देशभर में हाल के वर्षों में बच्चों में किडनी से जुड़ी बीमारियों (Kidney Diseases in Children) के मामले बढ़े हैं। एम्स और पीजीआई जैसे प्रमुख संस्थानों में हर महीने किडनी इंफेक्शन, नेफ्रोटिक सिंड्रोम और एक्यूट किडनी इंजरी के कई केस दर्ज किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर मामलों में यह समस्या माता-पिता की लापरवाही या शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने से गंभीर रूप ले लेती है।

डॉक्टरों की चेतावनी—लाइफस्टाइल बन रही सबसे बड़ा कारक

बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों की बिगड़ती लाइफस्टाइल, असंतुलित डाइट, जंक फूड, और पर्याप्त पानी न पीना किडनी पर सीधा असर डाल रहे हैं। मोबाइल गेम्स और स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चों की शारीरिक गतिविधि घट गई है, जिससे उनके शरीर में टॉक्सिन्स समय पर बाहर नहीं निकल पाते। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चे दिनभर में कम से कम 7-8 गिलास पानी जरूर पिएं और घर का बना हेल्दी खाना खाएं।

किडनी डैमेज के शुरुआती लक्षणों को पहचानें

अगर आपके बच्चे में ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें:

  • चेहरे, पैरों या आंखों के आसपास सूजन आना।
  • बार-बार पेशाब लगना या पेशाब में जलन।
  • लगातार थकान, कमजोरी या नींद में परेशानी।
  • भूख में कमी या उल्टी जैसा महसूस होना।
  • त्वचा का पीला या सूखा दिखना।

विशेषज्ञों के मुताबिक, ये संकेत शरीर के भीतर किडनी संबंधी बदलावों की ओर इशारा करते हैं। बच्चों की जांच में देरी करने से किडनी का फ़ंक्शन तेजी से गिर सकता है।

गंभीर मामलों में डायलिसिस तक पहुंचती है स्थिति

डॉक्टर बताते हैं कि अगर बीमारी लंबी चली जाए और किडनी का लगभग 80-90% हिस्सा खराब हो जाए, तो बच्चे को डायलिसिस या ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसा न केवल शारीरिक, बल्कि आर्थिक और मानसिक रूप से पूरे परिवार के लिए चुनौती बन जाता है। इसलिए प्रारंभिक जांच और रोकथाम ही सबसे बड़ा बचाव है।

किन बीमारियों से बढ़ता है किडनी खराब होने का रिस्क

  • बार-बार होने वाला यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI)
  • डिहाइड्रेशन, यानी शरीर में पानी की कमी।
  • जेनेटिक कारण या जन्म से मौजूद किडनी डिसऑर्डर।
  • अनकंट्रोल्ड ब्लड प्रेशर या डायबिटीज (बड़े बच्चों में)।
  • दवाओं का अत्यधिक सेवन, खासकर एंटीबायोटिक्स का ज़रूरत से ज़्यादा उपयोग।

विशेषज्ञों की सलाह: रोकथाम ही बेहतर इलाज

  • बच्चों को रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं।
  • डाइट में ताजे फल, हरी सब्जियां, और कम नमक वाला भोजन शामिल करें।
  • जंक फूड, सॉफ्ट ड्रिंक्स और पैकेज्ड स्नैक्स से परहेज कराएं।
  • खेल-कूद और आउटडोर गतिविधियों को प्रोत्साहित करें।
  • हर छह महीने में सामान्य हेल्थ चेकअप करवाएं ताकि किसी बदलाव को समय रहते पकड़ा जा सके।

माता-पिता की ज़िम्मेदारी है जागरूक रहना

डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों का शरीर बदलावों को जल्दी दिखाता है, इसलिए माता-पिता को सतर्क रहना चाहिए। बच्चे की शिकायतों को नजरअंदाज न करें, बल्कि तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ या नेफ्रोलॉजिस्ट से सलाह लें। जितनी जल्दी समस्या की पहचान होगी, उतनी जल्दी और आसानी से उसका इलाज संभव है।

लाइफस्टाइल अलर्ट

बच्चों में किडनी से जुड़ी बीमारियां अब एक उभरती स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी हैं। यह सिर्फ बीमारी नहीं बल्कि एक लाइफस्टाइल अलर्ट है जो बताता है कि हमें अपने बच्चों की दिनचर्या, खानपान और हाइड्रेशन पर ज्यादा ध्यान देना होगा। समय पर सतर्कता और सही सलाह से किडनी डैमेज जैसी गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।

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