वर्ष 2026 का आगाज़ एक खास खगोलीय घटना से होने जा रहा है। जनवरी महीने की पूर्णिमा तिथि पर इस साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse 2026) लगेगा। चंद्र ग्रहण हमेशा से ही वैज्ञानिकों, ज्योतिषाचार्यों और आम लोगों के लिए खास महत्व रखता है।

इस बार यह ग्रहण और भी खास इसलिए रहेगा क्योंकि यह भारत में भी दिखाई देगा। खगोलशास्त्रियों के अनुसार, यह पूर्ण चंद्र ग्रहण कई देशों में देखा जा सकेगा, जिनमें भारत, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान शामिल हैं।

क्या होता है चंद्र ग्रहण?

वैज्ञानिक दृष्टि से बात करें तो जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तब चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ती है और चंद्र ग्रहण बनता है। यह घटना सामान्यत: वर्ष में दो से तीन बार होती है। इसे ‘लूनर एक्लिप्स’ कहा जाता है। जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आ जाता है तो उसे पूर्ण चंद्र ग्रहण कहते हैं, और जब उसका कुछ हिस्सा ही ढकता है तो उसे आंशिक चंद्र ग्रहण कहा जाता है।

2026 में कब लगेगा पहला चंद्र ग्रहण?

पंचांग के अनुसार, 2026 का पहला चंद्र ग्रहण जनवरी की पूर्णिमा को पड़ेगा। यह ग्रहण भारतीय समयानुसार शाम से मध्यरात्रि के बीच दिखाई देगा। अनुमान लगाया जा रहा है कि चंद्र ग्रहण करीब तीन घंटे तक चलेगा। इसका आरंभ शाम लगभग 6:00 बजे के आसपास और समापन रात 9:00 बजे के करीब हो सकता है।

पंडितों का कहना है कि चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण आरंभ होने से 9 घंटे पहले ही शुरू हो जाएगा, यानी इस बार सूतक काल सुबह से ही प्रभावी रहेगा। इस दौरान हर धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ, और मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।
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सूतक काल का अर्थ और महत्व

हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक अवधारणा है। यह वह समय होता है जब ग्रहण के प्रभाव के कारण वातावरण में अशुद्धता मानी जाती है। इसलिए इस काल में भगवान की मूर्ति को स्पर्श नहीं किया जाता, मंदिरों के द्वार बंद रखे जाते हैं, और पूजा-पाठ वर्जित रहती है।

सूतक काल के दौरान:

  • भोजन पकाना या खाना नहीं चाहिए।
  • नाखून या बाल नहीं काटने चाहिए।
  • गर्भवती महिलाओं को बाहर नहीं निकलना चाहिए।
  • पानी और भोजन को तुलसी पत्ता डालकर ढक देना चाहिए।

हालांकि, मंत्र जाप, ध्यान और प्रभु का नामस्मरण इस समय अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

ग्रहण के बाद क्या करें?

चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना और गायत्री मंत्र का जाप करने की परंपरा है। उसके बाद मंदिर में जाकर पूजा करें और जरूरतमंदों को दान दें। माना जाता है कि ऐसा करने से ग्रहण के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और शुभ फल प्राप्त होते हैं।

पंडितों के अनुसार, ग्रहण के बाद घर की सफाई करनी चाहिए और भोजन की नई तैयारी करनी चाहिए। पुराने भोजन को त्याग देना उचित है, क्योंकि ग्रहण के दौरान भोजन में नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होने की आशंका मानी जाती है।

चंद्र ग्रहण का धार्मिक दृष्टिकोण

भारतीय संस्कृति में चंद्र ग्रहण का उल्लेख पुराणों में भी मिलता है। कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर अमृत बांटा था, तब राहु-केतु नामक दानव ने धोखे से अमृत पी लिया। भगवान विष्णु ने तत्क्षण उसका सिर काट दिया, लेकिन वह अमर हो गया। तभी से राहु और केतु सूर्य और चंद्रमा को निगलते हैं, जिससे ग्रहण की स्थिति बनती है।

