गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज में 2014 बैच का छात्र श्रीकांत सरोज पिछले 11 साल से MBBS पहले वर्ष की परीक्षा पास नहीं कर सका। यह मामला मेडिकल शिक्षा प्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है, जहां छात्र न पढ़ाई कर रहा है और न ही हॉस्टल छोड़ रहा।

छात्र का नाम और बैकग्राउंड

श्रीकांत सरोज ने 2014 में CPMT के जरिए SC कोटे से एडमिशन लिया था। उसने फर्स्ट ईयर की परीक्षा केवल एक बार दी, जिसमें सभी विषयों में फेल हो गया और उसके बाद परीक्षा देना बंद कर दिया। कॉलेज ने उसे विशेष काउंसलिंग और अलग पढ़ाई की सुविधा दी, लेकिन वह पढ़ाई से भागता रहा।

कॉलेज प्रशासन की प्रतिक्रिया

प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि उन्हें हाल ही में इसकी जानकारी मिली। प्रशासन ने छात्र को कई बार मोटिवेट किया, लेकिन कोई फैसला नहीं ले पाया क्योंकि पुराने MCI नियमों में सख्त समय सीमा का प्रावधान नहीं था। अब विभाग से उपस्थिति और रिकॉर्ड की रिपोर्ट मांगी गई है।

NMC नियमों का उल्लंघन

नए GMER 2023 नियमों के तहत फर्स्ट ईयर के लिए अधिकतम 4 प्रयास और पूरे कोर्स के लिए 9 साल की सीमा है। 75% थ्योरी और 80% प्रैक्टिकल उपस्थिति अनिवार्य है, लेकिन यह छात्र इन नियमों का खुला उल्लंघन कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कॉलेज की शैक्षणिक साख पर बट्टा लग रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल, साथी छात्र डॉक्टर बन चुके

खबर वायरल हो गई, जहां यूजर्स इसे “सबसे लंबा फर्स्ट ईयर” कह रहे हैं। छात्र के बैचमेट स्पेशलाइजेशन करके डॉक्टर बन चुके हैं, जबकि वह अभी भी पहले वर्ष में अटका है। यह घटना डॉक्टरों की कमी वाले देश में सीटों के दुरुपयोग को उजागर करती है।

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