ईरान की राजधानी तेहरान में आज का दिन इतिहास में दर्ज हो चुका है। कुख्यात आतंकी इरफान सुल्तानी को व्यस्त आजादी चौराहे पर सार्वजनिक फांसी देने की तैयारी पूरी हो गई है। ईरानी अधिकारियों ने इसे “इस्लामिक गणराज्य के दुश्मनों के ताबूत में आखिरी कील” का नाम दिया है।

38 वर्षीय सुल्तानी पर इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए जासूसी, परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या और सैन्य ठिकानों पर हमलों की साजिश रचने के गंभीर आरोप हैं। यह घटना मध्य पूर्व के तनावपूर्ण हालात में ईरान की सख्ती का प्रतीक बनी हुई है। दुनिया भर की नजरें इस फांसी पर टिकी हैं, जो क्षेत्रीय संघर्ष को नई दिशा दे सकती है।

इरफान सुल्तानी का बैकग्राउंड: पाकिस्तान से ईरान तक का सफर

इरफान सुल्तानी का जन्म 1988 में पाकिस्तान के कराची में एक गरीब मुस्लिम परिवार में हुआ था। बचपन से ही वह कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित रहा। 2010 में वह ईरान पहुंचा, जहां उसने तेहरान यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की। लेकिन जल्द ही वह गुप्त रूप से मोसाद के संपर्क में आ गया। ईरानी जांच एजेंसी IRGC की रिपोर्ट के मुताबिक, सुल्तानी ने 2015 से सक्रिय जासूसी शुरू की।

उसके नेटवर्क में पाकिस्तानी, अफगानी और ईरानी नागरिक शामिल थे। सुल्तानी ने क्रिप्टोकरेंसी और डार्क वेब का इस्तेमाल कर इजरायल को संवेदनशील जानकारी बेची। ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर उसकी जासूसी सबसे खतरनाक बताई जा रही है। 2022 में उसने नतांज परमाणु प्लांट की ब्लूप्रिंट्स लीक कीं, जिससे इजरायल ने साइबर हमला किया। सुल्तानी की गिरफ्तारी पिछले साल अक्टूबर में तेहरान के एक गुप्त ठिकाने से हुई। पूछताछ में उसने 50 से ज्यादा ऑपरेशन्स कबूले।

सुल्तानी के अपराध: परमाणु वैज्ञानिकों से सैन्य हमलों तक

ईरानी अदालत ने सुल्तानी पर 12 गंभीर आरोप लगाए हैं। सबसे प्रमुख है 2020 में परमाणु वैज्ञानिक मोहसन फखरीजादेह की हत्या में उसकी भूमिका। सुल्तानी ने वैज्ञानिक के लोकेशन की जानकारी मोसाद को दी। इसी तरह, 2023 के इस्फहान एयरबेस हमले में ड्रोन हमले की साजिश रची। IRGC के अनुसार, सुल्तानी ने 200 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाए।

उसके अपराधों की लिस्ट लंबी है:

  • जासूसी नेटवर्क: 30 से ज्यादा एजेंट्स को भर्ती किया।
  • साइबर अटैक: ईरान के बैंकों और ऑयल रिफाइनरी पर हैकिंग।
  • हथियार तस्करी: इजरायल से ड्रोन पार्ट्स ईरान smuggle किए।
  • प्रोपगैंडा: सोशल मीडिया पर ईरान विरोधी कैंपेन चलाए।

ईरानी मीडिया ने सुल्तानी के कबूलनामे का वीडियो जारी किया, जिसमें वह रोते हुए माफी मांगता नजर आया। अदालत ने इसे “देशद्रोह का सबसे बड़ा मामला” करार दिया।
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चौराहे पर फांसी: ईरान की सजा प्रथा और सुरक्षा इंतजाम

ईरान में सार्वजनिक फांसी दुश्मनों को सबक सिखाने का पुराना तरीका है। आजादी चौराहा, जो तेहरान का सबसे व्यस्त इलाका है, चुना गया ताकि लाखों लोग गवाह बनें। सुबह 10 बजे से लाइव टेलीकास्ट शुरू हो चुका है। सुरक्षा के लिए 5000 पुलिसकर्मी तैनात हैं। सुल्तानी को काला हुड पहनाकर लाया जाएगा।

ईरानी कानून के तहत, जासूसी का सजा फांसी है। राष्ट्रपति एब्राहिम रईसी ने कहा, “ये सजा उन sionist ताकतों को चेतावनी है जो हमारी मिट्टी में सेंध लगाते हैं।” विपक्षी प्रदर्शनकारियों को घरों में नजरबंद किया गया है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी ने फांसी रोकने की अपील की, लेकिन ईरान ने इसे खारिज कर दिया।

