वेट लॉस दवाएं: पतले तो हो रहे मोटे लोग, लेकिन मसल्स गल रहे! डॉक्टर्स ने बताया जानलेवा खतरा

आजकल वेट लॉस इंजेक्शन और दवाओं का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। ओजेम्पिक, विगोवाय, मौनजारो जैसी GLP-1 दवाएं मोटापे को कम करने का वादा कर रही हैं, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि ये वजन घटाने के साथ मांसपेशियों (मसल्स) को भी नष्ट कर रही हैं। इससे न सिर्फ शरीर कमजोर हो रहा है, बल्कि जानलेवा जोखिम भी पैदा हो रहे हैं।

वेट लॉस दवाओं का बढ़ता चलन
भारत में मोटापा एक महामारी बन चुका है। एनएचएफएस-5 सर्वे के अनुसार, 20% से अधिक वयस्क मोटापे से जूझ रहे हैं। ऐसे में GLP-1 एगोनिस्ट दवाएं जैसे सेमाग्लूटाइड (ओजेम्पिक) और टिरजेपेटाइड (मौनजारो) ने बाजार हिला दिया है। ये दवाएं भूख कम करती हैं, पेट खाली होने की प्रक्रिया धीमी करती हैं और इंसुलिन उत्पादन बढ़ाती हैं। परिणामस्वरूप, यूजर्स 15-20% वजन घटा लेते हैं। लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया के डॉ. झेनकी लियू के रिसर्च से पता चला कि वजन का 25-40% हिस्सा फैट नहीं, बल्कि मसल्स, हड्डी और लीन टिश्यू से कम होता है। सामान्य उम्र बढ़ने में 10 सालों में सिर्फ 8% मसल लॉस होता है, लेकिन ये दवाएं हफ्तों में इतना नुकसान पहुंचाती हैं।
मसल लॉस कैसे हो रहा है?
ये दवाएं शरीर की कैलोरी जरूरत को इतना कम कर देती हैं कि ब्रेन सिग्नल भेजता है – मसल्स तोड़ो, एनर्जी बनाओ। बिना व्यायाम के शरीर प्रोटीन को तोड़कर ग्लूकोज बनाता है। लैंसेट जर्नल के अध्ययन में पाया गया कि GLP-1 यूजर्स में मसल मास 40% तक घट जाता है। इससे सार्कोपेनिया (मसल कमजोरी) बढ़ता है, जो ज्यादा चर्बी के साथ मसल्स की कमी वाली खतरनाक स्थिति है। डॉ. संचयन रॉय (अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली) कहते हैं, “फैट कम होने के साथ मसल्स गलना शरीर के मेटाबॉलिज्म को बर्बाद कर देता है।” मुंबई की कोकिलाबेन हॉस्पिटल की डॉ. अर्चना जुनेजा जोड़ती हैं, “उम्र, कम प्रोटीन डाइट और एक्सरसाइज न करना इसे और बढ़ावा देता है।” अमेरिका में 1.5 करोड़ लोग इन दवाओं पर हैं, और भारत में भी ब्लैक मार्केट फल-फूल रहा है।
गंभीर स्वास्थ्य जोखिम
मसल लॉस सिर्फ कमजोरी नहीं लाता। ये कार्डियोरेस्पिरेटरी फिटनेस को प्रभावित करता है, इम्यूनिटी कमजोर करता है। पेनिंगटन बायोमेडिकल रिसर्च सेंटर के डॉ. स्टीवन हेम्सफील्ड बताते हैं, “कम मसल्स वाले लोग संक्रमण, खराब ग्लूकोज कंट्रोल और मौत के प्रति संवेदनशील होते हैं।” अन्य साइड इफेक्ट्स में पेट संबंधी दिक्कतें (मतली, उल्टी, डायरिया), पित्ताशय की पथरी, हार्ट रेट बढ़ना, ब्लड प्रेशर अनियमित होना शामिल हैं। यूएस एफडीए ने चेतावनी जारी की है कि बिना सलाह ये दवाएं जानलेवा हो सकती हैं। प्रेग्नेंसी में ये जेस्टेशनल डायबिटीज, हाई बीपी और प्रीटर्म बर्थ का खतरा बढ़ाती हैं। दवा बंद करने पर 2/3 वजन वापस आ जाता है, क्योंकि लाइफस्टाइल चेंज नहीं होता। न्यूरोलॉजिकल इफेक्ट्स जैसे डिप्रेशन, एंग्जायटी भी रिपोर्ट हुए हैं।
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विशेषज्ञों की राय और स्टडीज
अमेरिका-कनाडा के शोधकर्ताओं ने लैंसेट में चेताया कि मोटापा इलाज प्रभावी है, लेकिन मसल प्रिजर्वेशन जरूरी। अल्बर्टा यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने कहा, “ये अप्रत्याशित नेगेटिव रिजल्ट्स पैदा कर रही हैं।” भारत में एशियन हॉस्पिटल के डॉ. संदीप खर्ब बताते हैं, “मौनजारो जैसी दवाएं डायबिटीज कंट्रोल करती हैं, लेकिन वेट लॉस के लिए हाई डोज खतरनाक।” TV9 और NDTV रिपोर्ट्स में एक्सपर्ट्स ने जोर दिया – बिना डॉक्टर ये ‘फैशन’ न बनाएं। Agenda Aajtak 2025 में डॉक्टरों ने सच्चाई बताई कि ये मैजिक पिल नहीं। जागरण की रिपोर्ट में छिपे खतरे उजागर हुए।
बचाव के उपाय और सलाह
डॉक्टर सलाह देते हैं:
- रेजिस्टेंस ट्रेनिंग: वेट लिफ्टिंग से मसल्स बचाएं। हफ्ते में 3-4 दिन करें।
- हाई प्रोटीन डाइट: 1.6-2.2 ग्राम प्रति किलो बॉडी वेट। अंडा, चिकन, दाल, पनीर लें।
- डॉक्टर सुपरविजन: ब्लड टेस्ट से मसल मास चेक करें। खुराक ग्रेजुअल बढ़ाएं।
- लाइफस्टाइल चेंज: दवा के साथ डाइट-एक्सरसाइज अपनाएं, वरना वजन रिबाउंड होगा।
- विकल्प: योग, कार्डियो, संतुलित भोजन से नैचुरल वेट लॉस। सप्लीमेंट्स से बचें।
डॉ. लियू कहते हैं, “मरीज साइड इफेक्ट्स पर नजर रखें और पोषण सुनिश्चित करें।” बिना सलाह दवा ब्लैक मार्केट से न लें।
भारत में स्थिति और भविष्य
भारत में मौनजारो जैसी दवाओं को CDSCO ने मंजूरी दी, लेकिन कीमत 14,000 रुपये महीना। सेलेब्स प्रमोट कर रहे, लेकिन न्यूज24 और अमर उजाला रिपोर्ट्स में सावधानी बरतने को कहा। 2026 में रिसर्च बढ़ेगा। मोटापा रोकथाम पर फोकस जरूरी। अगर आप वेट लॉस प्लान बना रहे हैं, तो डॉक्टर से कंसल्ट करें। स्वस्थ रहें, शॉर्टकट न अपनाएं।
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