पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने ऑपरेशन ब्लू स्टार को “गलत तरीका” बताया है और कहा है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस गलती की कीमत अपनी जान देकर चुकाई। उन्होंने यह बात हिमाचल प्रदेश के कसौली में खुशवंत सिंह साहित्य महोत्सव के दौरान पत्रकार हरिंदर बावेजा की किताब ‘दे विल शूट यू, मैडम’ पर चर्चा करते हुए कही ।

ऑपरेशन ब्लू स्टार पर चिदंबरम का बयान

चिदंबरम ने कहा कि स्वर्ण मंदिर में सैन्य कार्रवाई का तरीका गलत था और इसे सेना के बिना भी संभव था। उन्होंने कहा, “मैं किसी सेना के अधिकारी का अपमान नहीं करता, लेकिन जिस तरह से ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया गया वह बेहद गलत था। कुछ साल बाद हमने सेना को बाहर रखकर स्वर्ण मंदिर को मुक्त करने का सही तरीका दिखाया।” उन्होंने इस बात पर सहमति जताई कि इंदिरा गांधी ने इस गलती की कीमत अपनी जान देकर चुकाई ।

निर्णय की सामूहिक जिम्मेदारी

हालांकि, चिदंबरम ने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय केवल इंदिरा गांधी का नहीं था, बल्कि सेना, पुलिस, खुफिया एजेंसियों और नौकरशाही का संयुक्त फैसला था। उन्होंने कहा, “आप इसके लिए केवल इंदिरा गांधी को दोषी नहीं ठहरा सकते।” इस तरह उन्होंने ऑपरेशन की जिम्मेदारी को सामूहिक बताया ।

पंजाब की वर्तमान स्थिति

चर्चा के दौरान चिदंबरम ने पंजाब की वर्तमान स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि खालिस्तान और अलगाववाद का राजनीतिक नारा व्यावहारिक रूप से खत्म हो गया है और अब पंजाब की असली समस्या आर्थिक स्थिति है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अवैध प्रवास के मामले में अधिकांश लोग पंजाब से हैं ।

1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के घटनाक्रम का विवरण

31 अक्टूबर 1984 को भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या सुबह 9:30 बजे नई दिल्ली के सफदरजंग रोड स्थित उनके आवास पर हुई। ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद उनके दो सिख अंगरक्षक बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने उन पर गोली चलाई। दोनों अंगरक्षक ऑपरेशन ब्लू स्टार को लेकर गुस्से में थे, जिसमें स्वर्ण मंदिर में सैन्य कार्रवाई की गई थी।

इंदिरा गांधी उस समय अपने आवास के बगल स्थित कार्यालय जाने के लिए निकली थीं जब बेअंत सिंह ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की। सतवंत सिंह ने भी उनकी सहायता की और मिलाकर उन्हें करीब 33 गोलियां लगीं। इंदिरा गांधी को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गई। बेअंत सिंह घटनास्थल पर सुरक्षा बलों द्वारा मार गिराए गए जबकि सतवंत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया।

हत्या के कुछ घंटे पहले, इंदिरा गांधी ने भुवनेश्वर में एक जनसभा में कहा था कि उन्हें अपनी जान का कोई डर नहीं है और वे लोगों की सेवा करती रहेंगी। इस घटना के बाद देश में शोक का माहौल फैल गया और पंजाब में हालात तनावपूर्ण हो गए। इंदिरा गांधी का अंतिम संस्कार राज घाट के पास शक्तिस्थल में हुआ, जहां उनके बड़े बेटे राजीव गांधी ने चिता को अग्नि दी थी.

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