मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में दलित युवती के अपहरण और हत्या के प्रयास के सनसनीखेज कांड ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया है। मंगलवार को कोर्ट की सख्ती के बाद मुख्य आरोपी पारस सोम को जेल भेज दिया गया, जबकि पीड़ित युवती को सुरक्षित उसके परिजनों के हवाले कर दिया गया।

घटनास्थल पर भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बीच यह ड्रामा चला, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। मेरठ SSP डॉ. विपिन त्रिपाठी ने बताया कि पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट सामान्य है और परिवार को सुरक्षा का भरोसा दिया गया है। लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कैसे एक सामान्य विवाद इतना खतरनाक हो गया? इस 1500 शब्दों के विस्तृत रिपोर्ट में हम इस कांड की पूरी कहानी, पीड़िता का बयान, आरोपी का बैकग्राउंड, पुलिस जांच और राजनीतिक हलचल पर गहराई से नजर डालेंगे।

घटना का पूरा विवरण: कैसे शुरू हुआ मेरठ का खौफनाक ड्रामा

यह कांड मेरठ के ब्राह्मणपुरी थाना क्षेत्र के एक छोटे से मोहल्ले से शुरू हुआ। 22 वर्षीय दलित युवती, जिसका नाम पुलिस ने गोपनीय रखा है, स्थानीय पारस सोम के पड़ोस में रहती थी। सूत्रों के मुताबिक, दोनों के बीच पुराना विवाद था, जो सोशल मीडिया पर की गई आपत्तिजनक पोस्ट से भड़का। पारस सोम, 28 वर्षीय युवक जो एक प्राइवेट कंपनी में काम करता है, ने कथित तौर पर युवती को फोन पर धमकी दी। फिर 10 जनवरी की रात को अज्ञात बदमाशों ने युवती का अपहरण कर लिया।

परिजनों ने तुरंत थाने में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन शुरुआती दो दिनों में कोई कार्रवाई नहीं हुई। 12 जनवरी को युवती का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह घायल अवस्था में फरियाद कर रही थी। वीडियो में साफ दिखा कि उसके हाथ-पैर बंधे हैं और चेहरे पर चोट के निशान हैं। यह देखते ही सोशल मीडिया पर आग लग गई। #JusticeForMeerutGirl और #MeerutDalitAtrocity जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। युवती के भाई ने बताया, “बहन को पारस ने ही किडनैप करवाया। हम दलित हैं, इसलिए पुलिस ने पहले सुना नहीं।” पुलिस ने दावा किया कि CCTV फुटेज और तकनीकी निगरानी से आरोपी तक पहुंचे।
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घटना स्थल पर पहुंचे पत्रकारों ने देखा कि मोहल्ला पुलिस छावे में तब्दील हो गया। DRF (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व फोर्स) और PAC की टुकड़ियां तैनात रहीं। SSP ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमने 48 घंटे के अंदर पीड़िता को बरामद कर लिया। आरोपी पारस सोम गिरफ्तार है और पूछताछ जारी है।” लेकिन परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने दबाव में आरोपी को बचाने की कोशिश की।

पीड़िता का बयान: ‘पारस ने मुझे मारने की धमकी दी’

मेडिकल जांच के बाद दर्ज बयान में पीड़िता ने खुलासा किया कि पारस सोम ने उसे पहले फोन पर अपशब्द कहे। “वह कह रहा था कि मैं तेरी इज्जत ले लूंगा। फिर उसके दोस्तों ने मुझे अगवा किया,” उसने बताया। युवती ने कहा कि अपहरणकर्ताओं ने उसे एक सुनसान गोदाम में रखा, जहां हत्या की योजना बनाई गई। भागते वक्त वह घायल हुई। परिवार ने बताया कि युवती अब घर पर है, लेकिन मानसिक आघात से जूझ रही है। महिला हेल्पलाइन ने काउंसलिंग शुरू कर दी है।

यह मामला दलित महिलाओं पर अत्याचार का प्रतीक बन गया। NCRB डेटा के अनुसार, यूपी में 2025 में SC-ST महिलाओं पर अपराध के 15% केस मेरठ डिवीजन से हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे केसों में त्वरित न्याय जरूरी है, वरना भीड़ हिंसा भड़क सकती है।

आरोपी पारस सोम का बैकग्राउंड: सामान्य युवक या क्रिमिनल माइंड?

