राजस्थान के जोधपुर में प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। मात्र 23-25 साल की उम्र में 28 जनवरी 2026 को आश्रम से ब्रेन डेड हालत में अस्पताल ले जाए जाने के बाद उनकी मौत हो गई।

विशेष जांच टीम (SIT) ने खुलासा किया कि कंपाउंडर देवी सिंह ने उन्हें एक नहीं, बल्कि कई इंजेक्शन दिए थे, जिससे मौत की वजह पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह मामला न सिर्फ धार्मिक जगत को झकझोर रहा है, बल्कि सोशल मीडिया ट्रोलिंग, वायरल वीडियो और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की रिपोर्ट से एक बड़ी साजिश की आशंका जता रहा है। आइए, इस पूरी घटना को विस्तार से समझते हैं।

साध्वी प्रेम बाईसा कौन थीं? प्रेरणादायक जीवन यात्रा

साध्वी प्रेम बाईसा का जन्म राजस्थान के एक साधारण परिवार में हुआ था, लेकिन उनकी कथा वाचन की कला ने उन्हें रातोंरात प्रसिद्धि दिला दी। मात्र 18 साल की उम्र में संन्यास लेने वाली प्रेम बाईसा भजन-कीर्तन और रामकथा के माध्यम से लाखों लोगों को जोड़ती थीं। जोधपुर के प्रेक्षा आश्रम में रहते हुए वे नियमित रूप से कथा आयोजित करतीं, जहां उनके प्रवचन युवाओं को खासतौर पर आकर्षित करते। उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर लाखों फॉलोअर्स थे, जो उनकी सादगी और आध्यात्मिकता की सराहना करते।

उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मौत के बाद सोशल मीडिया पर #JusticeForPremBaisa ट्रेंड करने लगा। साध्वी के पिता और गुरु ने बताया कि वे हमेशा समाज सेवा में लगी रहतीं, लेकिन हालिया विवादों ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया। कथा वाचन के दौरान उनकी मधुर वाणी और जीवन दर्शन लाखों दिलों को छूता था। साध्वी प्रेम बाईसा की मौत ने न सिर्फ भक्तों को शोकाकुल कर दिया, बल्कि धार्मिक संस्थानों में सुरक्षा के सवाल भी खड़े कर दिए।

मौत की घटना: आश्रम से अस्पताल तक का चौंकाने वाला सफर

27 जनवरी की शाम साध्वी प्रेम बाईसा जोधपुर के प्रेक्षा आश्रम में कथा सुना रही थीं। अचानक तबीयत खराब होने पर आश्रम के कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित ने उन्हें इंजेक्शन दिया। SIT की जांच में सामने आया कि यह एक नहीं, बल्कि कई इंजेक्शन थे – जिनमें डेक्सोना जैसी दवा शामिल थी। इंजेक्शन देने के मात्र 5 मिनट बाद उनकी हालत बिगड़ गई और वे ब्रेन डेड हो गईं।

आश्रम से प्रेक्षा अस्पताल ले जाए जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआत में इसे प्राकृतिक मौत बताया गया, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कोई स्पष्ट कारण न मिलने से संदेह गहरा गया। साध्वी के पिता ने आरोप लगाया कि आश्रम में कोई डॉक्टर नहीं था, और कंपाउंडर को इंजेक्शन देने का अधिकार भी नहीं। पुलिस ने आश्रम के कमरों की तलाशी ली, जहां से कुछ दवाइयां और इंजेक्शन बरामद हुए। यह घटना क्रमबद्ध तरीके से देखें तो कई सवाल पैदा करती है – क्या इंजेक्शन में कोई घातक तत्व था?

कंपाउंडर देवी सिंह पर गंभीर आरोप: कबूलनामा और विरोधाभास

SIT प्रमुख एसीपी छवि शर्मा के नेतृत्व में जांच में कंपाउंडर देवी सिंह ने कबूल किया कि उसने साध्वी को “जनरल इंजेक्शन” दिए। लेकिन सवाल यह है कि एक कंपाउंडर को बिना डॉक्टर के परामर्श के कई इंजेक्शन क्यों और कैसे दिए? देवी सिंह का दावा है कि साध्वी को पहले से बुखार था, लेकिन आश्रम स्टाफ के बयानों में विरोधाभास है।

पुलिस पूछताछ में कंपाउंडर ने बताया कि इंजेक्शन की मात्रा सामान्य थी, लेकिन फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है। क्या यह लापरवाही थी या जानबूझकर की गई हत्या? संत समाज का आरोप है कि आश्रम प्रबंधन ने मामले को दबाने की कोशिश की। देवी सिंह को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की जा रही है, और उसके फोन रिकॉर्ड्स की जांच चल रही है। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में मेडिकल सुविधाओं की कमी को भी उजागर कर दिया।

वायरल वीडियो कांड: ट्रोलिंग ने तोड़ा मानसिक संतुलन?

