रामपुर, उत्तर प्रदेश | 28 अप्रैल 2026, विशेष संवाददाता: उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में एक ऐसा चमत्कार हुआ है, जिसने न केवल चार मासूम बच्चों की जिंदगी बदल दी, बल्कि पूरे समाज को प्रेरित कर दिया। बचपन से बहरा होने के कारण सन्नाटे में जी रहे इन बच्चों को अब माता-पिता की पुकार, पक्षियों की चहचहाहट और दुनिया की हलचल सुनाई देने लगी है।

जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) अजय कुमार द्विवेदी की संवेदनशील पहल पर दिव्यांगजन विभाग ने निशुल्क सर्जरी कराई, जिसके बाद फिजियोथैरेपी से बच्चों में बोलने की क्षमता भी लौट आई। यह घटना उत्तर प्रदेश सरकार की दिव्यांग कल्याण योजनाओं का जीता-जागता उदाहरण है।

रामपुर डीएम अजय कुमार द्विवेदी: एक संवेदनशील प्रशासक की अनूठी पहल

रामपुर के डीएम अजय कुमार द्विवेदी प्रशासनिक सेवा में एक जाना-माना नाम हैं। उनके कार्यकाल में जिले ने कई सामाजिक कल्याण परियोजनाओं को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। इस बार उनकी नजर चार ऐसे गरीब बच्चों पर पड़ी, जो जन्मजात बधिरता (कॉन्जेनिटल डेफनेस) से पीड़ित थे। इन परिवारों की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि प्राइवेट अस्पतालों में कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी (जिसकी लागत 10-15 लाख रुपये तक होती है) का खर्च उठाना असंभव था।

डीएम द्विवेदी ने तुरंत दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग को निर्देश दिए। उन्होंने कहा, “हर बच्चा भगवान का दूत है। सन्नाटे में कैद कोई बच्चा नहीं रहना चाहिए। हमारी जिम्मेदारी है कि राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।” इस पहल के तहत बच्चों की मेडिकल जांच कराई गई और लखनऊ के विशेष सरकारी अस्पताल में निशुल्क सर्जरी की व्यवस्था की गई। यह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘दिव्यांग सशक्तिकरण मिशन’ का हिस्सा है, जो 2022 से चल रही है।

बधिर बच्चों की निशुल्क सर्जरी: प्रक्रिया और चुनौतियां

बधिरता के मामले में कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी सबसे प्रभावी उपचार है। यह सर्जरी कान के अंदरूनी हिस्से (कोक्लिया) में एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस इम्प्लांट करती है, जो ध्वनि को विद्युत संकेतों में बदल देती है। रामपुर के इन चार बच्चों (उम्र 4 से 8 वर्ष) की सर्जरी इसी तकनीक से की गई।

सर्जरी की पूरी प्रक्रिया इस प्रकार थी:

  1. प्रारंभिक जांच: ईएनटी विशेषज्ञों ने ऑडियोग्राफी और ब्रेन स्टेम रिस्पॉन्स टेस्ट किए।

  2. सर्जरी: 2-3 घंटे की प्रक्रिया में इम्प्लांट लगाया गया।

  3. एक्टिवेशन: 4 सप्ताह बाद डिवाइस को प्रोग्राम किया गया।

  4. फिजियोथैरेपी: 3 महीने के सेशन से बोलने की ट्रेनिंग।

चुनौतियां भी कम नहीं थीं। ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी के कारण कई परिवार देर से पहुंचते हैं। डीएम ने जागरूकता शिविर लगाकर 50 से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग कराई। परिणामस्वरूप, ये चार बच्चे पहले बैच में शामिल हुए।

चार मासूमों की प्रेरक कहानियां: सन्नाटे से आवाज तक का सफर

इन बच्चों की कहानियां दिल छू लेने वाली हैं। आइए जानें प्रत्येक की:

  • रिया (उम्र 6 वर्ष): स्वरूपनगर की रहने वाली रिया बचपन से ही मां की लोरी नहीं सुन पाई। सर्जरी के बाद पहली बार “मां” शब्द बोला। परिवार भावुक हो गया।

  • अक्षय (उम्र 5 वर्ष): काशीपुर रोड के निवासी अक्षय अब स्कूल में दोस्तों से बात कर पा रहा है। फिजियोथैरेपी में वह गाने गुनगुनाने लगा।