पारस सोम मेरठ के एक मध्यमवर्गीय परिवार से है। उसके पिता रिटायर्ड क्लर्क हैं। पड़ोसियों के मुताबिक, पारस शराबी और झगड़ालू है। उसके खिलाफ पहले भी दो छोटे मुकदमे दर्ज हैं – एक मारपीट का और एक छेड़खानी का। पुलिस ने उसके फोन रिकॉर्ड चेक किए, जिसमें युवती को 50 से ज्यादा धमकी भरे कॉल मिले। साथी आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश में 5 टीमें लगी हैं।

कोर्ट में पेशी के दौरान पारस ने कहा, “यह झगड़ा था, अपहरण नहीं।” लेकिन मजिस्ट्रेट ने सबूत देखते हुए 14 दिन की रिमांड दे दी। वकील ने दावा किया कि यह लव जिहाद का केस है, लेकिन पुलिस ने इसे खारिज कर दिया। पारस के दोस्तों ने बताया कि वह अक्सर सोशल मीडिया पर विवादास्पद पोस्ट करता था।

पुलिस जांच का अपडेट: CCTV, फोन रिकॉर्ड और फरार साथी

मेरठ पुलिस ने FIR IPC 364 (अपहरण), 307 (हत्या प्रयास), SC-ST एक्ट 3(2)(v) के तहत दर्ज की। SSP ने बताया कि 20 CCTV कैमरे खंगाले गए। अपहरण वाली कार बरामद हो गई, जिसमें खून के धब्बे मिले। फॉरेंसिक टीम जांच कर रही है। ड्रोन और थर्मल कैमरा से इलाके की तलाशी ली गई।

SP सिटी विनीत भटनागर ने कहा, “हमारे पास ठोस सबूत हैं। पारस का कन्फेशन वीडियो रिकॉर्ड है।” फरार आरोपियों में से एक का नाम संजय है, जो पारस का चचेरा भाई बताया जा रहा। पुलिस ने रेड अलर्ट जारी कर दिया। यूपी STF को भी सूचित किया गया है।

राजनीतिक बवाल: विपक्ष ने BJP पर हमला बोला

यह कांड राजनीतिक रंग ले चुका। SP नेता अखिलेश यादव ने ट्वीट किया, “मेरठ में दलित बेटी पर अत्याचार, योगी राज में कानून फेल!” BSP सुप्रीमो मायावती ने कहा, “SC-ST एक्ट को कमजोर किया जा रहा।” BJP ने पलटवार किया, “पुलिस ने रिकॉर्ड समय में न्याय किया। विपक्ष वोटबैंक कर रहा।”

DM ने शांति बैठक बुलाई। स्थानीय विधायक ने पीड़िता परिवार को 5 लाख मदद का ऐलान किया। लेकिन दलित संगठनों ने प्रदर्शन की चेतावनी दी।

मेरठ में दलित अत्याचार का इतिहास: आंकड़े जो झकझोर दें

मेरठ लंबे समय से जातीय हिंसा का केंद्र रहा। 2018 के थरूर कांड से लेकर हाल के कई केस हुए। 2025 में मेरठ में 120 SC-ST केस दर्ज। UP में कुल 25,000 ऐसे केस। विशेषज्ञ डॉ. राकेश पांडे कहते हैं, “शिक्षा और जागरूकता से ही रुकेगा।” NGO ‘दलित अधिकार मंच’ ने हेल्पलाइन शुरू की।

परिवार और समाज की प्रतिक्रिया: न्याय की उम्मीद

पीड़िता के पिता ने कहा, “हमें न्याय चाहिए, न कि पैसा।” मोहल्ले में शांति है, लेकिन डर का माहौल। महिलाओं ने सेल्फ डिफेंस कैंप लगाया। सोशल मीडिया पर 10 लाख से ज्यादा व्यूज हो चुके।

आगे की कार्रवाई: कोर्ट और पुलिस का प्लान

कोर्ट 20 जनवरी को अगली सुनवाई करेगा। CBI जांच की मांग उठ रही। SSP ने कहा, “सभी आरोपी पकड़े जाएंगे।” यूपी सरकार ने हाई लेवल मीटिंग बुलाई।

यह कांड न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। मेरठ फिर सुर्खियों में है, लेकिन उम्मीद है कि न्याय मिलेगा।
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