खेसारी लाल यादवने बिहार विधानसभाचुनाव प्रचार के दौरान पावर स्टार पवन सिंहको ‘नचनिया’ कहकर संबोधित किया था, जिससे विवाद पैदा हो गया। पवन सिंह ने इस मामले में कहा है कि भोजपुरी और हिंदी जैसी भाषाओं में कई शब्दों के डबल मीनिंग हो सकते हैं

इसलिए अगर किसी का जुबान फिसल भी गया हो तो इस पर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘नचनिया’कोई अपमानजनक शब्द नहीं है,

क्योंकि भगवान शिव भी नृत्य करते थे, जिन्हें नचनिया कहा जाए तो क्या कहेंगे। पवन सिंह ने खेसारी लाल के प्रति शुभकामनाएं भी दीं और कहा कि उनके लिए रिश्ता और पार्टी के आदेश दोनों महत्वपूर्ण हैं।

ज्योति सिंह की नाराजगी

वहीं, पवन सिंहकी पत्नी ज्योति सिंह ने इस बात पर नाराजगी जताई और कहा कि ‘नचनिया’ जैसे शब्दों से किसी को संबोधित करना सही नहीं है, क्योंकि हर इंसान मेहनत करके आगे बढ़ता है। उन्होंने खेसारी लाल यादव से कलाकारों का सम्मान करने की अपील की है।

इस विवाद ने भोजपुरी इंडस्ट्रीमें राजनीतिक और व्यक्तिगत विमर्श को तेज कर दिया है, जहां दोनों तरफ के समर्थक अलग-अलग रुख अपनाए हुए हैं। इस घटना ने बिहार विधानसभा चुनावों के प्रचार माहौल को और भी गरमाया है।
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विचारधाराएं अलग-अलग

पवन सिंह ने खेसारी लाल यादवपर ताज़ा बयान देते हुए कहा है कि उनकी और खेसारी की विचारधाराएं अलग हैं

क्योंकि उनका समर्थन NDAके साथ है जबकि खेसारी की अलग है। उन्होंने कहा कि बिहार अब बदल चुका है और विकास हुआ है, जो पहले नहीं था।

पवन सिंह ने खेसारी के “जंगल राज” वाले बयान का जवाब देते हुए कहा कि अब विकास ही विकास है और जनता इस बदलाव को समझती है।

पार्टी के आदेश को सर्वोपरि

पवन सिंह ने रिश्तों को लेकर कहा कि अगर किसी से खटपट होती है, तो इंसान को इतना रखना चाहिए कि जब दोबारा बात हो,

तो नजरें मिला सके। उन्होंने अपने और खेसारीके टूटते भाईचारे को भी इशारों में समझाया।

इसके अलावा, पवन सिंह ने पार्टी के आदेश को सर्वोपरि बताया और कहा कि जो भी पार्टी कहेगा, वह करेगा, लेकिन खेसारी के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

बिहार का विकास सर्वोपरि

पवन सिंह ने कहा कि बिहारी होना गर्व की बात है और वह बिहार से गर्व से हैं। चुनाव प्रचार में वह सक्रिय हैं और उन्होंने बिहार के विकास को लेकर विश्वास जताया कि लोग पुराने दौर की तुलना में अब बेहतर स्थिति चाहते हैं।

इस बयान से साफ होता है कि पवन सिंह और खेसारी लाल यादव के बीच व्यक्तिगत और राजनीतिक मतभेद स्पष्ट हैं, लेकिन पवन सिंह संवाद और सम्मान की भाषा भी बनाए रखना चाहते हैं।

यह पूरा मामला भोजपूरी सिनेमा, राजनीति और व्यक्तिगत रिश्तों के बीच के जटिल रिश्ते को दर्शाता है, जिसमें भाषा के प्रयोग और उसके सामाजिक प्रभाव पर भी सवाल उठे हैं।​​

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