हापुड़ की मोनाड यूनिवर्सिटीके फर्जी डिग्री रैकेट मामले में उन्नाव के सरस्वती मेडिकल कॉलेज का भी नाम सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले की जांच के तहत मोनाड यूनिवर्सिटी सहित उन्नाव के इस मेडिकल कॉलेज में भी छापेमारी की है।

मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल पर भी एक्शन

ED का मानना है कि यहां के कुछ छात्रों की डिग्रियां और मार्कशीट फर्जी दस्तावेजों के जरिए जारी की गई थीं और साथ ही इसमें मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप है। ED ने उन्नाव के सरस्वती मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल अखिलेश मौर्या के कनेक्शन की भी जांच शुरू कर दी है।

इस घोटाले में मोनाड यूनिवर्सिटी नेटवर्क से जुड़े कई कॉलेज और शिक्षण संस्थान शामिल हैं, जिनमें मेडिकल, इंजीनियरिंग और MBA सहित अन्य पेशेवर डिग्रियां भी फर्जी तरीके से जारी की जा रही थीं। छात्रों में अपनी डिग्री की वैधता को लेकर बेचैनी भी बनी हुई है।

ED ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली के छापेमारी

मोनाड यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों के घर और अलग-अलग कार्यालय शामिल थे। यह जांच मनी लॉन्ड्रिंग के पैसों के स्रोत और निवेश के ठिकानों तक पहुंचने के लिए भी चल रही है। एसटीएफ ने इस फर्जी रैकेट का लगभग दो साल पहले भंडाफोड़ किया था, जिसमें यूनिवर्सिटी के प्रमुख व्यक्तियों समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। अब ED की कड़ी जांच से यह घोटाला और भी व्यापक रूप से सामने आ रहा है.

कड़ी जांच में उन्नाव मेडिकल कॉलेज भी फंसा

हापुड़ की मोनाड यूनिवर्सिटी के फर्जी डिग्री रैकेट में अब उन्नाव के सरस्वती मेडिकल कॉलेज का नाम भी उजागर हुआ है। उन छात्रों की डिग्रियां संदिग्ध मिलीं, जिन पर जांच चल रही है। ED की जांच में इस कॉलेज के प्रिंसिपल समेत प्रशासनिक तंत्र के संबंधिया भी सामने आए हैं।
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फर्जी डिग्रियों का व्यापक जाल

मोनाड यूनिवर्सिटी और इससे जुड़े कई कॉलेज फर्जी डिग्रियों और मार्कशीट्स के जाल में फंसे हुए हैं। इस नेटवर्क के जरिए मेडिकल, इंजीनियरिंग, एमबीए जैसी प्रोफेशनल डिग्रियां भी नकली तरीके से जारी की जा रही थीं।

मनी लॉन्ड्रिंग की जांच भी जारी

फर्जी दस्तावेज जारी करने के साथ-साथ मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की भी ED जांच कर रही है। लाखों-करोड़ों रुपये के मामले में पैसों के स्रोत और निवेश के ठिकानों की पड़ताल जारी है।

छात्रों में असुरक्षा और भरोसे की कमी

छात्र अपनी डिग्री की वैधता को लेकर चिंतित हैं और विश्वविद्यालय तथा संबंधित कॉलेज प्रबंधन पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

सरकार और कानून के सख्त कदम

एसटीएफ और ED की कार्रवाई से इस फर्जी रैकेट में शामिल लोगों पर कड़ी पकड़ साबित हो रही है। साथ ही यह शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी चेतावनी भी है।

यह मामला उत्तर प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र तथा संस्थागत पारदर्शिता के लिए बड़ा झटका है। जांच पूरी होने पर और भी खुलासे हो सकते हैं जो शिक्षा व्यवस्था सुधार की चुनौती को आगे बढ़ाएंगे।

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