महाराष्ट्र के मालेगांव नगर निगम में मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। धुर विरोधी माने जाने वाली कांग्रेस और बीजेपी ने अप्रत्यक्ष रूप से हाथ मिला लिया है, जिसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय ISLAM पार्टी को सत्ता से दूर रखना और डिप्टी मेयर पद पर कब्जा जमाना है।

हालिया निकाय चुनावों में ISLAM पार्टी सबसे बड़ी बनी, लेकिन बहुमत न मिलने से सत्ता की जंग अब गठबंधनों पर आ गई है। यह घटनाक्रम मालेगांव मेयर चुनाव 2026, कांग्रेस बीजेपी गठबंधन मालेगांव और ISLAM पार्टी मालेगांव जैसे ट्रेंडिंग कीवर्ड्स को सर्च में टॉप पर ला रहा है।

मालेगांव चुनाव परिणाम 2026: संख्याबल का खेल

मालेगांव नगर निगम की 84 सीटों पर जनवरी 2026 में हुए चुनावों ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए। ISLAM पार्टी ने 35 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया, जबकि AIMIM को 21-26 सीटें मिलीं। शिवसेना (शिंदे गुट) के 18, समाजवादी पार्टी (सपा) के 5, कांग्रेस के 3 और बीजेपी के मात्र 2 पार्षद चुने गए। बहुमत के लिए 43 का जादुई आंकड़ा जरूरी होने से कोई भी दल अकेला सत्ता नहीं बना सका।

इस संख्याबल में ISLAM पार्टी को सपा के 5 पार्षदों का समर्थन मिलने से 40 तक पहुंचना आसान लग रहा था, लेकिन कांग्रेस-बीजेपी की चाल ने खेल पलट दिया। मेयर पद सामान्य वर्ग महिला के लिए आरक्षित होने से ISLAM की नसरीन शेख या इसी तरह की उम्मीदवार पर नजरें हैं। लॉटरी सिस्टम से महिला मेयर तय होने के बाद डिप्टी मेयर पर असली जंग छिड़ी है, जहां कांग्रेस-बीजेपी डिप्टी पद के लिए दबाव बना रहे हैं।

मालेगांव की 78% मुस्लिम आबादी ने पारंपरिक दलों को नकार दिया। बीजेपी-कांग्रेस का डबल नुकसान हुआ, जबकि शिवसेना शिंदे गुट ने 18 सीटों से बाजी मारी। यह परिणाम महाराष्ट्र लोकल बॉडी इलेक्शन 2026 के तहत मुस्लिम वोटिंग पैटर्न में बदलाव का संकेत देता है।​

कांग्रेस-बीजेपी गठबंधन कैसे बना? भारत विकास आघाड़ी की कहानी

सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब कांग्रेस के 3 और बीजेपी के 2 पार्षदों ने ‘भारत विकास आघाड़ी’ नामक नया मोर्चा बना लिया। कांग्रेस पार्षद एजाज बेग को इसका अध्यक्ष बनाया गया, जो रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। न्यूनतम 5 सदस्यों की शर्त पूरी करने के लिए यह गठबंधन जरूरी था।

जानकारों के मुताबिक, यह गठबंधन ISLAM पार्टी को मेयर बनाने से रोकने और डिप्टी मेयर पर कब्जा करने की रणनीति है। एजाज बेग ने कहा, “शहर के विकास के लिए पार्टियां मतभेद भूल गईं।” लेकिन सियासी विश्लेषक इसे AIMIM और ISLAM को काउंटर करने की चाल बताते हैं। उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र सियासत में बदलाव के बीच यह गठबंधन और भी चर्चा में है।

पिछले दिनों ISLAM ने AIMIM को पछाड़ दिया। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी सेक्युलर फ्रंट के साथ गठजोड़ की कोशिश में नाकाम रही, अब शिवसेना पर नजर है। लेकिन कांग्रेस-बीजेपी की एंट्री ने सस्पेंस बढ़ा दिया। चुनाव 8-12 दिनों में विशेष बैठक में होंगे।

