प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र में धार्मिक विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। माघ मेला प्राधिकरण ने ज्योतिष्पीठाधीश्वर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को नोटिस जारी कर पूछा है कि वे कैसे शंकराचार्य बन गए। नोटिस में 24 घंटे के अंदर जवाब देने का अल्टीमेटम दिया गया है, जो सुप्रीम कोर्ट के लंबित मामले का हवाला देता है।​

यह घटना मौनी अमावस्या स्नान विवाद से उपजी है, जहां अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों और मेला अधिकारियों के बीच टकराव हुआ। प्राधिकरण का कदम मेला व्यवस्था और शंकराचार्य परंपरा के बीच टकराव को उजागर करता है। लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में यह विवाद शांति भंग करने का खतरा पैदा कर रहा है।​

माघ मेला नोटिस का पूरा विवरण: शंकराचार्य पद पर सवाल

माघ मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने 19 जनवरी 2026 को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को औपचारिक नोटिस भेजा। नोटिस में स्पष्ट शब्दों में कहा गया, “कैसे बन गए शंकराचार्य…24 घंटे में दें जवाब”। यह सुप्रीम कोर्ट में केस नंबर 3010/2020 (जगत गुरु शंकराचार्य ज्योतिष्पीठ पीएसएसएन सरस्वती बनाम एसएचएन सरस्वती के शिष्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती) का जिक्र करता है।​

प्राधिकरण का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2022 को शंकराचार्य प्रोटोकॉल पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद माघ मेला 2025-26 में उनके शिविर के बोर्ड पर “ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य” लिखा हुआ है। 24 घंटे में सुधार न करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। मेलाधिकारी ऋषिराज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि जमीन “बद्रिका आश्रम सेवा शिविर” नाम से आवंटित की गई, न कि शंकराचार्य प्रोटोकॉल के तहत।​

यह नोटिस केवल उपाधि तक सीमित नहीं। प्राधिकरण ने अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान विवाद में प्रशासन पर लगाए आरोपों को भी खारिज किया। अधिकारियों का कहना है कि उन्हें स्नान से रोका नहीं गया, बल्कि भ्रम फैलाया जा रहा है।
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मौनी अमावस्या स्नान विवाद की पूरी पृष्ठभूमि

माघ मेला 2026 का प्रमुख दिन मौनी अमावस्या (13 जनवरी 2026) पर विवाद भड़का। यूपी सरकार के गृह सचिव मोहित गुप्ता और मेला अधिकारियों के साथ अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की झड़प हुई। शिष्यों ने अधिकारियों पर मारपीट का आरोप लगाया, जिसके बाद स्वामी ने स्नान से इंकार कर दिया।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद तब से अपने शिविर के बाहर धरने पर हैं। उन्होंने कहा, “मां गंगा से मिलने के लिए परमिशन नहीं लूंगा।” वे पूर्णिमा तक शिविर से बाहर रहने और भविष्य में प्रयागराज आने पर स्नान न करने की बात कही। यह विरोध धरना या अनशन नहीं, बल्कि प्रशासनिक अपमान का प्रतीक बताया गया।​

प्रशासन ने आईसीसीसी सभागार में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सफाई दी। मेला पुलिस ने शोभायात्रा को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन हिंसा नहीं हुई। करोड़ों श्रद्धालुओं के स्नान के बीच यह घटना सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा रही है।​

ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य विवाद का लंबा इतिहास

ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य पद पर विवाद दशकों पुराना है। आदि शंकराचार्य की चार पीठों में ज्योतिष्पीठ (जोसमठ) का उत्तराधिकार सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 2017 से खुद को ज्योतिष्पीठाधीश्वर बताते हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पट्टाभिषेक पर रोक लगाई।​

विरोधी गुट स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को मान्यता देता है। कोर्ट ने प्रोटोकॉल न देने का आदेश दिया, जिसका पालन मेला प्रशासन कर रहा। अविमुक्तेश्वरानंद धार्मिक-सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहते हैं, जैसे राम मंदिर, गंगा प्रदूषण। यह नोटिस उनकी वैधता पर सीधा प्रहार है।​

