मायावती ने लखनऊ रैली में समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सत्ता में रहते हुए इन्हें PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की याद क्यों नहीं आई, जबकि सत्ता से बाहर होते ही ये इस फॉर्मूले की चर्चा करने लगते हैं.

मायावती का बयान और रैली का उद्देश्य

  • मायावती ने मंच से स्पष्ट रूप से कहा कि जब अखिलेश यादव सत्ता में होते हैं, तो न उन्हें कांशीराम याद आते हैं, न ही PDA. सत्ता से बाहर होते ही ये सभी चीज़ें याद आती हैं, यह सिर्फ वोट बैंक की राजनीति है.
  • उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों को घोर जातिवादी और दलित-विरोधी बताया, आरोप लगाया कि इन दलों ने कांशीराम और बाबा साहेब अम्बेडकर के आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की है.
  • मायावती ने सपा पर यह भी आरोप लगाया कि सपा सरकार ने पहले कासगंज जिले का नाम कांशीराम के नाम पर किया था, लेकिन बाद में उसका नाम बदल दिया.
  • कांशीराम की पुण्यतिथि पर आयोजित इतनी बड़ी रैली, बसपा के दलित-बैक और पिछड़ी जातियों के बीच समर्थन को पुनर्जीवित करने की रणनीति मानी जा रही है.

राजनैतिक संकेत और रणनीति

  • मायावती ने इस रैली में साफ कर दिया कि बसपा आगामी 2027 विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी और किसी गठबंधन के दबाव में नहीं आएगी.
  • उन्होंने भाजपा, सपा, और कांग्रेस को बसपा के पुनर्जागरण से असहज बताया, क्योंकि अगर बसपा का दलित और पिछड़ा आधार मजबूत होता है, तो यूपी की सियासी गणित बदल सकती है; खास तौर से सपा के PDA वोट बैंक पर इसका प्रभाव पड़ सकता है.
  • मायावती का निशाना वोट बैंक राजनीति पर ही है, जिससे वे दलित मतदाताओं को सपा और कांग्रेस से दूर करने की कोशिश कर रही हैं.

मायावती ने लखनऊ रैली में PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को कठोर आरोपों के घेरे में लिया। उनका आरोप है कि:

  • समाजवादी पार्टी PDA का नारा सिर्फ राजनीतिक स्वार्थ और वोट बैंक के लिए इस्तेमाल कर रही है, हकीकत में पिछले वर्षों की सत्ता में रहते हुए PDA वर्ग के लिए कुछ ठोस नहीं किया गया.
  • मायावती ने कहा कि सपा दलितों और मुस्लिमों का PDA की आड़ में शोषण करती है और केवल दिखावे की राजनीति करती है.
  • उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों ही पार्टियां—सपा और कांग्रेस—आंदोलन, कांशीराम व बाबा साहेब अम्बेडकर के नाम पर छलावा करती हैं और वास्तव में सामाजिक न्याय या दलित समाज के अधिकारों के लिए गंभीर नहीं हैं.
  • मायावती का कहना है कि सपा ने अपने फायदे के लिए PDA का फॉर्मूला प्रचारित किया है, लेकिन जब वे सत्ता में थे तो ऐसे वर्गों की उपेक्षा की.
  • उन्होंने जनता को आगाह किया कि PDA के नाम पर दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के वोट हासिल किए जा रहे हैं, परंतु उनके हितों की अनदेखी होती है.

मायावती का संदेश इस रैली में यह था कि PDA का असली हितैषी केवल बसपा है, जबकि अन्य दल सिर्फ राजनीति के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं.

निष्कर्ष

मायावती ने लखनऊ रैली में PDA मुद्दे पर सपा और कांग्रेस के दोहरे रवैये की आलोचना कर अपने समर्थकों को सपा-कांग्रेस से सतर्क रहने की सलाह दी और बहुजन समाज पार्टी को एकमात्र विकल्प बताया जो उनकी भलाई के लिए काम करेगी.

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