वैश्विक प्रतिक्रिया: इजरायल चुप, पाकिस्तान भड़का

इस फांसी ने दुनिया को दो खेमों में बांट दिया। इजरायल सरकार ने कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन मोसाद के पूर्व चीफ ने इसे “ईरानी प्रोपगैंडा” कहा। प्रधानमंत्री नेतन्याहू की चुप्पी से अटकलें तेज हैं कि सुल्तानी असली एजेंट था।

पाकिस्तान ने कड़ी निंदा की। विदेश मंत्री ने कहा, “सुल्तानी हमारा नागरिक है, फांसी गैरकानूनी है।” इस्लामाबाद में ईरानी दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। अमेरिका ने “मानवाधिकार उल्लंघन” का हवाला देकर संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग की। यूरोपीय संघ ने ईरान पर नए प्रतिबंधों की धमकी दी।

दूसरी ओर, सऊदी अरब, UAE और बहरीन ने ईरान का साथ दिया। रूस और चीन ने इसे “आंतरिक मामला” बताया। भारत ने तटस्थ रुख अपनाते हुए दोनों पक्षों से संयम बरतने को कहा।

मध्य पूर्व संकट का इतिहास: ईरान-इजरायल शत्रुता की जड़ें

यह घटना 1979 की इस्लामिक क्रांति से चली आ रही दुश्मनी का हिस्सा है। इजरायल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खतरा मानता है। 2018 से अब तक 10 ईरानी वैज्ञानिक मारे गए। मोसाद के कथित ऑपरेशन्स में सुल्तानी का नाम प्रमुख है।

हालिया घटनाएं:

  1. 2024 सीरिया हमला: ईरानी दूतावास पर इजरायली हवाई हमला।
  2. लेबनान संघर्ष: हिजबुल्लाह को हथियार सप्लाई रोकी।
  3. यमन हूती: ईरान समर्थित हमलों पर इजरायल की जवाबी कार्रवाई।

विशेषज्ञ मानते हैं कि सुल्तानी की फांसी से मोसाद का ईरान नेटवर्क कमजोर होगा, लेकिन बदले की कार्रवाई हो सकती है।

सुल्तानी का परिवार और नेटवर्क: क्या होगा उनका भविष्य?

सुल्तानी की पाकिस्तानी पत्नी और दो बच्चे कराची में रहते हैं। ईरान ने उनके प्रत्यर्पण की मांग की है। उसके 15 साथी गिरफ्तार हो चुके हैं। IRGC ने नेटवर्क तोड़ने का दावा किया। पाकिस्तान में सुल्तानी के रिश्तेदारों को हिरासत में लिया गया।

ईरान की सैन्य ताकत: IRGC का रोल और भविष्य की रणनीति

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने सुल्तानी को पकड़ने में अहम भूमिका निभाई। 1.5 लाख सैनिकों वाली यह फोर्स मिसाइल, ड्रोन और साइबर युद्ध में माहिर है। ईरान के पास 3000 बैलिस्टिक मिसाइलें हैं। फांसी के बाद IRGC नई भर्तियों पर नजर रखेगा।

आर्थिक प्रभाव: तेल बाजार में उथल-पुथल

फांसी से तेल कीमतें 2% बढ़ीं। ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा। ईरान 4 मिलियन बैरल रोज तेल निर्यात करता है। प्रतिबंधों से उसकी अर्थव्यवस्था डगमगा रही है।

सोशल मीडिया पर बवाल: #IranExecution ट्रेंडिंग

ट्विटर (X) पर #IranExecution और #IrfanSultani हैशटैग ट्रेंड कर रहे। ईरानी यूजर्स समर्थन में पोस्ट कर रहे, जबकि पाकिस्तानी विरोध में। TikTok पर वीडियो वायरल हो रहे।

विशेषज्ञ विश्लेषण: क्या बदलेगी भू-राजनीति?

डेल्ही स्थित मिडिल ईस्ट एक्सपर्ट डॉ. राहुल सिंह कहते हैं, “ये फांसी प्रतीकात्मक है, लेकिन मोसाद जैसे संगठन रुकते नहीं।” अमेरिकी थिंकटैंक रैंड कॉर्पोरेशन की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि इससे प्रॉक्सी वॉर बढ़ेगा।

संभावित परिणाम:

  • इजरायल की जवाबी हत्या।
  • हिजबुल्लाह का हमला।
  • परमाणु वार्ता रद्द।

ताबूत में आखिरी कील या नई शुरुआत?

इरफान सुल्तानी की फांसी ईरान की ताकत दिखाने का प्रयास है। लेकिन मध्य पूर्व का जटिल खेल जारी रहेगा। क्या ये “ताबूत में आखिरी कील” साबित होगी, या नई हिंसा की चिंगारी? समय बताएगा।
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