ISLAM पार्टी कौन? मालेगांव में नई ताकत

ISLAM पार्टी का उदय मालेगांव की राजनीति का नया अध्याय है। 2024 में पूर्व कांग्रेस विधायक शेख आसिफ ने इसका गठन किया। मुस्लिम संघर्षों से जन्मी यह पार्टी लोकल मुद्दों पर फोकस करती है। 35 सीटें जीतकर यह सबसे बड़ी बनी, जो मुस्लिम वोट बैंक के विभाजन को दिखाता है।

पार्टी के गुटनेता खालिद शेख हैं, जबकि सपा से मुस्तकीम डिजेठे। AIMIM के 21-26 पार्षद विपक्ष की भूमिका निभा सकते हैं। मालेगांव जैसे मुस्लिम बहुल शहर में यह प्रयोगशाला बनी, जहां महायुति (बीजेपी-शिवसेना) और MVA (कांग्रेस-NCP) दोनों असफल रहे। क्या यह महाराष्ट्र आने वाले विधानसभा चुनावों का संकेत है?​

डिप्टी मेयर पद पर सियासी खींचतान

मुख्य जंग डिप्टी मेयर पर है। ISLAM को मेयर मिलने के बाद यह पद महत्वपूर्ण हो जाता है। कांग्रेस-बीजेपी गठबंधन इसे हथियाने की कोशिश में है, जबकि शिवसेना भी दावा ठोंक रही। AIMIM ने BJP-शिवसेना से दूरी का ऐलान किया।

शिवसेना को डिप्टी मेयर देकर समर्थन लेने की चर्चा है। शिक्षा मंत्री दादा भुसे के प्रभाव से विकास कार्यों में मदद की उम्मीद। लेकिन भारत विकास आघाड़ी की मजबूती से ISLAM को झटका लग सकता है।

मालेगांव की राजनीतिक पृष्ठभूमि

मालेगांव, नासिक जिले का यह शहर कपड़ा उद्योग के लिए जाना जाता है। 78% मुस्लिम आबादी के कारण हमेशा संवेदनशील रहा। 2006-08 बम धमाकों ने इसे सुर्खियों में लाया। पारंपरिक रूप से कांग्रेस का गढ़, लेकिन ISLAM-AIMIM ने वोट बांट दिया।

निकाय चुनावों में OTH (अन्य) ने 29-61 वार्डों में बढ़त बनाई। शिवसेना शिंदे गुट के 18 पार्षदों ने सरप्राइज दिया। यह परिणाम महाराष्ट्र म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन इलेक्शन 2026 का हिस्सा है, जहां मुंबई-ठाणे में महायुति जीती।

भविष्य की संभावनाएं: कौन बनेगा मेयर?

विशेष बैठक में मेयर चुनाव तय करेगा। यदि ISLAM-सपा साथ रहे, तो नसरीन शेख मेयर बन सकती हैं। लेकिन कांग्रेस-बीजेपी गठबंधन और शिवसेना के समर्थन से ट्विस्ट संभव। AIMIM मुख्य विपक्ष बनेगी।

मालेगांववासी विकास की उम्मीद लगाए हैं। सियासी गठबंधन टिकेंगे या टूटेंगे, यह समय बताएगा। यह घटना मुस्लिम राजनीति में नई धारा का सूचना देती है।

महाराष्ट्र सियासत पर असर

मालेगांव का ड्रामा पूरे राज्य पर असर डालेगा। उपमुख्यमंत्री अजित पवार हादसे के बाद बदलते समीकरणों में यह महत्वपूर्ण। मुस्लिम वोटिंग पैटर्न बदलाव 2029 विधानसभा चुनावों को प्रभावित करेगा। BJP-कांग्रेस गठबंधन दुर्लभ है, जो लोकल राजनीति की अनिश्चितता दिखाता।​​

नागरिकों को साफ-सुथरी सत्ता चाहिए। क्या ISLAM अपना वादा निभाएगी या गठबंधन की भंवर में सब बह जाएगा? मालेगांव मेयर चुनाव लाइव अपडेट्स पर नजरें।
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