लखनऊ के रहने वाले शलभ, एक मध्यमवर्गीय व्यवसायी, कभी सोच भी नहीं सकते थे कि सोशल मीडिया की एक चैट उनकी जिंदगी बदल देगी। नवंबर 2024 में एक पॉपुलर डेटिंग ऐप पर ‘भाविका’ नाम की प्रोफाइल से उन्हें मैसेज आया।

प्रोफाइल फोटो में एक खूबसूरत लड़की की तस्वीरें थीं, जो दिल्ली की रहने वाली बताई गई। बातचीत आगे बढ़ी तो भाविका ने खुद को 28 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल बताया।

धीरे-धीरे चैट भावुक हो गई। शलभ ने बताया कि भाविका ने शादी का भ्रम पैदा किया और परिवारिक दबाव का हवाला देकर पैसे मांगे। पहले छोटी-मोटी रकम, फिर बड़े लेन-देन। कुल 1.92 करोड़ रुपये 14 महीनों में ऐंठ लिए गए। शलभ ने बैंक ट्रांसफर, UPI और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए भुगतान किया। ठगी का खुलासा तब हुआ जब भाविका ने अचानक संपर्क तोड़ दिया।

लखनऊ के हजरतगंज थाने में 10 जनवरी 2026 को शिकायत दर्ज हुई। FIR में IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी) और IT एक्ट 2000 की धाराओं के तहत केस दर्ज। पुलिस ने शलभ के बैंक स्टेटमेंट्स जब्त कर जांच शुरू की।

आरोपी गाजी की पहचान: फर्जी भाविका के पीछे मास्टरमाइंड

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि ‘भाविका’ असल में गाजी उर्फ गजेंद्र है, जो मेरठ का निवासी है। 32 वर्षीय गाजी साइबर क्राइम का पुराना खिलाड़ी है। उसके पास कई फर्जी प्रोफाइल्स हैं, जिनमें महिलाओं की एडिटेड फोटोज इस्तेमाल होते हैं। गाजी ने डार्क वेब से स्क्रिप्ट्स खरीदे थे, जो वॉइस चेंजर और वीडियो कॉल फेकिंग के लिए यूज होते हैं।

सूत्रों के अनुसार, गाजी ने शलभ को फंसाने के लिए AI टूल्स का सहारा लिया। वीडियो कॉल्स में डीपफेक वीडियो चलाए जाते थे, जहां भाविका की आवाज रोबोटिक सॉफ्टवेयर से जनरेट होती। ठगी की रकम गाजी के मल्टीपल बैंक अकाउंट्स में ट्रांसफर हुई, जिनमें से कुछ बेंगलुरु और मुंबई के नामी गिरामी लोगों के नाम पर खुले थे। पुलिस ने 5 खातों को फ्रीज कर दिया है।  यह भी पढ़ें:https://thedbnews.in/aiman-khan-saudi-arabia-death-starved-and-beaten-14-tola-gold-dowry/

गाजी का क्राइम रिकॉर्ड चेक करने पर पता चला कि वह 2023 में नोएडा में एक समान ठगी केस में आरोपी था, लेकिन जमानत पर बाहर था। अब लखनऊ STF (स्पेशल टास्क फोर्स) ने उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी।

ठगी की पूरी प्रक्रिया: स्टेप बाय स्टेप चालाकी

साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, गाजी ने स्टैंडर्ड स्कैम टेक्नीक अपनाई:

  1. प्रोफाइल क्रिएशन: स्टॉक इमेजेस और AI जनरेटेड फोटोज से आकर्षक प्रोफाइल।
  2. टारगेट सिलेक्शन: 35-50 आयु वर्ग के अकेले पुरुष, खासकर बिजनेसमैन।
  3. इमोशनल मैनिपुलेशन: 2-3 महीने चैटिंग से ट्रस्ट बिल्डिंग, फिर इमरजेंसी स्टोरीज (मां की बीमारी, बिजनेस लॉस)।
  4. पेमेंट ट्रिक्स: पहले 5-10 हजार, फिर लाखों। ‘रिटर्न प्रॉमिस’ देकर लालच।
  5. एक्जिट स्ट्रैटजी: रकम ऐंठने के बाद ब्लॉक और नया टारगेट।

शलभ केस में 1.92 करोड़ की ब्रेकडाउन: 50 लाख शादी एडवांस, 80 लाख बिजनेस इन्वेस्टमेंट, बाकी मेडिकल और ट्रैवल एक्सपेंसेज। कुल 45 ट्रांजेक्शन हुए।

