रानी मुखर्जी बोलीं- बेटी आदिरा को एक्ट्रेस बनाना जरूरी नहीं, “बस वो खुश रहे”

बॉलीवुड की पावरफुल एक्ट्रेस में शुमार रानी मुखर्जी अपनी प्रोफेशनल लाइफ जितना ही ध्यान अपनी पर्सनल लाइफ और बेटी आदिरा पर देती हैं। एक हालिया बातचीत में रानी ने साफ कर दिया कि वह अपनी बेटी पर कभी भी ग्लैमर वर्ल्ड या एक्टिंग करियर के लिए दबाव नहीं डालना चाहेंगी और उनके लिए सबसे अहम बात सिर्फ यही है कि आदिरा अपनी ज़िंदगी में खुश रहे।

इंटरव्यू में उठाया गया सवाल: क्या आदिरा भी बनेगी एक्ट्रेस?
रानी मुखर्जी से बातचीत के दौरान सबसे पहले यही सवाल पूछा गया कि क्या वो चाहती हैं कि आदिरा भी आगे चलकर उन्हीं की तरह फिल्मों में आए और एक सफल एक्ट्रेस बने। जवाब में रानी ने कहा कि सिर्फ इसीलिए कि वह खुद एक्ट्रेस हैं, इसका मतलब यह नहीं कि उनकी बेटी को भी वही रास्ता अपनाना पड़े। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आज के दौर में बच्चों पर पहले से ही बहुत प्रेशर है, ऐसे में पैरेंट्स को कम से कम करियर के मामले में उन पर अपनी महत्वाकांक्षा नहीं थोपनी चाहिए।
रानी ने कहा कि अगर आदिरा को एक्टिंग का शौक होगा तो वो खुद उस ओर आकर्षित होगी, लेकिन वह कभी उसे फोर्स नहीं करेंगी। उनके मुताबिक, एक मां के तौर पर उनका रोल सिर्फ रास्ता दिखाने और सही-वक़्त पर सपोर्ट देने तक सीमित रहना चाहिए, न कि बच्चे का पूरा भविष्य उनके लिए तय कर देना।
“मेरी इच्छा से ज़्यादा ज़रूरी है उसकी खुशी”
बेटी के करियर को लेकर रानी मुखर्जी ने यह भी कहा कि उन्होंने हमेशा से यह सोचा है कि आदिरा जो भी चुने, वह दिल से चुने और पूरे मन से उसमें अपना 100 फीसदी दे। अगर कल को आदिरा फिल्म इंडस्ट्री में नहीं आना चाहती, किसी कॉरपोरेट सेक्टर में जॉब करना चाहती है, स्पोर्ट्स, आर्ट या फिर कोई बिल्कुल अलग फील्ड चुनती है, तो भी रानी उसके फैसले के साथ मजबूती से खड़ी रहेंगी।
रानी के मुताबिक, पैरेंट्स की सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह नहीं कि बच्चा क्या बने, बल्कि यह है कि बच्चा जो बनने का फैसला करे, उसमें उसे पूरा इमोशनल, मेंटल और मोरल सपोर्ट मिले। उन्होंने कहा कि वह अपनी बेटी को यही सिखाना चाहती हैं कि लाइफ में सक्सेस की डेफिनिशन सिर्फ नाम और शोहरत नहीं, बल्कि अंदर की शांति और सैटिस्फैक्शन भी है।
स्टारकिड्स पर प्रेशर और नेपोटिज्म की बहस
बातचीत के दौरान नेपोटिज्म और स्टारकिड प्रेशर का मुद्दा भी उठा। रानी ने माना कि आज के दौर में स्टारकिड्स पर डबल प्रेशर होता है – एक तरफ उनकी तुलना उनके पैरेंट्स से की जाती है और दूसरी तरफ सोशल मीडिया की निगाहें हर वक्त उन पर टिकी रहती हैं।
उन्होंने कहा कि फिल्मों में आने से पहले ही स्टारकिड्स पर ‘क्या वो अपने पेरेंट जितने टैलेंटेड हैं’, ‘क्या वो वही ग्लैमर कैरी कर पाएंगे’ जैसे सवाल खड़े कर दिए जाते हैं। इस तरह का माहौल बच्चों के लिए कई बार मेंटली टैक्सिंग हो जाता है, इसलिए उनकी पहली कोशिश यही रहेगी कि आदिरा को इन सब चीज़ों से बचाया जा सके और उसे नॉर्मल चाइल्डहुड मिले।
रानी ने रखी अपनी पेरेंटिंग फिलॉसफी
रानी मुखर्जी ने अपनी पेरेंटिंग फिलॉसफी पर बात करते हुए कहा कि वह अपनी बेटी को एक रेगुलर बच्ची की तरह पलने-बढ़ने देना चाहती हैं। वह नहीं चाहतीं कि सिर्फ इस वजह से कि वह एक सेलिब्रिटी हैं, आदिरा की लाइफ पर लगातार कैमरों की नज़र रहे। रानी के मुताबिक, बचपन वो स्टेज है जहां बच्चा दुनिया को खुलकर एक्सप्लोर करता है, और अगर उसी समय पर उसकी हर छोटी-बड़ी चीज़ को जज किया जाए तो उसका असर उसके कॉन्फिडेंस पर पड़ सकता है।
