हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष की पहली पूर्णिमा तिथि 3 जनवरी 2026, शनिवार के दिन पड़ रही है। यह दिन धर्म, आध्यात्म और पुण्य का संगम लेकर आता है। पंचांग के अनुसार, पौष पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 जनवरी की रात 10:28 बजे से होगी और इसका समापन 3 जनवरी 2026 की शाम 8:12 बजे पर होगा। इस दौरान स्नान, दान, व्रत और पूजा-पाठ के सभी कर्म किए जा सकते हैं।

पौष पूर्णिमा माह के अंत में आने वाली वह तिथि होती है, जिसे पूर्णिमा का चंद्र उदय पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन चंद्र देव अपनी सम्पूर्ण कलाओं के साथ आकाश में प्रकाशित होते हैं और जीवन में समृद्धि व शांति का संचार करते हैं।

पौष पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में पौष पूर्णिमा का विशेष महत्व बताया गया है। यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। मान्यता है कि पौष पूर्णिमा के दिन गंगा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी और नर्मदा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन किए गए दान और पुण्य कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए श्रद्धालु इस दिन स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, तिल, कंबल आदि बांटते हैं। यह सब न केवल व्यक्ति के जीवन में शुभ फल लाता है, बल्कि सामाजिक एकता और करुणा के भाव को भी मजबूत करता है।

स्नान-दान का महत्व और विधि

पौष पूर्णिमा के दिन स्नान-दान को अत्यंत शुभ और पुण्यदायी कर्म माना गया है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नदी, तालाब या घर पर पवित्र जल से स्नान करें। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और अपने ईष्ट देव का ध्यान करें। फिर सूर्य देव को जल अर्पित करें और “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जप करें।

इसके बाद भगवान विष्णु और लक्ष्मी माता की पूजा करें तथा तुलसी पत्र अर्पित करें। दान करते समय यह भावना रखें कि यह दान दूसरों की सहायता और लोककल्याण के लिए है। मान्यता है कि पौष पूर्णिमा के दिन किया गया दान दोगुना फल प्रदान करता है, यानी जितने पुण्य की अपेक्षा की जाती है, उसका फल उससे कई गुना बढ़ जाता है।

प्रयागराज में माघ स्नान का शुभारंभ

पौष पूर्णिमा के दिन से ही माघ मास के स्नान पर्व की शुरुआत होती है, जिसे उत्तर भारत में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। प्रयागराज, हरिद्वार, वाराणसी, गया और उज्जैन जैसे तीर्थ स्थलों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगती है। भक्त इस दिन से लेकर माघी पूर्णिमा तक रोज़ाना गंगा स्नान करते हैं और साधना, भजन, कीर्तन में लीन रहते हैं।

प्रयागराज में संगम तट पर पौष पूर्णिमा के अवसर पर लाखों श्रद्धालु डुबकी लगाते हैं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि गंगा स्नान से सभी पाप धुल जाते हैं और जीवन में नया सवेरा आता है।
यह भी पढ़ें:https://thedbnews.in/the-grand-gathering-of-faith-will-begin-on-january-3-see-the-full-schedule-of-the-bathing-festival/

शास्त्रों में पौष पूर्णिमा का वर्णन

धर्मशास्त्रों और पुराणों में पौष पूर्णिमा के महत्व का विस्तार से उल्लेख मिलता है। पद्म पुराणस्कंद पुराण और भविष्य पुराण में कहा गया है कि पौष मास में पूर्णिमा के दिन जो व्यक्ति भगवान विष्णु की उपासना करता है और ब्राह्मणों को अन्न-वस्त्र का दान देता है, उसे बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है।

इस दिन हनुमान जी की पूजा भी विशेष फलदायी मानी गई है। मंगलवार या शनिवार को पड़ने वाली पौष पूर्णिमा पर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ कर संकटों से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है।

पौष पूर्णिमा से जुड़ी लोक आस्थाएँ और परंपराएँ

भारत के विभिन्न राज्यों में पौष पूर्णिमा से संबंधित अलग-अलग परंपराएँ देखी जाती हैं।

  • उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में इस दिन गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है।
  • राजस्थान और गुजरात में लोग परिवार सहित मंदिरों में दर्शन कर दान-पुण्य करते हैं।
  • दक्षिण भारत में इस दिन विशेष पूजा और दीपदान का आयोजन होता है।
  • उत्तराखंड में इसे “गंगा पूजन पर्व” के रूप में भी जाना जाता है।

ग्राम्य क्षेत्रों में लोग इस दिन तिलकुट बनाते हैं, खिचड़ी भोज करते हैं और भगवान विष्णु के भोग में गुड़-तिल अर्पित करते हैं। इससे जीवन में मिठास और समृद्धि बनी रहती है।

पौष पूर्णिमा पर चंद्र दर्शन का महत्व

पौष पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ सुंदर और तेजस्वी दिखाई देता है। इसलिए इस दिन चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है। चंद्रमा को शीतलता, शांति और मानसिक संतुलन का प्रतीक माना जाता है। इस रात चंद्रमा को अर्घ्य देकर मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करना शुभ फल देता है।

वैज्ञानिक दृष्टि से भी इस रात का विशेष स्थान है, क्योंकि पौष माह के मौसम में चांद की रोशनी सबसे अधिक साफ और चमकीली दिखाई देती है, जो मानसिक शांति और स्फूर्ति प्रदान करती है।

पौष पूर्णिमा और स्वास्थ्य लाभ

पौष पूर्णिमा के आसपास का मौसम ठंड का चरम समय होता है। इस समय तिल, गुड़, खिचड़ी, घी और सूखी सब्जियों का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना गया है। ये पदार्थ शरीर को गर्म रखते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। इस दिन स्नान और सूर्य अर्घ्य का अभ्यास शरीर के संतुलन और मानसिक स्वच्छता में भी मदद करता है।

आस्था, संस्कार और आत्मिक विकास का संगम

पौष पूर्णिमा 2026 का यह पर्व आस्था, संस्कार और आत्मिक विकास का संगम है। इस दिन स्नान, दान और पूजा-पाठ करने से न केवल व्यक्ति का जीवन पवित्र होता है, बल्कि उसके भीतर सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार भी होता है। जो व्यक्ति इस दिन मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहकर पूजा करते हैं, उन्हें अग्नि, जल और वायु की पवित्र ऊर्जा का आशीर्वाद मिलता है।

कल की यह पौष पूर्णिमा हर दृष्टि से विशेष है — यह न केवल साल की पहली पूर्णिमा है, बल्कि नये साल की शुभ शुरुआत का प्रतीक भी। इसलिए इस पावन अवसर पर स्नान-दान का संकल्प अवश्य लें और अपने जीवन में प्रकाश, शांति और सौभाग्य का स्वागत करें।

https://thedbnews.in/wp-content/uploads/2026/01/POUSH_PURNIMA_DAILY_0001.jpghttps://thedbnews.in/wp-content/uploads/2026/01/POUSH_PURNIMA_DAILY_0001-150x150.jpgThe Daily Briefingराय / संपादकीयशिक्षाBreaking News,Breaking News in Hindi,Breaking News Live,HIndi News,Hindi News Live,Latest News in Hindi,News in Hindi,The Daily Briefing,The DB News,अग्नि,गंगा स्नान,जल,ताज़ा हिंदी समाचार,दान,परंपराएँ,पूजा-पाठ,पौष पूर्णिमा 2026,प्रयागराज,माघ स्नान,विधि,शुभ मुहूर्त,हिंदी समाचारहिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष की पहली पूर्णिमा तिथि 3 जनवरी 2026, शनिवार के दिन पड़ रही है। यह दिन धर्म, आध्यात्म और पुण्य का संगम लेकर आता है। पंचांग के अनुसार, पौष पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 जनवरी की रात 10:28 बजे से होगी और इसका समापन 3 जनवरी 2026 की शाम 8:12 बजे पर...For Daily Quick Briefing