साध्वी प्रेम बाईसा की मौत से ठीक पहले सोशल मीडिया पर उनके पिता के साथ एक पुराना वीडियो वायरल हो गया। वीडियो में गुरु-पिता उन्हें गोद में उठाकर कमर पर हाथ फेरते दिखे, जिसे ट्रोलर्स ने गलत संदर्भ में पेश किया। इससे साध्वी के चरित्र पर सवाल उठे और संत समाज ने आलोचना की।

साध्वी के अंतिम दिनों में मानसिक तनाव स्पष्ट था। उनके भाई ने बताया कि ट्रोलिंग से वे उदास रहने लगी थीं। पुलिस अब उन ट्रोलर्स की पहचान कर रही है जो वीडियो शेयर कर सनसनी फैला रहे थे। यह घटना डिजिटल ट्रोलिंग के खतरों को रेखांकित करती है, खासकर धार्मिक हस्तियों के लिए। #StopTrollingSadhvis जैसे हैशटैग सोशल मीडिया पर छा गए।

मौत के बाद का रहस्यमयी इंस्टाग्राम पोस्ट: हैकिंग या साजिश?

सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब साध्वी की मौत के 3-4 घंटे बाद उनके इंस्टाग्राम पर “अलविदा” पोस्ट अपलोड हो गया। पोस्ट में न्याय की मांग की गई थी, जो मौत के बाद असंभव लगता है। पिता का कहना है कि अकाउंट हैक हुआ या कोई साजिश थी। पुलिस साइबर सेल इसकी जांच कर रही है, और IP एड्रेस ट्रेस किए जा रहे हैं।

यह पोस्ट वायरल होते ही संदेह की नई परतें जुड़ गईं। क्या कोई आश्रम के अंदर का ही व्यक्ति जिम्मेदार है? सोशल मीडिया पोस्ट ने केस को नेशनल हेडलाइन बना दिया।​

पोस्टमार्टम और SIT जांच: क्या मिलेगी सच्चाई?

पोस्टमार्टम रिपोर्ट अस्पष्ट आई, इसलिए मेडिकल बोर्ड के विशेषज्ञ विषाक्तता टेस्ट कर रहे हैं। SIT ने आश्रम के CCTV फुटेज जब्त किए, जिसमें इंजेक्शन देने का दृश्य कैद है। फॉरेंसिक टीम दवाओं का सैंपल विश्लेषण कर रही है।

जोधपुर पुलिस ने FIR दर्ज कर सभी एंगल्स से जांच शुरू की। संत समाज न्याय की मांग कर रहा है, और CM ने हाईकोर्ट को रिपोर्ट देने के आदेश दिए। जांच पूरी होने पर ही सच्चाई सामने आएगी।

साध्वी प्रेम बाईसा का विरसा: भक्तों के बीच अमर

साध्वी की मौत ने भजन-कीर्तन की दुनिया को झकझोर दिया। उनके प्रवचनों के वीडियो अब ट्रिब्यूट के रूप में वायरल हो रहे। भक्तों का मानना है कि उनकी आत्मा न्याय दिलाएगी। यह मामला आश्रमों में मेडिकल सुरक्षा और साइबर बुलिंग के खिलाफ जागरूकता बढ़ाएगा।

सोशल मीडिया ट्रोलिंग के खतरे: सबक क्या है?

यह घटना बताती है कि वायरल वीडियो कैसे किसी की जिंदगी बर्बाद कर सकते हैं। सरकार को सख्त साइबर कानून बनाने चाहिए। साध्वी जैसे संतों को सुरक्षा की जरूरत है।

आश्रमों में मेडिकल सुविधाओं की कमी: बड़ा मुद्दा

ग्रामीण आश्रमों में डॉक्टरों की कमी घातक साबित हो रही। सरकार को तत्काल दिशानिर्देश जारी करने चाहिए। यह साध्वी प्रेम बाईसा की मौत का सबसे बड़ा सबक है।

जांच के अगले कदम: पुलिस क्या करेगी?

SIT कंपाउंडर के अलावा आश्रम स्टाफ, ट्रोलर्स और हैकर्स पर नजर रखेगी। फाइनल रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपी जाएगी। देश भर से न्याय की मांग उठ रही है।

निष्कर्ष: न्याय की आस में भक्त बेकरार

साध्वी प्रेम बाईसा की मौत एक मिस्ट्री बनी हुई है। कई इंजेक्शन, वायरल वीडियो और पोस्ट से साजिश के संकेत मिलते हैं। SIT को जल्द सच्चाई उजागर करनी होगी। क्या आप इस केस पर अपडेट चाहते हैं? कमेंट में बताएं।​
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