अयोध्या में दीपोत्सव की तैयारियां शुरू,राम की पैड़ी पर बन रहे 6 विशालकाय दीपक

अयोध्या में इस बार दिवाली से पहले हो रहे भव्य दीपोत्सव (दीपोत्सव 2025) की तैयारियां जोरों पर हैं। खास बात यह है कि राम की पैड़ी पर छह विशालकाय पत्थर के दीपक बन रहे हैं, जो इस आयोजन का विशेष आकर्षण होंगे। ये दीपक बिहार के कुशल शिल्पकारों द्वारा निर्मित किए जा रहे हैं और इन्हें तेल और बिजली दोनों से जलाने की योजना है, हालांकि फिलहाल तेल से जलाने का प्रावधान तय है। ये दीपक 10 अक्टूबर तक बनकर तैयार हो जाएंगे और दीपोत्सव की शोभा बढ़ाएंगे।

इस वर्ष 26 लाख से अधिक मिट्टी के दीयों की रोशनी से अयोध्या के 56 घाट जगमगाएंगे। दीपोत्सव 19 अक्टूबर को आयोजित होगा जिसमें 2100 भक्त महाआरती करेंगे और 1100 ड्रोन का भव्य शो भी होगा। यह आयोजन पिछले वर्षों से बड़ा और भव्य होगा, जिसमें सामाजिक संदेश जैसे महिला सशक्तिकरण और स्वच्छता अभियान को भी शामिल किया जाएगा। लगभग 33,000 स्वयंसेवक इस आयोजन को सफल बनाने में लगे हैं। मंदिर और घाटों की सफाई, मार्किंग व सजावट का काम भी तेज़ी से चल रहा है।
संक्षेप में, इस बार के अयोध्या दीपोत्सव में राम की पैड़ी के छह विशाल दीपक, लाखों दीयों की रौशनी, महाआरती और ड्रोन शो इसे और भी भव्य और ऐतिहासिक बना देंगे.
छह विशालकाय पत्थर के दीपक बिहार के कुशल शिल्पकारों द्वारा बनाए जा रहे हैं। ये दीपक अयोध्या के राम की पैड़ी पर बन रहे हैं और इन्हें तेल और बिजली दोनों से जलाने की योजना है। इन दीपकों की विशेषता उनकी भव्यता और विशालकाय आकार है, जो इसदीवाली के आयोजन का मुख्य आकर्षण होंगे.

56 घाटों पर दीयों की व्यवस्था के लिए विस्तृत योजना बनाई गई है, जिसमें घाटों की साफ-सफाई और मार्किंग का कार्य अंतिम चरण में है। इन घाटों पर लाखों दीयों की सुविधाजनक व्यवस्था के लिए प्रत्येक ब्लॉक में 4.5 स्क्वायर फीट क्षेत्र में दीयों की व्यवस्था की जा रही है, जबकि श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए दो फीट का रास्ता छोड़ने का प्रावधान है। इन व्यवस्थाओं के अंतर्गत घाटों की सजावट, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा का ध्यान रखा गया है।
इसके अलावा, आयोजित दीपोत्सव को सफल बनाने के लिए लगभग 30,000 स्वयंसेवकों का पंजीकरण भी पूर्ण हो चुका है, जो घाटों पर दीप सजाने, व्यवस्था बनाए रखने और श्रद्धालुओं की मदद करने का कार्य करेंगे। इन सभी तैयारियों से अयोध्या का यह पर्व ‘प्रकाश की नगरी’ के रूप में पूरी दुनिया में प्रसिद्ध होने जा रहा है, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक बनेगा.

