‘”हर धर्म का सम्मान”: दुर्गा आंगन विवाद पर ममता बनर्जी की इफ्तार पार्टी वाली सफाई’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को विपक्षी दलों और धार्मिक संगठनों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर “दुर्गा आंगन” परियोजना को लेकर गलतफहमी फैला रहे हैं और समाज में नफरत पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। ममता बनर्जी ने सवाल उठाया, “अगर मैं इफ्तार पार्टी में जाती हूं तो उसमें क्या गलत है? मैंने हमेशा हर धर्म और हर त्यौहार का सम्मान किया है।”

क्या है ‘दुर्गा आंगन’ परियोजना?
राज्य सरकार ने हाल ही में कोलकाता और बंगाल के कई जिलों में ‘दुर्गा आंगन’ परियोजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत स्थानीय स्तर पर छोटी दुर्गा प्रतिमाओं और पारंपरिक पूजा स्थलों को विकसित किया जा रहा है ताकि राज्य की सांस्कृतिक पहचान संरक्षित रह सके।
सरकार का दावा है कि इस योजना से स्थानीय कारीगरों, मूर्तिकारों और महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक मज़बूती मिलेगी। परियोजना का संचालन कोलकाता नगर निगम और राज्य के शहरी विकास विभाग के सहयोग से हो रहा है।
विरोधियों ने उठाए सवाल
विपक्षी दलों — खासकर भाजपा और सीपीएम — ने इस पहल पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि ‘दुर्गा आंगन’ जैसी योजनाओं को ममता बनर्जी धार्मिक राजनीति के माध्यम से अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही हैं। भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “ममता सरकार एक तरफ धर्मनिरपेक्षता की बात करती है, और दूसरी तरफ हिंदू भावनाओं का राजनैतिक उपयोग करती है।”
ममता बनर्जी ने विपक्ष पर लगाया नफरत फैलाने का आरोप
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका मकसद किसी धर्म विशेष को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि बंगाल की संस्कृति और एकता को मजबूत करना है। उन्होंने कहा, “बंगाल की ताकत उसकी विविधता में है। मैं दुर्गापूजा में जाती हूं, और इफ्तार में भी शामिल होती हूं — क्योंकि सभी धर्मों का आदर करना मेरी जिम्मेदारी है। कुछ लोग इस एकता को तोड़ना चाहते हैं, लेकिन वे सफल नहीं होंगे।”
धार्मिक सौहार्द की मिसाल देने की कोशिश
ममता ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने सभी त्यौहारों — चाहे वह ईद हो, दुर्गापूजा, छठ पूजा या क्रिसमस — के लिए बराबर सुविधाएँ और सुरक्षा व्यवस्थाएँ दी हैं। पिछले कुछ सालों में राज्य सरकार ने पूजा समितियों के लिए ग्रांट भी जारी की है ताकि त्योहारों के आयोजन में किसी को दिक्कत न हो।
सोशल मीडिया और जनता की प्रतिक्रिया
ममता बनर्जी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई। कुछ नागरिकों ने मुख्यमंत्री के रुख की सराहना करते हुए कहा कि “धर्मनिरपेक्षता बनाए रखना आज की जरूरत है।” वहीं, अन्य लोगों ने इस बयान को “राजनीतिक रणनीति” बताया।
ट्विटर (X) और फेसबुक पर #MamtaBanerjee तथा #DurgaAngan जैसे हैशटैग ट्रेंड करते रहे। कुछ यूजर्स ने सरकार से यह सवाल भी किया कि क्या इस योजना में पारदर्शिता और जनता की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
बंगाल की राजनीति में एक और नया विवाद
राज्य में पहले से ही नागरिकता संशोधन कानून (CAA), राम नवमी हिंसा और दुर्गा पूजा विसर्जन जैसे मुद्दों पर राजनीतिक ध्रुवीकरण देखा जा चुका है। अब ‘दुर्गा आंगन’ परियोजना और ममता के बयान ने इस साल के अंत में फिर से राजनीति को गरमा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी पंचायत और लोकसभा चुनावों में भी गूंज सकता है।

