17 दिसंबर 2025, बुधवार को साल का आखिरी प्रदोष व्रत मनाया जा रहा है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को प्रसन्न करने वाला एक अत्यंत शुभ दिन माना जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में शिव की आराधना करने से सभी प्रकार के दुखों और कष्टों का अंत होता है।

प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, प्रदोष व्रत का पूजन काल सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले से लेकर सूर्यास्त के 1 घंटे बाद तक शुभ रहता है। इस बार प्रदोष काल शाम 5:32 बजे से लेकर 7:32 बजे तक रहेगा। इसी समय भगवान शिव की पूजा, रुद्राभिषेक और दीप दान करना विशेष फलदायी माना गया है।

पूजन विधि

प्रदोष व्रत के दिन भक्त दिनभर उपवास रखते हैं और संध्या बेला में भगवान शिव के सामने गाय के दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक करते हैं। इसके बाद धूप-दीप जलाकर शिव चालीसा या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। व्रत के अंत में शिवजी को फल और बेलपत्र चढ़ाकर आरती की जाती है।

प्रदोष व्रत की कथा

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, एक बार चंद्रमा को क्षय रोग हो गया था। तब उन्होंने भगवान शिव की उपासना करते हुए प्रदोष व्रत रखा, जिससे वे अपने रोग से मुक्त हो गए। तभी से यह व्रत शिवभक्तों के लिए कल्याणकारी और मोक्षदायक माना जाता है।

प्रदोष व्रत का महत्व

शिव पुराण में प्रदोष व्रत को सभी व्रतों में सर्वोत्तम कहा गया है। यह व्रत न केवल पापों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि मनोकामनाओं की सिद्धि भी करता है। धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में शिवपूजा करने से व्यक्ति को जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।

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