चुनौतियां: डिजिटल जासूसी से कैसे बचें?

आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया और ऐप्स ISI जैसे संगठनों के हथियार बन गए हैं। आम नागरिकों को सतर्क रहना होगा- अज्ञात संपर्कों से बचें, संवेदनशील जानकारी शेयर न करें। सरकार साइबर अवेयरनेस कैंपेन चला रही है ।

ई-मित्र जैसे केंद्रों के लिए दो-स्तरीय वेरिफिकेशन और CCTV अनिवार्य होना चाहिए। सेना और IB मिलकर ISI के डिजिटल नेटवर्क को ट्रैक कर रही हैं। यह केस देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने का अवसर है ।

जनता की प्रतिक्रिया: नेहड़ान गांव में डर का माहौल

स्थानीय लोग स्तब्ध हैं। “हमारा पड़ोसी ऐसा कैसे कर सकता है?” गांववाले सवाल उठा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने गांव में मीटिंग की और जागरूकता फैलाई। सोशल मीडिया पर #JaisalmerSpyCase ट्रेंड कर रहा है ।

राजस्थान पुलिस ने हेल्पलाइन जारी की है- संदिग्ध गतिविधि देखें तो 100 पर कॉल करें। यह घटना राष्ट्रवाद की भावना को जगाती है।

सतर्क भारत, सुरक्षित भारत

जैसलमेर ISI जासूसी मामला सुरक्षा एजेंसियों की सजगता का प्रमाण है। झबराराम मेघवाल केस से साफ है कि दुश्मन आंतरिक कमजोरियों का फायदा उठाते हैं। देशवासियों से अपील है- सावधान रहें, देशहित सर्वोपरि ।
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