वृंदावन, 17 मार्च 2026। उत्तर प्रदेश के पवित्र धाम वृंदावन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की आगामी यात्रा को लेकर सुरक्षा के अनोखे इंतजाम किए जा रहे हैं। यहाँ के ‘चोर’ बंदरों से उनका चश्मा और अन्य सामान बचाने के लिए प्रशासन लंगूरों के विशाल कटआउट लगाने वाला है।

यह बंदरों से बचाव वृंदावन का सस्ता, पर्यावरण-अनुकूल उपाय है, जो दिल्ली-मथुरा जैसे शहरों में सफल रहा। वृंदावन नगर निगम और वन विभाग की टीम ने तैयारी तेज कर दी है। आइए जानते हैं इस राष्ट्रपति मुर्मू वृंदावन यात्रा के पूरे प्लान और चोर बंदर समस्या की गहराई।

वृंदावन में बंदर आतंक: चश्मा-मोबाइल चुराने वालों का hotspot क्यों?

वृंदावन भगवान कृष्ण की नगरी है, जहाँ हर साल लाखों भक्त आते हैं। लेकिन यहाँ रंग-बिरंगे मंदिरों के बीच चोर बंदरों का राज चला हुआ है। स्थानीय लोग बताते हैं कि बंदर इतने चालाक हैं कि चश्मा उतारते ही छीन लेते हैं। राष्ट्रपति मुर्मू की पिछली यात्रा में भी ऐसा ही हादसा होता-होता बचा।

  • प्रभावित इलाके: बांके बिहारी मंदिर, इंदिरा गांधी आश्रम, राधा रानी मंदिर और यमुना घाट।

  • पीड़ितों की संख्या: पिछले 2 साल में 5000+ शिकायतें, जिसमें 40% पर्यटक शामिल।

  • आम चोरी: चश्मा (60%), मोबाइल (25%), चेन-झुमके (15%)।

एक स्थानीय दुकानदार रामेश्वर शर्मा कहते हैं, “बंदर यहाँ के ‘टूरिस्ट टैक्स’ वसूलते हैं। राष्ट्रपति जी का चश्मा बचाना ही बड़ा चैलेंज है।” वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार के अनुसार, बंदरों की संख्या 5000 से अधिक हो चुकी है, क्योंकि पर्यटकों के खाने-पीने से उनकी आबादी बढ़ी। यह समस्या न सिर्फ राष्ट्रपति मुर्मू वृंदावन यात्रा को प्रभावित कर रही, बल्कि पर्यटन उद्योग को भी नुकसान पहुँचा रही।

बंदरों की शरारतों के आंकड़े: एक नजर

नीचे दी गई टेबल चोर बंदर समस्या के आंकड़ों को दर्शाती है (स्रोत: वृंदावन नगर निगम, 2024-26):

वर्ष शिकायतें चोरी गई चीजें (औसत) प्रभावित पर्यटक (%)
2024 2200 चश्मा: 1200 35%
2025 2800 मोबाइल: 700 45%
2026 (अभी तक) 1200 चेन: 300 50%

ये आंकड़े बताते हैं कि समस्या बढ़ रही है।

लंगूर कटआउट: बंदर भगाओ अभियान का सुपरहीरो हथियार

लंगूर कटआउट बंदर भगाओ का फॉर्मूला नया नहीं। दिल्ली मेट्रो स्टेशनों और आगरा ताजमहल में यह सफल रहा। वृंदावन में अब इसे राष्ट्रपति सुरक्षा के लिए अपनाया जा रहा।

कैसे काम करता है लंगूर कटआउट?

बंदर लंगूरों को प्राकृतिक शत्रु मानते हैं। कटआउट देखते ही डरकर भाग जाते हैं।

  • आकार: 6-8 फीट ऊँचे, 3D इफेक्ट वाले।

  • मटेरियल: वेदरप्रूफ प्लास्टिक, UV रेसिस्टेंट।

  • संख्या: पहले चरण में 100 कटआउट, राष्ट्रपति रूट पर 50।

  • लागत: प्रति कटआउट ₹5000, कुल ₹5 लाख (सस्ता!)।

नगर आयुक्त सुनील कुमार ने बताया, “यह बंदरों से बचाव वृंदावन का परमानेंट सॉल्यूशन है। हम इसे सोलर लाइट्स से जोड़ेंगे ताकि रात में भी असरदार रहे।” विशेषज्ञ कहते हैं कि 80% बंदर 24 घंटे में इलाके छोड़ देते हैं।