इसी कारण, ग्रहण को राहु-केतु का प्रभाव माना जाता है। धर्मग्रंथों के अनुसार, ग्रहण काल में शांति पाठ, महामृत्युंजय मंत्र और विष्णु सहस्रनाम के जाप से इस प्रभाव को कम किया जा सकता है।

चंद्र ग्रहण के ज्योतिषीय प्रभाव

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, चंद्र ग्रहण का असर 12 राशियों पर अलग-अलग पड़ता है। यह ग्रहण मिथुन और धनु राशि वालों के लिए विशेष रूप से प्रभावशाली माना जा रहा है। कुछ राशियों के लिए यह अध्यात्म और शांति का अवसर बन सकता है, जबकि कुछ के लिए मानसिक तनाव या निर्णयों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न कर सकता है।

  • मेष राशि: स्वास्थ्य का ध्यान रखें, क्रोध से बचें।
  • वृषभ राशि: आर्थिक निर्णय सोच-समझकर लें, नए निवेश टालें।
  • मिथुन राशि: आत्मचिंतन के लिए उपयुक्त समय, मानसिक शांति बनाए रखें।
  • कर्क राशि: परिजनों के साथ मतभेद हो सकते हैं, संयम से काम लें।
  • सिंह राशि: कार्य क्षेत्र में प्रगति, परंतु अधीनस्थों से सावधानी रखें।

बाकी राशियों के लिए यह ग्रहण सामान्य प्रभाव वाला रहेगा।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चंद्र ग्रहण

खगोलशास्त्र के अनुसार, चंद्र ग्रहण केवल पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा की सापेक्ष स्थिति में परिवर्तन के कारण होता है। इसका जीवन पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ता। विज्ञान के नज़रिए से यह एक सुंदर प्राकृतिक घटना है, जिसे सुरक्षित तरीक़े से देखा जा सकता है। वैज्ञानिक सलाह देते हैं कि चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखना हानिकारक नहीं होता, जबकि सूर्य ग्रहण में ऐसा करना नुकसानदायक होता है।

चंद्र ग्रहण को देखने के शौकीनों के लिए मौका

जो लोग खगोल विज्ञान या स्पेस साइंस में रुचि रखते हैं, उनके लिए यह एक अद्भुत अवसर है। इस बार का Lunar Eclipse 2026 भारत के कई हिस्सों में खुले आसमान से देखा जा सकेगा। देश के पूर्वोत्तर राज्यों — असम, मेघालय, नागालैंड और पश्चिम बंगाल में यह दृश्य और भी साफ़ दिखाई देगा। दिल्ली, मुंबई, जयपुर, चेन्नई और लखनऊ जैसे बड़े शहरों में भी यह ग्रहण देखा जा सकेगा।

भक्ति और विज्ञान के बीच संतुलन रखें

भारत जैसे देश में जहां आस्था और विज्ञान दोनों का अपना स्थान है, वहां चंद्र ग्रहण को संतुलित दृष्टि से देखने की आवश्यकता है। एक ओर यह धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी आध्यात्मिक घटना है, तो दूसरी ओर खगोल विज्ञान के लिए एक रोचक दृश्य भी है। असल मायने में यह प्रकृति के अद्भुत संतुलन को प्रदर्शित करती है।

आस्था और साधना का समय

वर्ष 2026 का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण न केवल खगोल विज्ञानियों और वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि यह हिंदू धर्मावलंबियों के लिए आस्था और साधना का समय भी रहेगा। सूतक काल में संयम और नियम का पालन करना शुभ रहेगा, जबकि ग्रहण के बाद दान, स्नान और ध्यान आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होंगे।https://thedbnews.in/women-should-give-up-these-5-habits-after-40-years-of-age-risk-of-kidney-failure/

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