लखनऊ पुलिस की तेज कार्रवाई: SIT गठित, डिजिटल ट्रेल पर फोकस

लखनऊ पुलिस कमिश्नर ने तुरंत SIT का गठन किया, जिसमें साइबर सेल के 10 अफसर शामिल। IP ट्रै킹 से गाजी का लोकेशन मेरठ-हापुड़ बेल्ट में पिनपॉइंट किया गया। पुलिस ने सर्विलांस के जरिए उसके 3 साथियों को भी चिह्नित किया।

UP पुलिस के DGP ने कहा, “साइबर ठगियां 300% बढ़ी हैं। हम AI टूल्स से मुकाबला कर रहे।” मामले में 2 दिन में 3 गिरफ्तारियां हो चुकीं। शलभ को 1 करोड़ रिकवर करने की उम्मीद। लखनऊ में पिछले 6 महीने में 150+ साइबर फ्रॉड केस दर्ज, जिनमें 20 करोड़ का नुकसान।

उत्तर प्रदेश में साइबर ठगी का बढ़ता ट्रेंड: आंकड़े और उदाहरण

UP साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों से साफ है कि 2025 में 5000+ केस दर्ज हुए, जिनमें 40% रोमांटिक स्कैम। लखनऊ, कानपुर, वाराणसी टॉप सिटी।

  • जनवरी 2025: नोएडा में 2 करोड़ की ठगी, बांग्लादेश गैंग।
  • जुलाई 2025: लखनऊ में 50 लाख का फर्जी जॉब स्कैम।
  • दिसंबर 2025: आगरा में ‘प्रिया’ बनकर 1.5 करोड़ ऐंठे।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) रिपोर्ट: भारत में सालाना 1 लाख साइबर फ्रॉड, UP नंबर 2 पर। ज्यादातर कांस्पिरेसी इंडिया-पाकिस्तान आधारित।

शलभ का दर्द: आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक आघात

शलभ ने बताया, “मैंने घर बेच दिया, बिजनेस बंद हो गया। भाविका ने कहा था कि वो मेरी जिंदगी बदल देगी।” परिवार टूटने की कगार पर। साइबर साइकोलॉजिस्ट्स कहते हैं, ऐसे स्कैम में 70% शिकार डिप्रेशन का शिकार होते हैं। शलभ अब काउंसलिंग ले रहे।

साइबर सुरक्षा टिप्स: ठगों से कैसे बचें?

पुलिस और एक्सपर्ट्स की सलाह:

  • वेरिफिकेशन: वीडियो कॉल पर बैकग्राउंड चेक, रिवर्स इमेज सर्च।
  • पेमेंट रूल: कभी अनजान को ट्रांसफर न करें। ‘गिफ्ट कार्ड’ स्कैम से सावधान।
  • ऐप सिक्योरिटी: टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू रखें।
  • रिपोर्टिंग: 1930 हेल्पलाइन या cybercrime.gov.in पर तुरंत शिकायत।
  • एजुकेशन: परिवार को साइबर लिटरेसी सिखाएं।

बैंकों ने अब AI अलर्ट सिस्टम लगाए हैं, जो संदिग्ध ट्रांजेक्शन रोकते हैं।

कानूनी प्रावधान और सजा: ठगों को कैद की सौगात

IT एक्ट की धारा 66C-D के तहत 7 साल की सजा और जुर्माना। IPC 420 में 10 साल तक कैद। UP में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए। गाजी जैसे आरोपी को सख्त सजा मिलेगी।

भविष्य की चुनौतियां: AI और डीपफेक से नया खतरा

एक्सपर्ट्स चेताते हैं कि 2026 में डीपफेक स्कैम 50% बढ़ेंगे। सरकार ने नेशनल साइबर कोऑर्डिनेशन सेंटर मजबूत किया। UP में 100 नई साइबर थाने खुलेंगे।

निष्कर्ष: सतर्क रहें, जागरूक बनें

लखनऊ शलभ ठगी मामला साइबर दुनिया की काली सच्चाई दिखाता है। 1.92 करोड़ का चूना न सिर्फ आर्थिक, बल्कि भावनात्मक धोखा है। पुलिस की कार्रवाई से न्याय मिलेगा, लेकिन रोकथाम ही असली हथियार। सोशल मीडिया यूजर्स सावधान रहें—हर ‘भाविका’ सच्ची नहीं होती। अपडेट्स के लिए बने रहें।
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