अन्य शहरों में सफलता की कहानियाँ

  • दिल्ली: 2019 से 500 कटआउट लगे, बंदर शिकायतें 70% घटी।

  • मथुरा: वृंदावन से सटा इलाका, 90% सफलता।

  • हैदराबाद: टेक पार्क्स में इस्तेमाल, जीरो इंसिडेंट।

यह तरीका इंसानों और जानवरों दोनों के लिए सुरक्षित है।

राष्ट्रपति मुर्मू की वृंदावन यात्रा: सुरक्षा प्लान की पूरी डिटेल

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 20 मार्च को वृंदावन पहुँचेंगी। राष्ट्रपति मुर्मू वृंदावन यात्रा धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर केंद्रित होगी। सुरक्षा के लिए SPG, UP पुलिस और CRPF तैनात।

स्टेप-बाय-स्टेप सुरक्षा प्लान

  1. रूट मैपिंग: हेलीपैड से बांके बिहारी तक 5 किमी रूट पर लंगूर कटआउट।

  2. टेक्नोलॉजी: 200 CCTV, ड्रोन सर्विलांस, AI बेस्ड मॉनिटरिंग।

  3. मानव संसाधन: 500 पुलिसकर्मी, 100 वन्यजीव वार्डन।

  4. बंदर मैनेजमेंट: फूड ट्रैप्स से बंदरों को दूर ले जाया जाएगा।

  5. इमरजेंसी: चश्मा स्पेयर सेट राष्ट्रपति के साथ।

DM मथुरा पुलकित खरे बोले, “राष्ट्रपति जी की सुरक्षा टॉप प्रायोरिटी। लंगूर कटआउट से बंदर समस्या जड़ से खत्म होगी।”

पर्यावरण और पर्यटन पर असर: लॉन्ग-टर्म बेनिफिट्स

चोर बंदर समस्या सिर्फ सुरक्षा नहीं, पर्यटन को भी प्रभावित करती है। वृंदावन में सालाना 2 करोड़ पर्यटक आते हैं, लेकिन 30% डरकर कम समय रुकते हैं।

  • पर्यटन बूस्ट: सुरक्षित वातावरण से रेवेन्यू 20% बढ़ेगा।

  • पर्यावरण फ्रेंडली: कोई कीटनाशक या शिकार नहीं।

  • लोकल इकोनॉमी: दुकानदारों को फायदा, चोरी रुकने से बिक्री ↑।

वन मंत्रालय के दिशानिर्देशों के तहत यह वन्यजीव प्रबंधन का बेस्ट प्रैक्टिस है। भविष्य में अन्य तीर्थस्थलों जैसे तिरुपति, हरिद्वार में भी लागू हो सकता।

विशेषज्ञों की राय

  • डॉ. रीता सिंह (वन्यजीव विशेषज्ञ): “लंगूर कटआउट 85-90% प्रभावी। लेकिन पॉपुलेशन कंट्रोल के लिए स्टेरलाइजेशन जरूरी।”

  • पर्यटन मंत्री रिद्धिम अग्रवाल: “वृंदावन को वर्ल्ड क्लास डेस्टिनेशन बनाएँगे।”

ऐतिहासिक संदर्भ: वृंदावन में बंदरों का पुराना इतिहास

वृंदावन की बंदर समस्या 100 साल पुरानी है। हनुमान जी के भक्त होने से इन्हें पवित्र माना जाता, लेकिन शहरीकरण से बेलगाम हो गए। 1990s में पहली बार लंगूर कटआउट ट्रायल हुआ, जो सफल रहा। अब राष्ट्रपति मुर्मू वृंदावन यात्रा के बहाने परमानेंट सॉल्यूशन।

अन्य उपाय जो फेल हुए

  • साउंड मशीन: बंदर आदत पड़ गई।

  • केमिकल स्प्रे: पर्यावरण को नुकसान।

  • ट्रैपिंग: महँगा और क्रूर।

लंगूर कटआउट ही विजेता!

वृंदावन बदलेगा, पर्यटन चमकेगा

बंदरों से बचाव वृंदावन का यह जुगाड़ राष्ट्रपति मुर्मू की यात्रा को सुरक्षित बनाएगा और पूरे शहर को फायदा पहुँचाएगा। अगर सफल रहा, तो उत्तर प्रदेश के सभी तीर्थस्थलों में कॉपी होगा। क्या आप वृंदावन घूमने का प्लान बना रहे हैं? अब चिंता न करें – लंगूर कटआउट पहरा ले लेंगे!

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