कोडिन सिरप तस्करी में बड़ी ब्रेकिंग: शुभम जायसवाल का ‘राइट हैंड’ विकास सिंह नर्वे इंडो-नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार | UP STF की कामयाबी

उत्तर प्रदेश पुलिस को कोडिन सिरप तस्करी के बहुचर्चित मामले में एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। फरार शराबी डॉन शुभम जायसवाल का सबसे करीबी सहयोगी और ‘राइट हैंड’ माने जाने वाले विकास सिंह नर्वे को इंडो-नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार कर लिया गया।

यह गिरफ्तारी सोनौली बॉर्डर पर विशेष अभियान के दौरान हुई, जहां से कोडिन सिरप की भारी मात्रा में तस्करी हो रही थी। पुलिस ने नर्वे के कब्जे से 500 लीटर से अधिक कोडिन सिरप, नकली दस्तावेज, हथियार और नकदी बरामद की है। यह घटना न केवल तस्करी नेटवर्क को कमजोर करती है, बल्कि युवाओं में नशे के प्रसार को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
शुभम जायसवाल गैंग का काला कारोबार: विकास सिंह नर्वे की भूमिका
शुभम जायसवाल, जो दुबई फरार बताया जा रहा है, उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े कोडिन सिरप तस्करों में शुमार है। उसके गैंग ने 173 से अधिक फर्जी फर्में खोल रखी थीं, जिनमें वाराणसी में 126, जौनपुर में 28 और अन्य जिलों में बाकी शामिल हैं। विकास सिंह नर्वे (उम्र 28 वर्ष, आजमगढ़ निवासी) इनमें से 27 फर्जी फर्मों का संचालन करता था। वह नेपाल रूट से कोडिन सिरप मंगवाकर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल तक सप्लाई करता था। नर्वे जायसवाल का ‘राइट हैंड’ होने के नाते लॉजिस्टिक्स और वितरण का पूरा जिम्मा संभालता था। पुलिस पूछताछ में उसने कई रूट्स और सहयोगियों के नाम उगलने शुरू कर दिए हैं, जिससे और गिरफ्तारियां तय हैं।
कोडिन सिरप, जो मूल रूप से खांसी की दवा है, इसमें मौजूद कोडीन की वजह से नशे का रूप ले लेता है। तस्कर इसे हिमाचल प्रदेश के सोलन से सस्ते दाम पर खरीदते थे और 10 गुना मुनाफे से बेचते थे। जायसवाल गैंग ने शैली ट्रेडर्स जैसी फर्मों के जरिए फर्जी बिल और जीएसटी इनवॉइस बनाए, जिससे कारोबार को वैध ठहराया जाता था। गाजियाबाद में गोदाम बनाकर स्टॉक रखा जाता, फिर वाराणसी-सोनभद्र रूट से नेपाल-बांग्लादेश भेजा जाता।
इंडो-नेपाल बॉर्डर पर चली विशेष कार्रवाई: कैसे पकड़ा गया नर्वे?
सोमवार रात को उत्तर प्रदेश STF और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने सोनौली बॉर्डर पर नाकाबंदी की। इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर नर्वे की लग्जरी कार को रोका गया, जिसमें कोडिन सिरप की खेप छिपी थी। नर्वे नेपाल से लौट रहा था और उसके पास नकली पासपोर्ट व दस्तावेज मिले। गिरफ्तारी के बाद उसे वाराणसी ले जाया गया, जहां पूछताछ जारी है। यह वही बॉर्डर है, जहां से बांग्लादेश तक फेंसिडिल जैसी सिरप की 10 हजार करोड़ की तस्करी होती थी। पुलिस ने नर्वे के फोन से शुभम जायसवाल से बातचीत के सबूत भी बरामद किए हैं।
पिछले कुछ महीनों में STF ने इस नेटवर्क पर कई छापे मारे हैं। दिसंबर 2025 में वाराणसी के रोहनिया और सारनाथ से 5 तस्कर गिरफ्तार हुए, जिनके लेनदेन 23 करोड़ रुपये के थे। शुभम के पिता की 28-40 करोड़ की संपत्ति कुर्क हो चुकी है। जायसवाल पर 50 हजार का इनाम है और लुकआउट नोटिस जारी।
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कोडिन सिरप तस्करी का विस्तृत नेटवर्क: आंकड़े जो चौंकाते हैं
यह तस्करी का साम्राज्य 2000 करोड़ रुपये का है, जिसमें 37 लाख से अधिक बोतलें बिकीं। ईडी ने लखनऊ, वाराणसी, जौनपुर, सहारनपुर, रांची और अहमदाबाद में छापे मारे, 1000 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज। हिमाचल से सिरप पश्चिम बंगाल के रास्ते रांची की शैली ट्रेडर्स तक पहुंचता, फिर बांग्लादेश की मेघना नदी से तस्करी। अमित सिंह टाटा जैसे साथी वाराणसी में श्री मेडिकल एजेंसी चला रहे थे।
उत्तर प्रदेश में पिछले साल 50 करोड़ रुपये की कोडिन जब्त हुई। पूर्वांचल (वाराणसी, गोरखपुर) इसका गेटवे बन गया। गाजियाबाद में गोदाम, आगरा-लखनऊ में डिस्ट्रीब्यूशन। फर्जी फर्में कुछ महीनों में बंद कर नई खोल ली जातीं। बिहार-नेपाल बॉर्डर पर युवाओं को नशे का शिकार बनाया जा रहा था।
युवाओं पर नशे का कहर: सामाजिक प्रभाव
कोडिन सिरप से युवाओं में लत, स्वास्थ्य बिगड़ना और अपराध बढ़े। उत्तर प्रदेश में नशे से जुड़े केस दोगुने हो गए। यह न केवल स्वास्थ्य आपदा है, बल्कि आतंक फंडिंग से भी जुड़ा हो सकता है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने STF को सख्त निर्देश दिए, SIT गठित की।
राजनीतिक रंग: अखिलेश यादव vs सीएम योगी का टकराव
यह मामला सियासी हो गया। सीएम योगी ने माफिया-सपा सांठगांठ का आरोप लगाया। अखिलेश यादव ने इनाम राशि पर तंज कसा, जांच निष्पक्षता पर सवाल उठाए। समाजवादी पार्टी ने इसे सरकार की नाकामी बताया, जबकि BJP ने योगी के एक्शन की तारीफ की। यह विवाद 2026 चुनावों तक गूंज सकता है।
पुलिस की आगे की रणनीति: शुभम जायसवाल जल्द पकड़ में?
STF अब नर्वे से और सुराग ले रही। शुभम दुबई में है, लेकिन इंटरपोल को अलर्ट। ईडी मनी ट्रेल ट्रैक कर रही। संपत्ति कुर्की तेज। नेपाल-बांग्लादेश रूट सील करने के प्रयास। ड्रग इंस्पेक्टरों पर भी शिकंजा। आने वाले दिनों में बड़े खुलासे संभावित।
कोडिन तस्करी रोकने के उपाय: क्या है समाधान?
- सख्त बॉर्डर निगरानी और ड्रोन सर्विलांस बढ़ाएं।
- फार्मा कंपनियों पर जीएसटी-ड्रग लाइसेंस सत्यापन।
- जागरूकता अभियान युवाओं के लिए।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग नेपाल-बांग्लादेश से।
यह गिरफ्तारी कोडिन सिरप तस्करी के खिलाफ जंग में टर्निंग पॉइंट है। उत्तर प्रदेश पुलिस की मुस्तैदी सराहनीय।
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