मेला प्राधिकरण ने शिविर में लगे बोर्ड हटाने को कहा। स्वामी ने जवाब दिया, “मैं ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य हूं।” यह टकराव धार्मिक स्वायत्तता बनाम सरकारी नियंत्रण का प्रतीक बन गया।​

माघ मेला 2026: रिकॉर्ड भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था

प्रयागराज माघ मेला 2026 में अब तक करोड़ों श्रद्धालु स्नान कर चुके। हर दिन लाखों लोग संगम तट पर उमड़ रहे। महाशिवरात्रि पर अखाड़ों का अंतिम स्नान होगा, जो मेला का समापन चिह्नित करेगा।

सुरक्षा के लिए मेला प्रशासन ने निगरानी बढ़ाई। विवाद के बाद पुलिस अलर्ट पर है। मेलाधिकारी ने शांति बनाए रखने का आह्वान किया। यह मेला कुंभ का लघु रूप है, जहां 40+ स्नान तिथियां हैं।​

विवाद से मेला की छवि प्रभावित हो रही। प्राधिकरण नोटिस से व्यवस्था बहाल करने की कोशिश में है।

अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती: धार्मिक नेता की प्रोफाइल

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती उत्तराखंड के हरिद्वार से जुड़े। वे ज्योतिष्पीठ के दावेदार हैं और गंगा सफाई, हिंदू परंपराओं पर सक्रिय। 2021 में हरिद्वार कुंभ में कोविड प्रोटोकॉल तोड़ने के आरोप लगे।

उनके शिष्य भक्तवत्सल हैं। मौनी अमावस्या विवाद में उन्होंने प्रशासन से माफी मांगी। भविष्य में मेला नजरअंदाज करने की धमकी दी। यह नोटिस उनके प्रभाव को चुनौती देता है।​

सुप्रीम कोर्ट केस का अपडेट और संभावित प्रभाव

सुप्रीम कोर्ट केस 2020 से लंबित। अगली सुनवाई का इंतजार। मेला प्राधिकरण कोर्ट आदेश का हवाला देकर कार्रवाई कर रहा। यदि स्वामी जवाब नहीं देते, तो शिविर हटाने जैसी कार्रवाई हो सकती।​

यह विवाद अन्य मेले जैसे कुंभ पर असर डाल सकता। धार्मिक नेता और प्रशासन के बीच संतुलन जरूरी। शंकराचार्य परंपरा की पवित्रता दांव पर।

अन्य धार्मिक विवाद और माघ मेला की चुनौतियां

माघ मेला में अखाड़ों के बीच भी तनाव रहता। 2025 में भूमि विवाद हुए। प्रशासन 1 लाख श्रद्धालुओं के लिए शिविर चला रहा। कोविड के बाद भीड़ बढ़ी।

विवाद से पर्यटन प्रभावित। प्रयागराज सरकार शांति सुनिश्चित करने में जुटी। विशेषज्ञों का कहना, धार्मिक मामलों में अदालत हस्तक्षेप न्यूनतम हो।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं और राजनीतिक रंग

ट्विटर, फेसबुक पर #AvimukteshwaranandNotice ट्रेंडिंग। भक्त नोटिस को साजिश बता रहे। विपक्ष ने प्रशासन पर हमला बोला। BJP ने धार्मिक भावनाओं का सम्मान का दावा।​

यह विवाद चुनावी साल में राजनीतिक हो सकता। उत्तर प्रदेश में धार्मिक मुद्दे संवेदनशील।

आगे क्या? संभावित परिणाम और अपेक्षाएं

24 घंटे बाद स्वामी का जवाब तय करेगा। कोर्ट अवमानना का केस बन सकता। मेला प्राधिकरण सख्ती से व्यवस्था बनाए रखेगा। श्रद्धालु शांति चाहते।​

यह घटना शंकराचार्य चयन प्रक्रिया पर बहस छेड़ेगी। धार्मिक परंपराओं को आधुनिक कानून से जोड़ना चुनौती। माघ मेला की सफलता दांव पर।
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