उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रशासन की सख्त कार्रवाई से पहले ही स्थानीय लोगों और मस्जिद कमेटी ने बड़ा फैसला लेकर मदीना मस्जिद को अपने स्तर पर ध्वस्त कर दिया। यह मस्जिद कथित रूप से सरकारी जमीन पर बनाई गई थी, जिसे प्रशासन ने अतिक्रमण मानते हुए हटाने का आदेश जारी किया था।


4 जनवरी को तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में बुलडोजर एक्शन होना तय था, लेकिन उससे पहले ही शनिवार देर शाम कमेटी ने स्वेच्छा से हथौड़े उठाकर निर्माण को गिराने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

प्रशासन की ओर से जारी था नोटिस

स्थानीय प्रशासन को जानकारी मिली थी कि गांव सलेमपुर सालार में सरकारी जमीन पर मस्जिद का निर्माण किया गया है। तहसील स्तर पर जांच कराई गई तो पाया गया कि यह भूमि राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी संपत्ति के रूप में दर्ज है। इसके बाद ग्रामीणों और मस्जिद कमेटी को नोटिस जारी किया गया जिसमें सात दिनों के अंदर निर्माण हटाने के निर्देश दिए गए।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि निर्धारित समय तक अतिक्रमण नहीं हटाया जाता, तो सरकारी बुलडोजर कार्रवाई के तहत निर्माण तोड़ा जाएगा।

कार्रवाई से पहले कमेटी ने लिया समझदारी भरा कदम

नोटिस मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर मीटिंग बुलाई गई जिसमें मस्जिद कमेटी, गांव के बुजुर्ग और धर्मगुरु मौजूद रहे। विचार-विमर्श के बाद सभी ने यह निर्णय लिया कि प्रशासन से टकराव की स्थिति न बने और किसी तरह का विवाद न हो, इसलिए मस्जिद को स्वयं तोड़ दिया जाए।
शनिवार की शाम ग्रामीणों ने मिलकर हथौड़े और औजारों की मदद से मदीना मस्जिद की दीवारें गिरा दीं। इस दौरान कोई भी अप्रिय घटना नहीं हुई।

मौके पर मौजूद रहा प्रशासनिक अमला

सूत्रों के अनुसार, तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह अपनी टीम के साथ पास के इलाके में मौजूद थे ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे। स्थानीय पुलिस बल भी एहतियात के तौर पर मौके के आसपास गश्त कर रहा था। जब कमेटी ने खुद निर्माण हटाना शुरू किया, तो अधिकारियों ने कोई बल प्रयोग नहीं किया और शांतिपूर्ण माहौल में पूरी कार्रवाई संपन्न हुई।

प्रशासन का बयान — “कानून व्यवस्था प्राथमिकता”

तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि यह भूमि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज थी। लोगों को कानूनी रूप से जानकारी दी गई थी और नोटिस के बाद कार्रवाई तय थी। लेकिन मस्जिद कमेटी के सहयोग से यह मामला बिना किसी तनाव या विवाद के निपट गया।
उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य किसी धार्मिक स्थल को निशाना बनाना नहीं था, बल्कि सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराना था। सौभाग्य से कमेटी ने प्रशासन के आदेश का सम्मान करते हुए खुद ही निर्माण ढहा दिया।”

लोगों ने जताया राहत और संतोष

गांव में इस घटना के बाद किसी प्रकार की अशांति नहीं हुई। स्थानीय निवासी मोहम्मद आसिफ ने बताया, “हम नहीं चाहते थे कि गांव में पुलिस या बुलडोजर आएं। इसलिए हम लोगों ने खुद ही मस्जिद को हटाने का फैसला लिया। प्रशासन ने भी बहुत संयम दिखाया।”
कई ग्रामीणों ने कहा कि इस तरह के निर्णय से गांव में शांति बनी रहती है और किसी प्रकार का सांप्रदायिक तनाव नहीं फैलता।
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धार्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण से संतुलित कदम

स्थानीय उलेमाओं ने भी कहा कि धर्म को लेकर किसी प्रकार का कानून तोड़ना उचित नहीं। अगर किसी धार्मिक स्थल का निर्माण सरकारी भूमि या विवादित जमीन पर हुआ है, तो उसे हटाना ही सर्वोत्तम उपाय है ताकि भविष्य में कोई विवाद न खड़ा हो।
उन्होंने कहा कि प्रशासन और जनता, दोनों को ऐसे मामलों में एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए ताकि प्रदेश में कानून व्यवस्था मजबूत बनी रहे।

संभल में अतिक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे

संभल प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, जिले में पिछले छह महीनों में लगभग 120 से अधिक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा चुकी है। इनमें कई सरकारी भूमि, नालों और रोड किनारे बनाए गए अवैध निर्माण शामिल हैं।
सरकार की “अतिक्रमण मुक्त अभियान” के तहत लगातार टीमों को अलर्ट रखा गया है ताकि कोई भी व्यक्ति सरकारी या पंचायत जमीन पर अवैध निर्माण न कर सके।

सरकार का रुख — “कानून के सामने सब बराबर”

राज्य सरकार के निर्देशों के मुताबिक, भूमि अतिक्रमण को लेकर कोई भी भेदभाव नहीं किया जाता है। प्रशासनिक टीमों को यह स्पष्ट आदेश दिए गए हैं कि चाहे निर्माण धार्मिक हो या व्यावसायिक, यदि वह सरकारी रेकॉर्ड में अतिक्रमित भूमि पर है, तो उसे नियमानुसार हटाया जाए।
सलेमपुर सालार की घटना भी इसी नीति के अंतर्गत हुई। हालांकि विशेष बात यह रही कि इस बार स्थानीय समाज ने प्रशासन के साथ टकराव से बचते हुए शांति का मार्ग चुना।

सोशल मीडिया पर भी चर्चा

घटना के बाद सलेमपुर सालार का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गईं। कुछ लोगों ने कमेटी की समझदारी की सराहना की, तो कुछ ने इसे प्रशासनिक दबाव का परिणाम बताया।
हालांकि, अधिकतर टिप्पणियाँ शांति एवं सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने की अपील के साथ थीं।

प्रशासन ने की ग्रामीणों की सराहना

बाद में संभल के अधिकारियों ने बयान जारी कर कहा कि गांव के लोगों ने जिस संयम और सकारात्मक सोच के साथ प्रशासन का सहयोग किया, वह सराहनीय है। भविष्य में ऐसे उदाहरण सामाजिक एकता को मजबूत करेंगे।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि कोई धार्मिक स्थल वैध भूमि पर है, तो वह पूर्णतः सुरक्षित रहेगा, लेकिन जो संरचनाएँ सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनी हैं, उन्हें नियमानुसार हटाया जाएगा।

निष्कर्ष — कानून और सहयोग से समाधान

सलेमपुर सालार गांव की यह घटना इस बात का उदाहरण है कि जब जनता और प्रशासन साथ मिलकर काम करें, तो किसी भी संवेदनशील मामले को शांति से सुलझाया जा सकता है।
मस्जिद कमेटी का फैसला प्रशासन के लिए राहत लेकर आया और कानून-व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत हुआ। इस मामले ने यह संदेश दिया कि धर्म और प्रशासन के बीच संवाद व सहयोग से ही समाज में स्थायी शांति बनाई जा सकती है।
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