  • प्रिया (उम्र 7 वर्ष): गरीब मजदूर पिता की बेटी प्रिया अब टीवी की आवाजें सुनती है। वह सपना देखती है डॉक्टर बनने का।

  • रोहन (उम्र 4 वर्ष): सबसे छोटा रोहन सर्जरी के 15 दिनों बाद ही “पापा” पुकारा। उसके पिता की आंखें नम हो गईं।

ये बच्चे अब स्पीच थेरेपी सेंटर में नियमित जाते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि 6-12 महीनों में वे सामान्य बोलचाल कर लेंगे।

फिजियोथैरेपी का महत्व: सर्जरी के बाद का चमत्कार

सर्जरी केवल शुरुआत है। वास्तविक जादू फिजियोथैरेपी में है। रामपुर के दिव्यांगजन विभाग ने विशेषज्ञ स्पीच थेरेपिस्ट नियुक्त किए। साप्ताहिक सेशन में बच्चे:

  • ध्वनियों की पहचान सीखते हैं।

  • शब्दों का उच्चारण अभ्यास करते हैं।

  • ग्रुप एक्टिविटीज से आत्मविश्वास बढ़ाते हैं।

परिणाम उल्लेखनीय हैं। 80% बच्चे पहले महीने में सुधार दिखाते हैं। यह उत्तर प्रदेश में ‘ऑडिटरी वर्बल थेरेपी’ मॉडल पर आधारित है।

उत्तर प्रदेश सरकार की दिव्यांग कल्याण योजनाएं: रामपुर मॉडल की प्रासंगिकता

यह पहल राज्य स्तर की योजनाओं का हिस्सा है। प्रमुख योजनाएं:

  • नेशनल ट्रस्ट स्कीम: निशुल्क कोक्लियर इम्प्लांट।

  • उत्तर प्रदेश दिव्यांगजन सशक्तिकरण नीति 2023: 1 लाख दिव्यांगों को लाभ।

  • आयुष्मान भारत: सर्जरी कवरेज।

  • मुख्यमंत्री दिव्यांग पेंशन: मासिक सहायता।

रामपुर डीएम अजय कुमार द्विवेदी का मॉडल अन्य जिलों के लिए बेंचमार्क है। अब तक जिले में 20 सर्जरी हो चुकी हैं। भविष्य में मोबाइल मेडिकल यूनिट्स से गांव-गांव पहुंचने की योजना है।

विशेषज्ञों की राय: बधिरता पर रोकथाम और जागरूकता

ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. राकेश शर्मा कहते हैं, “जन्मजात बधिरता के 50% मामले वैक्सीनेशन और प्रीनेटल केयर से रोके जा सकते हैं। रामपुर जैसी पहल जरूरी है।” जागरूकता के लिए:

  • स्कूलों में कैम्प।

  • आशा कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग।

  • सोशल मीडिया अभियान।

सामाजिक प्रभाव: परिवारों और समाज पर बदलाव

इन परिवारों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई। एक मां ने कहा, “डीएम साहब भगवान हैं। अब बेटी शादी के मंडप में ‘बारात आई’ सुन सकेगी।” समाज में दिव्यांगों के प्रति स्टिग्मा कम हो रहा है। स्कूलों में इंक्लूसिव एजुकेशन को बढ़ावा मिला।

भविष्य की योजनाएं: रामपुर से उत्तर प्रदेश तक विस्तार

डीएम द्विवेदी ने घोषणा की:

  1. 2026 तक 100 बच्चों की सर्जरी।

  2. स्पीच थेरेपी सेंटर की संख्या दोगुनी।

  3. ऑनलाइन हेल्पलाइन लॉन्च।

यह अभियान उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों जैसे मुरादाबाद, बरेली में फैलेगा।

 आशा की नई किरण

रामपुर डीएम अजय कुमार द्विवेदी की यह पहल साबित करती है कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति से जिंदगियां बदली जा सकती हैं। जहां सन्नाटा था, वहां अब हंसी-खुशी की आवाजें गूंज रही हैं। यदि आपके परिवार में कोई दिव्यांग बच्चा है, तो तुरंत संपर्क करें। रामपुर दिव्यांगजन विभाग: 0595-235XXXX।

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