यही वजह है कि रानी और उनके पति आदित्य चोपड़ा ने हमेशा से अपनी बेटी को पब्लिक ग्लेयर से दूर रखने की कोशिश की है। रानी मानती हैं कि जब तक बच्चा खुद यह न चाहे कि वो लाइमलाइट में आए, तब तक उसके लिए प्राइवेसी सबसे बड़ी जरूरत है।
काम और फैमिली बैलेंस पर रानी की बात
रानी ने यह भी शेयर किया कि मां बनने के बाद उनकी प्रोफेशनल लाइफ का पैटर्न काफी बदल गया। उन्होंने माना कि उन्होंने जानबूझकर कम फिल्में साइन कीं ताकि वह अपनी बेटी के साथ ज्यादा वक्त बिता सकें। उनके लिए अब हर स्क्रिप्ट चुनने से पहले यह सोचना ज़रूरी हो गया है कि इस प्रोजेक्ट की वजह से उन्हें घर से कितने दिन दूर रहना पड़ेगा और यह उनकी बेटी की रूटीन पर कितना असर डालेगा।
रानी ने कहा कि वह इस बैलेंस को बनाए रखने की पूरी कोशिश करती हैं, क्योंकि अगर वह खुद लगातार गिल्ट या स्ट्रेस में रहेंगी तो उसका असर उनकी बेटी पर भी पड़ेगा। उनके मुताबिक, एक वर्किंग मॉम के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह न तो अपने करियर को पूरी तरह छोड़ दे और न ही फैमिली टाइम से इतना कॉम्प्रोमाइज करे कि बाद में पछताना पड़े।
“अगर वो आम ज़िंदगी जीना चाहे तो भी मुझे मंज़ूर”
इंटरव्यू में रानी से यह भी पूछा गया कि क्या उन्हें अच्छा लगेगा अगर उनकी बेटी बिल्कुल ही फिल्म इंडस्ट्री से अलग, एक बहुत सिंपल और प्राइवेट लाइफ जीना पसंद करे। इस पर रानी ने मुस्कुराकर कहा कि अगर कल को आदिरा यह फैसला लेती है कि उसे पब्लिक अटेंशन, रेड कार्पेट, कैमरे – इन सब से दूर रहना है, तो उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि दुनिया अक्सर मानकर चलती है कि स्टारकिड्स को ग्लैमर लाइफ ही पसंद आएगी, लेकिन कई बार बच्चे बिल्कुल उल्टा रास्ता चुनते हैं और उन्हें नॉर्मल, सिंपल लाइफ ज्यादा सुकून देती है। रानी के लिए यह बात मायने नहीं रखती कि लोग उनकी बेटी को किस नजर से देखते हैं, उनके लिए बस यह जरूरी है कि आदिरा खुद अपने फैसले से खुश रहे।
सोशल मीडिया पर फैंस कर रहे हैं रानी की सोच की तारीफ
यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर रानी मुखर्जी की जमकर तारीफ हो रही है। फैन्स का कहना है कि ऐसी सोच ही आज के समय में एक प्रोग्रेसिव और सेंसिटिव पेरेंट की पहचान है। कई यूजर्स का मानना है कि जब इंडस्ट्री में ज्यादातर लोग अपने बच्चों को लॉन्च करने की जल्दी में रहते हैं, वहां रानी का यह कहना कि उनकी बेटी पर कोई दबाव नहीं होगा, वाकई रिफ्रेशिंग और इंस्पिरेशनल है।
कुछ लोगों ने यह भी लिखा कि रानी की बात हर उस पैरेंट को सुननी चाहिए जो अपने अधूरे सपने बच्चों पर थोप देता है। फैन्स को यह बात खास लगी कि रानी ने खुलकर माना कि हर बच्चा अपने पैरेंट्स की कॉपी बनने के लिए नहीं पैदा होता, बल्कि उसकी अपनी एक अलग पहचान बनाने का भी हक है।
आने वाली पीढ़ी के लिए ज़रूरी मैसेज
रानी मुखर्जी का यह स्टैंड सिर्फ उनकी बेटी के लिए नहीं, बल्कि उन तमाम पैरेंट्स और बच्चों के लिए भी एक बड़ा मैसेज है जो करियर चुनने के मोड़ पर खड़े हैं। ऐसे समय में, जब सोशल मीडिया, कॉम्पिटिशन और सोसायटल एक्सपेक्टेशन मिलकर युवाओं पर एक्स्ट्रा प्रेशर क्रिएट कर रहे हैं, वहां यह बात बहुत मायने रखती है कि पैरेंट्स अपने बच्चों की चॉइस को रिस्पेक्ट करें।
रानी ने अपने शब्दों में यही समझाने की कोशिश की कि पेरेंटिंग का असली मतलब बच्चों को अपनी राह चुनने की आज़ादी देना और उनके साथ खड़े रहना है, न कि उन्हें किसी एक तय फ्रेम में फिट करने की कोशिश करना।
“वो जो भी बने, बस दिल से खुश रहे”
कुल मिलाकर रानी मुखर्जी ने बहुत साफ शब्दों में यह संदेश दिया कि बेटी आदिरा का करियर चाहे जो भी हो, उनकी सबसे बड़ी ख्वाहिश सिर्फ यही है कि वह ज़िंदगी भर खुश रहे, खुद से संतुष्ट रहे और एक अच्छा इंसान बने।
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